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जनसंख्या बढ़ी, नहीं हुआ पेयजल योजनाओं का विस्तारीकरण
Updated Mon, 11 Dec 2017 08:10 PM IST
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जनसंख्या बढ़ी, नहीं हुआ पेयजल योजनाओं का विस्तारीकरण
औद्योगिक नगरी कालाअंब में पुरानी हो चुकीं हैं कई योजनाएं
बोरवेल की क्षमता के अनुसार ही पेयजल की हो रही आपूर्ति
संजय गुप्ता
कालाअंब (सिरमौर)।
औद्योगिक नगरी कालाअंब में जन स्वास्थ्य एवं सिंचाई विभाग की पेयजल योजनाएं पुरानी हो चुकी हैं। ये योजनाएं जब शुरू की गई थीं, तब से लेकर अब तक क्षेत्र की जनसंख्या में तीन-चार गुना वृद्धि हुई है। वर्ष 2003 में केंद्र सरकार से औद्योगिक पैकेज मिलने के बाद कालाअंब व इसके आसपास के इलाकों में औद्योगिक क्षेत्र विकसित हुआ। लिहाजा, क्षेत्र की आबादी भी बढ़ गई। इसके मुकाबले में पेयजल योजनाओं की स्थिति यथावत बनी रही। इन योजनाओं का विस्तारीकरण नहीं किया गया।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2003 से पहले मोगीनंद, ढाकावाला, मैनथापल, ओगली व कालाअंब क्षेत्र में एक बोरवेल से ही रोजाना 50 से 60 हजार लीटर पानी आपूर्ति किया जाता था, जो स्थानीय लोगों के लिए पर्याप्त था। 2003 में औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने के बाद आबादी बढ़ने लगी और वर्ष 2004-05 तक इलाके में पेयजल संकट छाने लगा।
वहीं, भूमिगत जलस्तर भी दिनों दिन गिरता गया। इसकी वजह से पेयजल आपूर्ति पर्याप्त नहीं हो पा रही थी। लिहाजा विभाग ने कालाअंब में नए बोरवेल की स्थापना की। कालाअंब क्षेत्र को इसी बोरवेल से आपूर्ति की जाने लगी। साथ ही मोगीनंद क्षेत्र में 30 हजार लीटर की क्षमता का अतिरिक्त जल भंडारण टैंक भी बनाया गया। इससे कुल भंडारण क्षमता 80 हजार लीटर हो गई लेकिन आबादी के हिसाब से कालाअंब व आसपास के क्षेत्रों में पानी की खपत रोजाना दो से ढाई लाख लीटर की है। जबकि, विभाग द्वारा रोजाना लगभग डेढ़ लाख लीटर जल की आपूर्ति की जा रही है। मोगीनंद, बांकाबाड़ा, मैनथापल व कालाअंब क्षेत्र में लगभग 450 परिवार स्थानीय बाशिंदों के हैं जिनकी जनसंख्या 4 हजार के करीब है। जबकि, प्रवासी लोगों को मिलाकर आबादी 15 हजार के लगभग है। औद्योगिक क्षेत्र से लाखों रुपये का राजस्व सरकारी खजाने में जा रहा है। फिर भी आईपीएच विभाग को योजनाओं को दुरुस्त करने के लिए बजट की दरकार है। कई बार मोटर आदि जलने पर क्षेत्रवासियों को 3 से 4 दिन तक पेयजल संकट झेलना पड़ रहा है।
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स्थानीय ज्ञानचंद, राजकुमार, दिनेश, दीपचंद, मान सिंह, बबलू, अनिल व संजय ने बताया कि किसी भी तकनीकी खराबी से निपटने के लिए विभाग के पास दूसरा विकल्प होना चाहिए लेकिन विभाग लाचार बना हुआ है। सरकार व प्रशासन को लोगों की इस समस्या की ओर भी ध्यान देना चाहिए।
उधर, आईपीएच विभाग के सहायक अभियंता आशीष राणा ने बताया कि कालाअंब में कुछ संसाधन पुराने हो चुके हैं जिनको स्तरोन्नत करने की कवायद शुरू की जा रही है। जल्द ही इसका हल हो जाएगा। कुछ स्थानों पर आबादी के हिसाब से पाइप लाइन छोटी पड़ रही हैं। क्षेत्र में बोरवेलों की क्षमता के मुताबिक ही पानी की आपूर्ति की जा रही है।
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----संजय गुप्ता, हितेश
औद्योगिक नगरी कालाअंब में पुरानी हो चुकीं हैं कई योजनाएं
बोरवेल की क्षमता के अनुसार ही पेयजल की हो रही आपूर्ति
संजय गुप्ता
कालाअंब (सिरमौर)।
औद्योगिक नगरी कालाअंब में जन स्वास्थ्य एवं सिंचाई विभाग की पेयजल योजनाएं पुरानी हो चुकी हैं। ये योजनाएं जब शुरू की गई थीं, तब से लेकर अब तक क्षेत्र की जनसंख्या में तीन-चार गुना वृद्धि हुई है। वर्ष 2003 में केंद्र सरकार से औद्योगिक पैकेज मिलने के बाद कालाअंब व इसके आसपास के इलाकों में औद्योगिक क्षेत्र विकसित हुआ। लिहाजा, क्षेत्र की आबादी भी बढ़ गई। इसके मुकाबले में पेयजल योजनाओं की स्थिति यथावत बनी रही। इन योजनाओं का विस्तारीकरण नहीं किया गया।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2003 से पहले मोगीनंद, ढाकावाला, मैनथापल, ओगली व कालाअंब क्षेत्र में एक बोरवेल से ही रोजाना 50 से 60 हजार लीटर पानी आपूर्ति किया जाता था, जो स्थानीय लोगों के लिए पर्याप्त था। 2003 में औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने के बाद आबादी बढ़ने लगी और वर्ष 2004-05 तक इलाके में पेयजल संकट छाने लगा।
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वहीं, भूमिगत जलस्तर भी दिनों दिन गिरता गया। इसकी वजह से पेयजल आपूर्ति पर्याप्त नहीं हो पा रही थी। लिहाजा विभाग ने कालाअंब में नए बोरवेल की स्थापना की। कालाअंब क्षेत्र को इसी बोरवेल से आपूर्ति की जाने लगी। साथ ही मोगीनंद क्षेत्र में 30 हजार लीटर की क्षमता का अतिरिक्त जल भंडारण टैंक भी बनाया गया। इससे कुल भंडारण क्षमता 80 हजार लीटर हो गई लेकिन आबादी के हिसाब से कालाअंब व आसपास के क्षेत्रों में पानी की खपत रोजाना दो से ढाई लाख लीटर की है। जबकि, विभाग द्वारा रोजाना लगभग डेढ़ लाख लीटर जल की आपूर्ति की जा रही है। मोगीनंद, बांकाबाड़ा, मैनथापल व कालाअंब क्षेत्र में लगभग 450 परिवार स्थानीय बाशिंदों के हैं जिनकी जनसंख्या 4 हजार के करीब है। जबकि, प्रवासी लोगों को मिलाकर आबादी 15 हजार के लगभग है। औद्योगिक क्षेत्र से लाखों रुपये का राजस्व सरकारी खजाने में जा रहा है। फिर भी आईपीएच विभाग को योजनाओं को दुरुस्त करने के लिए बजट की दरकार है। कई बार मोटर आदि जलने पर क्षेत्रवासियों को 3 से 4 दिन तक पेयजल संकट झेलना पड़ रहा है।
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स्थानीय ज्ञानचंद, राजकुमार, दिनेश, दीपचंद, मान सिंह, बबलू, अनिल व संजय ने बताया कि किसी भी तकनीकी खराबी से निपटने के लिए विभाग के पास दूसरा विकल्प होना चाहिए लेकिन विभाग लाचार बना हुआ है। सरकार व प्रशासन को लोगों की इस समस्या की ओर भी ध्यान देना चाहिए।
उधर, आईपीएच विभाग के सहायक अभियंता आशीष राणा ने बताया कि कालाअंब में कुछ संसाधन पुराने हो चुके हैं जिनको स्तरोन्नत करने की कवायद शुरू की जा रही है। जल्द ही इसका हल हो जाएगा। कुछ स्थानों पर आबादी के हिसाब से पाइप लाइन छोटी पड़ रही हैं। क्षेत्र में बोरवेलों की क्षमता के मुताबिक ही पानी की आपूर्ति की जा रही है।
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----संजय गुप्ता, हितेश