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बेटों को बनाएं संस्कारित, तभी बढ़ेगी नारी की गरिमा

Thu, 25 Apr 2019 09:31 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 25 Apr 2019 09:31 PM IST
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बेटों को बनाएं संस्कारित, तभी बढ़ेगी नारी की गरिमा
अमर उजाला ब्यूरो
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श्री रेणुका जी (सिरमौर)। अमर उजाला की अपराजिता 100 मिलियन स्माइल मुहिम के तहत वीरवार को बीआरसी हाल ददाहू में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें उपस्थित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा वर्कर और इलाके की अन्य महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया गया। कार्यक्रम में एसएचओ ददाहू विजय रघुवंशी ने बतौर मुख्य वक्ता शिरकत की। जबकि, डीएफओ श्रेष्ठानंद शर्मा इस अवसर पर मुख्य रूप से मौजूद रहे।
एचएचओ विजय रघुवंशी ने कहा कि नारी अपने आप में शक्ति का नाम है। पौराणिक गाथाओं में भी नारी शक्ति का वर्णन है लेकिन, अपनी शक्ति हमने खो दी है। इसका मुख्य कारण महिलाओं का अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होना है। हमें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। अपनी शक्ति को पहचान कर अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी होगी तभी नारी गरिमा और महिला सशक्तीकरण का यह संकल्प पूरा हो सकेगा। भ्रूण हत्या संकीर्ण विचारधारा है। यदि कोई इसके लिए मजबूर करता है तो महिला इसकी शिकायत पुलिस से कर सकती है। बेटियों के प्रति हो रहे अपराध को रोकना जरूरी है, इसके लिए हमें अपने बच्चों को संस्कारित बनाना होगा। बेटियों के साथ बेटों को भी संस्कारित बनाया जाए तो नारी शोषण स्वत: ही खत्म हो जाएगा। बेटे संस्कारित होने से नारी का सम्मान करेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया का संभल कर उपयोग करने की सलाह दी। इस अवसर पर ददाहू की प्रधान शकुंतला देवी, महिला मंडल प्रधान नीलम अग्रवाल ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग की खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी रक्षा गुप्ता, हेल्थ सुपरवाइजर हसीना बेगम, आरओ सुरेश पाल, बीआरसीसी बाबू राम, मनोज कुमार, एचसी जगदीश ठाकुर, सीएचटी शांति देवी समेत कई महिलाएं उपस्थित रहीं।
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नारी अबला नहीं, सबला है : डीएफओ
डीएफओ श्रेष्ठानंद शर्मा ने कहा कि नारी अबला नहीं रही। अब वह सबला हो गई है। विभिन्न पदों पर आसीन होकर महिलाएं देश का नाम रोशन कर रही हैं। नारी शक्ति बेटी, मां, बहन और पत्नी की भूमिका निभाती है। नारी का इतिहास भी गरिमापूर्ण रहा है। जरूरत है तो बस हमें अपने अधिकारों के बारे में जागरूक होने की।
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संगठित होकर करें बुराई का सामना : संतोष
जनवादी महिला समिति की अध्यक्ष संतोष कपूर ने कहा कि एक जमाना था जब संतान माताओं के नाम से जानी जाती थी। लेकिन, अब संतान पिता के नाम से जानी जाती है। संविधान ने महिला और पुरुषों को समान अधिकार दिया है। कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के साथ ही सामाजिक अपराध को रोकने की भी जरूरत है।
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