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पानी इक्ट्ठा होने देने का मतलब मलेरिया को दावत
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अमर उजाला ब्यूरो
कालाअंब (सिरमौर)। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग जिला सिरमौर ने रावमापा कालाअंब में जिला स्तरीय विश्व मलेरिया दिवस मनाया। इस अवसर पर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से विद्यार्थियों ने क्षेत्र में रैली भी निकाली। रैली को जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. केके पराशर ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली एक्साइज कॉलोनी कालाअंब से होती हुई कालाअंब बैरियर से वापस होती हुई स्कूल पहुंची। इस दौरान विद्यार्थियों ने लोगों को मलेरिया से बचाव के लिए पंफ्लेट भी बांटे। रैली में करीब 470 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। रैली के समापन के बाद स्कूल प्रांगण में निबंध लेखन स्पर्धा का आयोजन किया गया, जिसमें नवमी और दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में हिमांशु, सानिया और प्रीति ने क्रमश: पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर जीत दर्ज की। सूचना शिक्षा एवं संप्रेषण प्रभाग जिला सिरमौर से स्वास्थ्य शिक्षक मनमोहन ठाकुर ने मलेरिया रोग पनपने और उससे बचाव के तरीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह एक वैश्विक जन स्वास्थ्य समस्या है। इस बीमारी से खुद को सावधान रखकर ही बचाया जा सकता है।
ये हैं बीमारी के लक्षण
मलेरिया के रोगी को पहले सर्दी और फिर गर्मी लगती है। कंपकंपी के साथ तेज बुखार हो जाता है। इस अव्यवस्था में रोगी को तुरंत इलाज करवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कूलर का पानी रोज बदलते रहना चाहिए। गमलों, टायरों, टूटे-फूटे बर्तनों, कोकाकोला के ढक्कनों, नालियों में पानी खड़ा नहीं होने देना चाहिए। खड़े पानी में मिट्टी का तेल डाला जा सकता है, जिससे मलेरिया के मच्छर लारवा पनप नहीं सके। स्वास्थ्य शिक्षिका कोमल चौहान ने कहा कि प्रदेश में 2020 तक मलेरिया रोग का उन्मूलन करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानाचार्य चंद्र प्रकाश बैंजवाल, मधु गुप्ता, काला आम स्वास्थ्य उपकेंद्र प्रभारी शिमला देवी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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कालाअंब (सिरमौर)। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग जिला सिरमौर ने रावमापा कालाअंब में जिला स्तरीय विश्व मलेरिया दिवस मनाया। इस अवसर पर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से विद्यार्थियों ने क्षेत्र में रैली भी निकाली। रैली को जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. केके पराशर ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली एक्साइज कॉलोनी कालाअंब से होती हुई कालाअंब बैरियर से वापस होती हुई स्कूल पहुंची। इस दौरान विद्यार्थियों ने लोगों को मलेरिया से बचाव के लिए पंफ्लेट भी बांटे। रैली में करीब 470 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। रैली के समापन के बाद स्कूल प्रांगण में निबंध लेखन स्पर्धा का आयोजन किया गया, जिसमें नवमी और दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में हिमांशु, सानिया और प्रीति ने क्रमश: पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर जीत दर्ज की। सूचना शिक्षा एवं संप्रेषण प्रभाग जिला सिरमौर से स्वास्थ्य शिक्षक मनमोहन ठाकुर ने मलेरिया रोग पनपने और उससे बचाव के तरीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह एक वैश्विक जन स्वास्थ्य समस्या है। इस बीमारी से खुद को सावधान रखकर ही बचाया जा सकता है।
ये हैं बीमारी के लक्षण
मलेरिया के रोगी को पहले सर्दी और फिर गर्मी लगती है। कंपकंपी के साथ तेज बुखार हो जाता है। इस अव्यवस्था में रोगी को तुरंत इलाज करवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कूलर का पानी रोज बदलते रहना चाहिए। गमलों, टायरों, टूटे-फूटे बर्तनों, कोकाकोला के ढक्कनों, नालियों में पानी खड़ा नहीं होने देना चाहिए। खड़े पानी में मिट्टी का तेल डाला जा सकता है, जिससे मलेरिया के मच्छर लारवा पनप नहीं सके। स्वास्थ्य शिक्षिका कोमल चौहान ने कहा कि प्रदेश में 2020 तक मलेरिया रोग का उन्मूलन करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानाचार्य चंद्र प्रकाश बैंजवाल, मधु गुप्ता, काला आम स्वास्थ्य उपकेंद्र प्रभारी शिमला देवी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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