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Sirmour News: चार में बीपी, छह मिले मधुमेह से ग्रस्त मरीज
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सचित्र
चार में बीपी और छह मिले मधुमेह से ग्रस्त मरीज
एनसीडी कैंप में जांचा 40 लोगों का स्वास्थ्य
डे केयर सेंटर नाहन में मंगलवार को एनसीडी कैंप आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। स्वास्थ्य खंड धगेड़ा की ओर से डे केयर सेंटर नाहन में मंगलवार को एनसीडी कैंप (गैर संक्रामक रोग) का आयोजन किया गया। शिविर में 40 लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई। इस दौरान चार लोगों को बीपी की समस्या और छह लोगों में शुगर पाई गई। इस दौरान मरीजों को निशुल्क दवाइयां भी बांटी गईं।
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोनीषा अग्रवाल ने बताया कि शिविर में लोगों को स्ट्रोक (लकवा) के कारणों और बचाव की जानकारी दी गई। लोगों को आयोडीन की कमी से होने वाले रोगों के बारे में भी जागरूक किया गया। साथ ही मलेरिया, डेंगू, स्क्रब टायफस, चिकनगुनिया के बारे में भी जागरूक कर पंपलेट बांटे गए।
डॉ. छवि बंसल ने कहा कि लकवा की स्थिति में 60 से 90 मिनट के अंदर मरीज को यदि चिकित्सीय उपचार मिल जाए तो रोगी पूर्णतया ठीक हो सकता है। लकवा में मुंह टेढ़ा होना, एक तरफ का हाथ, बाजू और टांग का कमजोर पड़ जाना इसके मुख्य लक्षण हैं।
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जुबान तुतलाना जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत मरीज को अस्पताल ले जाना चाहिए। यदि समय पर उपचार मिल जाए तो वह ठीक हो सकता है। लकवा के बहुत कारण हो सकते हैं, लेकिन बीपी इसमें एक मुख्य कारण है। उन्होंने आयोडीन की कमी से होने वाले रोगों के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया।
इस मौके पर डॉ. निखिल, स्वास्थ्य शिक्षिका कृष्णा राठौर, सुपरवाइजर संतोष भारद्वाज, सीएचओ नीना अलीशा, विशाल पंवार समेत स्वास्थ्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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चार में बीपी और छह मिले मधुमेह से ग्रस्त मरीज
एनसीडी कैंप में जांचा 40 लोगों का स्वास्थ्य
डे केयर सेंटर नाहन में मंगलवार को एनसीडी कैंप आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। स्वास्थ्य खंड धगेड़ा की ओर से डे केयर सेंटर नाहन में मंगलवार को एनसीडी कैंप (गैर संक्रामक रोग) का आयोजन किया गया। शिविर में 40 लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई। इस दौरान चार लोगों को बीपी की समस्या और छह लोगों में शुगर पाई गई। इस दौरान मरीजों को निशुल्क दवाइयां भी बांटी गईं।
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोनीषा अग्रवाल ने बताया कि शिविर में लोगों को स्ट्रोक (लकवा) के कारणों और बचाव की जानकारी दी गई। लोगों को आयोडीन की कमी से होने वाले रोगों के बारे में भी जागरूक किया गया। साथ ही मलेरिया, डेंगू, स्क्रब टायफस, चिकनगुनिया के बारे में भी जागरूक कर पंपलेट बांटे गए।
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डॉ. छवि बंसल ने कहा कि लकवा की स्थिति में 60 से 90 मिनट के अंदर मरीज को यदि चिकित्सीय उपचार मिल जाए तो रोगी पूर्णतया ठीक हो सकता है। लकवा में मुंह टेढ़ा होना, एक तरफ का हाथ, बाजू और टांग का कमजोर पड़ जाना इसके मुख्य लक्षण हैं।
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जुबान तुतलाना जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत मरीज को अस्पताल ले जाना चाहिए। यदि समय पर उपचार मिल जाए तो वह ठीक हो सकता है। लकवा के बहुत कारण हो सकते हैं, लेकिन बीपी इसमें एक मुख्य कारण है। उन्होंने आयोडीन की कमी से होने वाले रोगों के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया।
इस मौके पर डॉ. निखिल, स्वास्थ्य शिक्षिका कृष्णा राठौर, सुपरवाइजर संतोष भारद्वाज, सीएचओ नीना अलीशा, विशाल पंवार समेत स्वास्थ्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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