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अनियमितता बरतने पर शरली पंचायत प्रधान निलंबित
Updated Sat, 18 Aug 2018 10:19 PM IST
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सतौन (सिरमौर)। सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र की ग्राम पंचायत शरली की प्रधान जंगलो देवी को निलंबित कर दिया गया है। पंचायत में आंगनबाड़ी भवन के निर्माण के दौरान तकनीकी परामर्श के बिना लेंटर तोड़कर नई छत लगाने पर उपायुक्त ने प्रधान को निलंबित किया है। उधर, पंचायत प्रधान ने फैसले पर असंतुष्टि जाहिर करते हुए न्याय के लिए न्यायपालिका की शरण लेने की बात कही है।
जानकारी के मुताबिक 28 जुलाई को ग्रामीणों के एक दल ने पूर्व पंचायत प्रधान जगत सिंह की अगुवाई में उपायुक्त सिरमौर को शिकायत की थी कि आंगनबाड़ी भवन के छत निर्माण में अनियमितताएं बरती गई हैं। इसकी प्रारंभिक जांच बीडीओ पांवटा से करवाई गई। बीडीओ की जांच में पाया गया कि शरली-2 में आंगनबाड़ी केंद्र की जो छत थी, वह सही अवस्था में थी। उसे बिना तकनीकी परामर्श के तोड़ दिया और 14वें वित्त आयोग से प्राप्त एक लाख 22 हजार की राशि खर्च की गई। इसके पश्चात बीडीओ पांवटा ने पंचायत प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी किया। पंचायत प्रधान की ओर से भेजे गए कारण बताओ नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। लिहाजा, मामला उपायुक्त तक पहुंचा। उपायुक्त ने प्रधान के निलंबन आदेश जारी किए हैं। साथ ही पंचायत सचिव को आदेश दिए हैं कि पंचायत प्रधान से पंचायत की चल-अचल संपत्ति को कब्जे में लें। बीडीओ पांवटा अभिषेक मित्तल ने प्रधान को निलंबित करने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि तकनीकी परामर्श के बिना आंगनबाड़ी केंद्र का लेंटर तोड़कर छत लगाने के लिए भेजे गए कारण बताओ नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। मामला उपायुक्त को भेजा गया था। इसके बाद उपायुक्त ने प्रधान को निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं। उधर, पंचायत प्रधान जंगलों देवी ने बताया कि वह इस आदेश से संतुष्ट नहीं हैं। आंगनबाड़ी भवन की हालत दयनीय थी। छत से पानी टपक रहा था। अभिभावकों के कहने पर ही छत की मरम्मत की गई थी। मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटकाया जाएगा।
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जानकारी के मुताबिक 28 जुलाई को ग्रामीणों के एक दल ने पूर्व पंचायत प्रधान जगत सिंह की अगुवाई में उपायुक्त सिरमौर को शिकायत की थी कि आंगनबाड़ी भवन के छत निर्माण में अनियमितताएं बरती गई हैं। इसकी प्रारंभिक जांच बीडीओ पांवटा से करवाई गई। बीडीओ की जांच में पाया गया कि शरली-2 में आंगनबाड़ी केंद्र की जो छत थी, वह सही अवस्था में थी। उसे बिना तकनीकी परामर्श के तोड़ दिया और 14वें वित्त आयोग से प्राप्त एक लाख 22 हजार की राशि खर्च की गई। इसके पश्चात बीडीओ पांवटा ने पंचायत प्रधान को कारण बताओ नोटिस जारी किया। पंचायत प्रधान की ओर से भेजे गए कारण बताओ नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। लिहाजा, मामला उपायुक्त तक पहुंचा। उपायुक्त ने प्रधान के निलंबन आदेश जारी किए हैं। साथ ही पंचायत सचिव को आदेश दिए हैं कि पंचायत प्रधान से पंचायत की चल-अचल संपत्ति को कब्जे में लें। बीडीओ पांवटा अभिषेक मित्तल ने प्रधान को निलंबित करने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि तकनीकी परामर्श के बिना आंगनबाड़ी केंद्र का लेंटर तोड़कर छत लगाने के लिए भेजे गए कारण बताओ नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। मामला उपायुक्त को भेजा गया था। इसके बाद उपायुक्त ने प्रधान को निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं। उधर, पंचायत प्रधान जंगलों देवी ने बताया कि वह इस आदेश से संतुष्ट नहीं हैं। आंगनबाड़ी भवन की हालत दयनीय थी। छत से पानी टपक रहा था। अभिभावकों के कहने पर ही छत की मरम्मत की गई थी। मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटकाया जाएगा।
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