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पुस्तकालय में पुस्तकें नहीं, पाठक उग्र

Wed, 03 Jan 2018 08:01 PM IST
Updated Wed, 03 Jan 2018 08:01 PM IST
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पुस्तकें नहीं मिलने पर उग्र हुए पाठक
गुस्साए पाठकों ने उपायुक्त सिरमौर को सौंपी शिकायत - फोटो : अमर उजाला

अमर उजाला ब्यूरो

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नाहन (सिरमौर)।
जनपद सिरमौर की ऐतिहासिक महिमा लाइब्रेरी में पुस्तकें नहीं मिलने पर पाठक उग्र हो गए हैं। बुधवार को लाइब्रेरी में पढ़ने पहुंचे युवा पुस्तकों की अलमारियों में लगे तालों को देख हतप्रभ हो गए। गुस्साए पाठकों ने उपायुक्त सिरमौर बीसी बडालिया से इसकी लिखित शिकायत की है। उनका आरोप है कि जब भी लाइब्रेरी के प्रभारी छुट्टी पर होते हैं तो उन्हें पुस्तकें नहीं मिल पातीं। पुस्तकों की अलमारियों और रेफरेंस के कमरे में ताला लगा रहता है। लाइब्रेरी के प्रभारी कुलदप सिंह का कहना है कि अस्वस्थ होने के कारण वे मेडिकल लीव पर हैं। कीमती पुस्तकों की जिम्मेदारी संभालने वाला कोई नहीं है। ऐसे में वह चाबी किसके पास दें। लिहाजा, अलमारियों में ताले लगाने पड़ते हैं।

बुधवार सुबह करीब दस बजे के बाद सौ से अधिक पाठक लाइब्रेरी पहुंचे। यहां पर लाइब्रेेरी की अलमारियों में ताले लगे होने से वह हतप्रभ रह गए। पाठकों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए एक शिकायत पत्र लिखकर उपायुक्त को शिकायत की। डीसी को दिए शिकायत पत्र में पाठकों का आरोप है कि यहां पर अक्सर उन्हें ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लाइब्रेरी हर रोज खुली नहीं रहती है। लाइब्रेेरी में निजी पुस्तकों को पढ़ने की अनुमति नहीं मिलती। रेफरेंस की पुस्तकें अकसर मिल नहीं पातीं। उन्होंने प्रभारी पर भी आरोप लगाया है कि उनका पाठकों के साथ व्यवहार सही नहीं है। अमृतांजलि, प्रोमिला चौहान, यशपाल, अंजु चौहान, किरण राय, रवीना चौहान, कृतिका ठाकुर, कन्नु राणा, विनोद, कपिल, पवन, नीरज, बबीता, अजय, पवन, प्रवीण, अजय, राजीव ने बताया कि लाइब्रेरी में अकसर पुस्तकें नहीं मिलतीं। यहां पर कई लोग विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं।
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क्या कहते हैं प्रभारी
लाइब्रेेरी के प्रभारी असिस्टेंट लाइब्रेरियन कुलदीप सिंह का कहना है कि वे बुधवार सुबह आए थे। लेकिन उन्हें कमर में पेन हुआ। इसके बाद में अस्पताल गए और चिकित्सक ने लगभग एक सप्ताह आराम करने की सलाह दी। उन्होंने अधिकारियों को अपनी समस्या बताते हुए मेडिकल लीव ले ली और घर आ गए। जिम्मेदार अधिकारी लाइब्रेरी में नहीं है। चतुर्थ श्रेणी कर्मी के पास लाखों की पुस्तकों की जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती। यदि कोई पुस्तक गुम हो जाए तो रिकवरी कौन भरेगा ?

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