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Sirmour News: रसोई में पहली रोटी गाय, दूसरी कौवे और तीसरी कुत्ते के लिए रखें
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राजगढ़ की टिक्कर पंचायत के डुबलु गांव में श्रीमदभावगत कथा के दौरान महिला श्रद्धालु। संवाद
सचित्र--
डुबलु में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बोले आचार्य सुमित भारद्वाज
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। समाज धर्म के मार्ग पर चले, इसमें महिलाएं अहम भूमिका निभा सकती हैं। यह बात ग्राम पंचायत टिक्कर के डुबलु में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य सुमित भारद्वाज ने कही।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को रसोई को मंदिर समझना चाहिए। पवित्रता और ईश्वर का भजन करते हुए तैयार किया गया भोजन प्रसाद के समान होता है। ऐसे भोजन का सेवन करने वालों में भी धार्मिक सोच विकसित होती है। उन्होंने कहा कि रसोई में पहली रोटी गाय, दूसरी कौवे और तीसरी कुत्ते के लिए रखनी चाहिए।
कथा के दौरान आचार्य ने शुकदेव मुनि के जन्म, राजा परीक्षित के जन्म और उनके जीवन चरित्र का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण है। इसके श्रवण से व्यक्ति राजा परीक्षित की तरह मृत्यु के भय से मुक्त हो सकता है, लेकिन इसके लिए कथा में बताए गए संदेशों को जीवन में आत्मसात करना आवश्यक है।
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भागवत कथा में प्रतिदिन लंगर प्रसाद की व्यवस्था वर्मा परिवार की ओर से की जा रही है। कथा का समापन 15 सितंबर को हवन यज्ञ की पूर्णाहुति और विशाल भंडारे के साथ होगा।-- -- -- -
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डुबलु में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बोले आचार्य सुमित भारद्वाज
संवाद न्यूज एजेंसी
राजगढ़ (सिरमौर)। समाज धर्म के मार्ग पर चले, इसमें महिलाएं अहम भूमिका निभा सकती हैं। यह बात ग्राम पंचायत टिक्कर के डुबलु में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य सुमित भारद्वाज ने कही।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को रसोई को मंदिर समझना चाहिए। पवित्रता और ईश्वर का भजन करते हुए तैयार किया गया भोजन प्रसाद के समान होता है। ऐसे भोजन का सेवन करने वालों में भी धार्मिक सोच विकसित होती है। उन्होंने कहा कि रसोई में पहली रोटी गाय, दूसरी कौवे और तीसरी कुत्ते के लिए रखनी चाहिए।
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कथा के दौरान आचार्य ने शुकदेव मुनि के जन्म, राजा परीक्षित के जन्म और उनके जीवन चरित्र का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण है। इसके श्रवण से व्यक्ति राजा परीक्षित की तरह मृत्यु के भय से मुक्त हो सकता है, लेकिन इसके लिए कथा में बताए गए संदेशों को जीवन में आत्मसात करना आवश्यक है।
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भागवत कथा में प्रतिदिन लंगर प्रसाद की व्यवस्था वर्मा परिवार की ओर से की जा रही है। कथा का समापन 15 सितंबर को हवन यज्ञ की पूर्णाहुति और विशाल भंडारे के साथ होगा।