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मांगों को लेकर मजदूर यूनियन और प्रबंधन में ठनी
Updated Tue, 13 Nov 2018 10:35 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)। सरकारी क्षेत्र के बिरोजा एवं तारपीन कारखाना नाहन में मजदूर यूनियन ने मांगों को लेकर महाप्रबंधक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महाप्रबंधक पर यूनियन ने प्रताड़ना के आरोप भी लगाए हैं। जबकि, महाप्रबंधक ने यूनियन के वरिष्ठ उपप्रधान पर तबादले की धमकी देने और दुर्व्यवहार के आरोप जड़े हैं। कुछ दिन से मजदूर यूनियन और महाप्रबंधक के बीच आरोप-प्रत्यारोप की लड़ाई चल रही है। अब इस मसले पर मजदूर यूनियन ने राज्य वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक को शिकायत भेजी है। जानकारी के मुताबिक नाहन में चल रहे बिरोजा एवं तारपीन कारखाने की मजदूर यूनियन के महासचिव देवदत्त भंडारी, वरिष्ठ उपप्रधान बलबीर सिंह चौहान, अशोक चौहान और कोषाध्यक्ष रमन कुमार ने प्रबंध निदेशक को भेजी शिकायत में कहा कि कारखाने में निर्देशों की अवहेलना हो रही है। उन्होंने बताया कि नौ अक्तूबर को कार्यकारी निदेशक ने नाहन प्रवास के दौरान मजदूरों को मिलने वाले तेल और साबुन का मासिक खर्चा एक दिन में देने के निर्देश दिए थे। यह खर्च एक साल से नहीं दिया गया है। प्रबंध निदेशक ने भी 15 सितंबर को सेफ्टी शूज के लिए 1215 रुपये सितंबर माह के वेतन में जारी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों के निर्देशों के बावजूद उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है। आरोप है कि कारखाने के महाप्रबंधक कामगारों के साथ नकारात्मक रवैया अपना रहे हैं। सेवानिवृत्त कामगारों को मेडिकल बिलों का भुगतान नहीं हो पाया है। इस मसले पर यूनियन ने कार्रवाई की मांग की है।
सभी आरोप बेबुनियाद : महाप्रबंधक
कारखाने के महाप्रबंधक परमिंद्र सिंह ने बताया कि सभी आरोप बेबुनियाद हैं। यूनियन के वरिष्ठ उपप्रधान बलबीर सिंह चौहान फैक्ट्री के कामकाज में हस्तक्षेप डाल रहे हैं। बीते दिन उनसे दुर्व्यवहार किया गया है। कार्यालय के रिकॉर्ड से भी छेड़छाड़ हुई है। लिहाजा, इसके लिए उन्हें नोटिस भी दिया गया है, लेकिन उन्होंने इसे लेने से इनकार कर दिया। उन्हें ट्रांसफर की धमकी भी दी गई है। साबुन तेल का खर्च, मेडिकल बिलों का भुगतान संबंधी मामला प्रबंधन को भेजा गया है। सेफ्टी शूज का मामला यूनियन के पदाधिकारी ने स्वयं रिजेक्ट कर दिया था। उन्होंने कहा कि उक्त व्यक्ति यूनियन का हवाला देकर बेवजह दबाव बना रहा है। इसके खिलाफ 2015 में अकुशल कामगारों की हुई भर्ती में अपने बेटे को नियमों को ताक पर रख नौकरी दिलाने का मामला भी विभाग में चल रहा है। उन्होंने बताया कि इस मामले में उच्चाधिकारियों को लिखा गया है।
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नाहन (सिरमौर)। सरकारी क्षेत्र के बिरोजा एवं तारपीन कारखाना नाहन में मजदूर यूनियन ने मांगों को लेकर महाप्रबंधक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महाप्रबंधक पर यूनियन ने प्रताड़ना के आरोप भी लगाए हैं। जबकि, महाप्रबंधक ने यूनियन के वरिष्ठ उपप्रधान पर तबादले की धमकी देने और दुर्व्यवहार के आरोप जड़े हैं। कुछ दिन से मजदूर यूनियन और महाप्रबंधक के बीच आरोप-प्रत्यारोप की लड़ाई चल रही है। अब इस मसले पर मजदूर यूनियन ने राज्य वन विकास निगम के प्रबंध निदेशक को शिकायत भेजी है। जानकारी के मुताबिक नाहन में चल रहे बिरोजा एवं तारपीन कारखाने की मजदूर यूनियन के महासचिव देवदत्त भंडारी, वरिष्ठ उपप्रधान बलबीर सिंह चौहान, अशोक चौहान और कोषाध्यक्ष रमन कुमार ने प्रबंध निदेशक को भेजी शिकायत में कहा कि कारखाने में निर्देशों की अवहेलना हो रही है। उन्होंने बताया कि नौ अक्तूबर को कार्यकारी निदेशक ने नाहन प्रवास के दौरान मजदूरों को मिलने वाले तेल और साबुन का मासिक खर्चा एक दिन में देने के निर्देश दिए थे। यह खर्च एक साल से नहीं दिया गया है। प्रबंध निदेशक ने भी 15 सितंबर को सेफ्टी शूज के लिए 1215 रुपये सितंबर माह के वेतन में जारी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों के निर्देशों के बावजूद उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है। आरोप है कि कारखाने के महाप्रबंधक कामगारों के साथ नकारात्मक रवैया अपना रहे हैं। सेवानिवृत्त कामगारों को मेडिकल बिलों का भुगतान नहीं हो पाया है। इस मसले पर यूनियन ने कार्रवाई की मांग की है।
सभी आरोप बेबुनियाद : महाप्रबंधक
कारखाने के महाप्रबंधक परमिंद्र सिंह ने बताया कि सभी आरोप बेबुनियाद हैं। यूनियन के वरिष्ठ उपप्रधान बलबीर सिंह चौहान फैक्ट्री के कामकाज में हस्तक्षेप डाल रहे हैं। बीते दिन उनसे दुर्व्यवहार किया गया है। कार्यालय के रिकॉर्ड से भी छेड़छाड़ हुई है। लिहाजा, इसके लिए उन्हें नोटिस भी दिया गया है, लेकिन उन्होंने इसे लेने से इनकार कर दिया। उन्हें ट्रांसफर की धमकी भी दी गई है। साबुन तेल का खर्च, मेडिकल बिलों का भुगतान संबंधी मामला प्रबंधन को भेजा गया है। सेफ्टी शूज का मामला यूनियन के पदाधिकारी ने स्वयं रिजेक्ट कर दिया था। उन्होंने कहा कि उक्त व्यक्ति यूनियन का हवाला देकर बेवजह दबाव बना रहा है। इसके खिलाफ 2015 में अकुशल कामगारों की हुई भर्ती में अपने बेटे को नियमों को ताक पर रख नौकरी दिलाने का मामला भी विभाग में चल रहा है। उन्होंने बताया कि इस मामले में उच्चाधिकारियों को लिखा गया है।
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