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Sirmour News: रेणुकाजी बांध के छह सह-स्वामियों को मिलेगा बढ़ा हुआ मुआवज कुर्की वारंट भी जारी
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सरकार ने धारा 18 और 28-ए के तहत याचिका नहीं देने पर उठाई थी आपत्ति
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। रेणुकाजी बांध परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे से जुड़े मामले में अदालत ने जगत राम समेत छह आवेदकों को अधिग्रहित जमीन का सह-स्वामी मानते हुए बढ़े हुए मुआवजे का हकदार माना है। अदालत ने कहा कि अन्य सह-स्वामियों के पक्ष में तय की बढ़ी दर का लाभ आवेदकों को भी उनके हिस्से के अनुपात में दिया जाना चाहिए।
न्यायाधीश गौरव महाजन ने आदेश में प्रधान सचिव (ऊर्जा), हिमाचल प्रदेश सरकार और भूमि अधिग्रहण कलेक्टर शिमला की चल-अचल संपत्ति के संबंध में कुर्की वारंट जारी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही वारंट को 1 अक्तूबर 2026 को वापस पेश करने के आदेश दिए हैं। संगड़ाह क्षेत्र की जमीन रेणुकाजी बांध और डूब क्षेत्र के लिए अधिग्रहित की थी। भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने वर्ष 2012 में मुआवजा तय किया था। बाद में इसी अधिग्रहण से जुड़े अन्य सह-स्वामियों की भूमि संदर्भ याचिका पर जिला अदालत ने 18 अक्तूबर 2023 को जमीन का बाजार मूल्य सात लाख रुपये प्रति बीघा निर्धारित किया। इसके साथ अधिनियम के तहत देय वैधानिक लाभ देने का भी आदेश हुआ था।
आवेदकों को उनकी जमीन के हिस्से का मूल मुआवजा वर्ष 2017 में मिल चुका था। उनका कहना था कि वे भी उसी अधिग्रहित जमीन के अन्य सह-स्वामी हैं। ऐसे में अन्य सह-स्वामियों के पक्ष में तय बढ़ी दर का लाभ उन्हें भी मिलना चाहिए। प्रतिवादियों ने अदालत में आपत्ति जताई कि आवेदकों ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 18 और 28-ए के तहत संदर्भ याचिका दायर नहीं की थी। इसलिए उन्हें बढ़े हुए मुआवजे का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने यह दलील स्वीकार नहीं की।
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अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट और हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सह-स्वामी को केवल तकनीकी आधार पर न्यायोचित बढ़े हुए मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने आवेदकों को उनके हिस्से के अनुपात में बढ़े हुए मुआवजे का हकदार माना।
1.08 करोड़ की राशि को लेकर सामने आया था तथ्य
आवेदकों ने वर्ष 2025 में पहले निष्पादन याचिका दायर की थी। नाजिर की रिपोर्ट के आधार पर इसे वापस लिया गया था। बाद में पता चला कि 1,08,40,600 रुपये की राशि उस निष्पादन याचिका में जमा नहीं हुई थी, बल्कि संबंधित आरएफए में जमा थी। इसके बाद आवेदकों ने नई निष्पादन याचिका दाखिल की।
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दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। रेणुकाजी बांध परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे से जुड़े मामले में अदालत ने जगत राम समेत छह आवेदकों को अधिग्रहित जमीन का सह-स्वामी मानते हुए बढ़े हुए मुआवजे का हकदार माना है। अदालत ने कहा कि अन्य सह-स्वामियों के पक्ष में तय की बढ़ी दर का लाभ आवेदकों को भी उनके हिस्से के अनुपात में दिया जाना चाहिए।
न्यायाधीश गौरव महाजन ने आदेश में प्रधान सचिव (ऊर्जा), हिमाचल प्रदेश सरकार और भूमि अधिग्रहण कलेक्टर शिमला की चल-अचल संपत्ति के संबंध में कुर्की वारंट जारी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही वारंट को 1 अक्तूबर 2026 को वापस पेश करने के आदेश दिए हैं। संगड़ाह क्षेत्र की जमीन रेणुकाजी बांध और डूब क्षेत्र के लिए अधिग्रहित की थी। भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने वर्ष 2012 में मुआवजा तय किया था। बाद में इसी अधिग्रहण से जुड़े अन्य सह-स्वामियों की भूमि संदर्भ याचिका पर जिला अदालत ने 18 अक्तूबर 2023 को जमीन का बाजार मूल्य सात लाख रुपये प्रति बीघा निर्धारित किया। इसके साथ अधिनियम के तहत देय वैधानिक लाभ देने का भी आदेश हुआ था।
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आवेदकों को उनकी जमीन के हिस्से का मूल मुआवजा वर्ष 2017 में मिल चुका था। उनका कहना था कि वे भी उसी अधिग्रहित जमीन के अन्य सह-स्वामी हैं। ऐसे में अन्य सह-स्वामियों के पक्ष में तय बढ़ी दर का लाभ उन्हें भी मिलना चाहिए। प्रतिवादियों ने अदालत में आपत्ति जताई कि आवेदकों ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 18 और 28-ए के तहत संदर्भ याचिका दायर नहीं की थी। इसलिए उन्हें बढ़े हुए मुआवजे का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने यह दलील स्वीकार नहीं की।
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अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट और हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सह-स्वामी को केवल तकनीकी आधार पर न्यायोचित बढ़े हुए मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने आवेदकों को उनके हिस्से के अनुपात में बढ़े हुए मुआवजे का हकदार माना।
1.08 करोड़ की राशि को लेकर सामने आया था तथ्य
आवेदकों ने वर्ष 2025 में पहले निष्पादन याचिका दायर की थी। नाजिर की रिपोर्ट के आधार पर इसे वापस लिया गया था। बाद में पता चला कि 1,08,40,600 रुपये की राशि उस निष्पादन याचिका में जमा नहीं हुई थी, बल्कि संबंधित आरएफए में जमा थी। इसके बाद आवेदकों ने नई निष्पादन याचिका दाखिल की।