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नाहन में जैव विविधता के दोहन पर मंथन
Updated Tue, 01 May 2018 11:30 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
जिला परिषद के सभागार में मंगलवार को राज्य जैव विविधता बोर्ड के सौजन्य से ‘जैव विविधता को मुख्य धारा में लाना’ और उनकी आजीविका को कायम रखना’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। समारोह में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने जैव विविधता को लेकर अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि प्रकृति के पास मनुष्य के जीवन यापन के लिए अनमोल खजाना है। मनुष्य को प्रकृति का शोषण नहीं बल्कि आवश्यकतानुसार ही दोहन करना चाहिए। तभी जैव विविधता एवं पर्यावरण का संरक्षण संभव होगा। जैव विविधता का कम होना एक विश्वव्यापी समस्या है जिस प्रकार मनुष्य अवैज्ञानिक तौर पर प्रकृति का दोहन कर रहा है उससे प्रकृति का असंतुलन बढ़ रहा है। वर्तमान में रासायनिक खादों का फसलों में आवश्यकता से अधिक उपयोग किया जा रहा है, उससे जहां मनुष्य के शरीर में पोषक तत्व की कमी आने लगी है वहीं पर जैव विविधता के मायने भी समाप्त होने के कगार पर आ गए हैं।
जैव विविधता के संरक्षण के लिए पंचायत स्तर पर अभियान को एक जन आंदोलन का रूप देना होगा। तभी इस कार्यशाला का उद्देश्य सार्थक होगा। सिरमौर जिला की कुल 228 पंचायतों में से केवल 48 पंचायतों में जैव विविधता समितियां गठित हुई हैं जिसे शतप्रतिशत करना जरूरी है। इसके लिए उन्होंने वन विभाग को आवश्यक निर्देश दिए।
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उपायुक्त सिरमौर ललित जैन ने कहा कि विविधता के कारण ही आज विकास संभव है। हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव कुणाल सत्यार्थी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में 3306 जैव विविधता प्रबंधन समितियों का गठन किया जाएगा। प्रबंधन समिति में सात लोग होंगे। इनमें एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष तथा पांच सदस्य होंगे। उन्होंने कहा कि इस समिति को अपनी पंचायत की जैव विविधता संबंधी हर गतिविधि एक रजिस्टर में दर्ज करनी होगी। इससे संबंधित लाभ का 95 प्रतिशत भाग ग्राम पंचायत को मिलेगा। उन्होंने हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड की गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी।
इस अवसर पर जैव विविधता बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पंकज शर्मा, विनीत नेगी, मुख्य अरण्यपाल नाहन आरके गुप्ता, जिला के जिला परिषद सदस्य, बीडीसी सदस्य, ग्राम पंचायतों के प्रधान तथा उपप्रधानों के अतिरिक्त वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी उपस्थित थे।
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नाहन (सिरमौर)।
जिला परिषद के सभागार में मंगलवार को राज्य जैव विविधता बोर्ड के सौजन्य से ‘जैव विविधता को मुख्य धारा में लाना’ और उनकी आजीविका को कायम रखना’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। समारोह में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने जैव विविधता को लेकर अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि प्रकृति के पास मनुष्य के जीवन यापन के लिए अनमोल खजाना है। मनुष्य को प्रकृति का शोषण नहीं बल्कि आवश्यकतानुसार ही दोहन करना चाहिए। तभी जैव विविधता एवं पर्यावरण का संरक्षण संभव होगा। जैव विविधता का कम होना एक विश्वव्यापी समस्या है जिस प्रकार मनुष्य अवैज्ञानिक तौर पर प्रकृति का दोहन कर रहा है उससे प्रकृति का असंतुलन बढ़ रहा है। वर्तमान में रासायनिक खादों का फसलों में आवश्यकता से अधिक उपयोग किया जा रहा है, उससे जहां मनुष्य के शरीर में पोषक तत्व की कमी आने लगी है वहीं पर जैव विविधता के मायने भी समाप्त होने के कगार पर आ गए हैं।
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जैव विविधता के संरक्षण के लिए पंचायत स्तर पर अभियान को एक जन आंदोलन का रूप देना होगा। तभी इस कार्यशाला का उद्देश्य सार्थक होगा। सिरमौर जिला की कुल 228 पंचायतों में से केवल 48 पंचायतों में जैव विविधता समितियां गठित हुई हैं जिसे शतप्रतिशत करना जरूरी है। इसके लिए उन्होंने वन विभाग को आवश्यक निर्देश दिए।
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उपायुक्त सिरमौर ललित जैन ने कहा कि विविधता के कारण ही आज विकास संभव है। हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव कुणाल सत्यार्थी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में 3306 जैव विविधता प्रबंधन समितियों का गठन किया जाएगा। प्रबंधन समिति में सात लोग होंगे। इनमें एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष तथा पांच सदस्य होंगे। उन्होंने कहा कि इस समिति को अपनी पंचायत की जैव विविधता संबंधी हर गतिविधि एक रजिस्टर में दर्ज करनी होगी। इससे संबंधित लाभ का 95 प्रतिशत भाग ग्राम पंचायत को मिलेगा। उन्होंने हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड की गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी।
इस अवसर पर जैव विविधता बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पंकज शर्मा, विनीत नेगी, मुख्य अरण्यपाल नाहन आरके गुप्ता, जिला के जिला परिषद सदस्य, बीडीसी सदस्य, ग्राम पंचायतों के प्रधान तथा उपप्रधानों के अतिरिक्त वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी उपस्थित थे।