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चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी टटोल नब्ज
Updated Mon, 02 Jul 2018 10:16 PM IST
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पच्छाद की छह पीएचसी में डॉक्टर, न फार्मासिस्ट
ग्रामीणों को नहीं मिल पा रही माकूल स्वास्थ्य सुविधा
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी टटोल रहा मरीजों की नब्ज
देवराज शर्मा
सराहां (सिरमौर)। स्वास्थ्य क्षेत्र में अव्वल होने के सरकारी दावे धरातल पर धराशायी हो रहे हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोल तो दिए लेकिन चिकित्सकों की व्यवस्था नहीं की। परिणामस्वरूप ऐसे स्वास्थ्य केंद्रों में लोगों की सेहत एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के हवाले है। हालात यह है कि पच्छाद की छह पीएचसी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दवाइयां बांट रहे हैं। ऐसे में यदि गलत दवाई के सेवन से अनहोनी घटना हो जाए तो कौन इसका जिम्मेदार होगा? पीएचसी में डॉक्टर नहीं होने के कारण क्षेत्र के लोग सराहां-सोलन और नाहन जाने को विवश हैं। जबकि छुटपुट बीमारी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से ही दवाइयां ली जा रही हैं। क्षेत्रवासी सोमदत्त, रमेश कुमार, राजेंद्र शर्मा, देव स्वरूप शर्मा, राम सिंह, बलवीर सिंह, कल्याण सिंह, सुनीता देवी, नीमा देवी, भूप सिंह, राजेश कुमार और उपेंद्र सिंह ने बताया कि यहां घिनी, मानगढ़, बागथन, कोटीबधोग, हाब्बन और नैनाटिक्कर पीएचसी और स्वास्थ्य उपकेंद्रों में चिकित्सक नहीं हैं। इससे यहां के ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। लोगों को अधिक पैसा खर्च कर इलाज करवाने के लिए सराहां, सोलन और नाहन तक का सफर करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि सरकार को चाहिए कि वह अविलंब यहां डॉक्टर तैनात करे। ग्रामीणों ने कहा कि इस समस्या के समाधान को जल्द स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से भी मिला जाएगा। इस संबंध में बीएमओ पच्छाद डॉक्टर संदीप शर्मा ने बताया कि जिन पीएचसी में डॉक्टरों के पद रिक्त पड़े हैं, उनकी सूचना उच्चाधिकारियों को भेजी जा चुकी है।
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ग्रामीणों को नहीं मिल पा रही माकूल स्वास्थ्य सुविधा
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी टटोल रहा मरीजों की नब्ज
देवराज शर्मा
सराहां (सिरमौर)। स्वास्थ्य क्षेत्र में अव्वल होने के सरकारी दावे धरातल पर धराशायी हो रहे हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोल तो दिए लेकिन चिकित्सकों की व्यवस्था नहीं की। परिणामस्वरूप ऐसे स्वास्थ्य केंद्रों में लोगों की सेहत एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के हवाले है। हालात यह है कि पच्छाद की छह पीएचसी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दवाइयां बांट रहे हैं। ऐसे में यदि गलत दवाई के सेवन से अनहोनी घटना हो जाए तो कौन इसका जिम्मेदार होगा? पीएचसी में डॉक्टर नहीं होने के कारण क्षेत्र के लोग सराहां-सोलन और नाहन जाने को विवश हैं। जबकि छुटपुट बीमारी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से ही दवाइयां ली जा रही हैं। क्षेत्रवासी सोमदत्त, रमेश कुमार, राजेंद्र शर्मा, देव स्वरूप शर्मा, राम सिंह, बलवीर सिंह, कल्याण सिंह, सुनीता देवी, नीमा देवी, भूप सिंह, राजेश कुमार और उपेंद्र सिंह ने बताया कि यहां घिनी, मानगढ़, बागथन, कोटीबधोग, हाब्बन और नैनाटिक्कर पीएचसी और स्वास्थ्य उपकेंद्रों में चिकित्सक नहीं हैं। इससे यहां के ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। लोगों को अधिक पैसा खर्च कर इलाज करवाने के लिए सराहां, सोलन और नाहन तक का सफर करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि सरकार को चाहिए कि वह अविलंब यहां डॉक्टर तैनात करे। ग्रामीणों ने कहा कि इस समस्या के समाधान को जल्द स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से भी मिला जाएगा। इस संबंध में बीएमओ पच्छाद डॉक्टर संदीप शर्मा ने बताया कि जिन पीएचसी में डॉक्टरों के पद रिक्त पड़े हैं, उनकी सूचना उच्चाधिकारियों को भेजी जा चुकी है।