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वैकल्पिक चालकों को नहीं पता रास्ते, मरीज परेशान
Updated Sat, 30 Jun 2018 10:48 PM IST
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Chandigarh PGI ambulance racket
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अमर उजाला ब्यूरो
ददाहू (सिरमौर)। प्रदेश भर में 108 और 102 एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल के चलते जिला में बंद पड़ी इन सेवाओं को बहाल कर दिया गया है। बंद पड़ी 108 सेवाओं पर उत्तराखंड के चालकों ने मोर्चा संभाल लिया है। शनिवार को सिविल अस्पताल ददाहू में भी 108 की सेवा बहाल की गई जहां उत्तराखंड के चंपावत जिला के तनकपुर से आया चालक अपनी सेवाएं देने पहुंचा लेकिन सिरमौर जिला के दुर्गम क्षेत्रों व गांवों के रास्तों के जानकारी न होने के कारण यह चालक असमंजस की स्थिति में हैं। कॉल आने पर यह अपनी सेवाएं देने के तैयार तो हैं लेकिन इन्हें गांव के रास्तों व सड़कों का कोई ज्ञान नहीं है। यहां तक कि ईएमटी की भी फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में रोगियों को उनके घरों से उठा कर अस्पताल तक पहुंचा पाना मुश्किल साबित हो रहा है।
इसके अलावा चालकों के रास्ते से अंजान होने के कारण इनको मरीज तक पहुंचने में ही घंटों का समय लग जाएगा। वैसे भी ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर लोग 108 पर ही निर्भर हैं। ऐसे में 108 कर्मियों की हड़ताल से निपटने के लिए सरकार व जिला प्रशासन ने बाहरी राज्यों से चालकों तो बुला लिया है लेकिन यह सभी चालक जिला के रास्तों से पूरी तरह से अंजान हैं। जिला में स्थित 108 की 18 गाड़ियों में से 14 गाड़ियों में उत्तराखंड के चालकों ने अपनी सेवाएं देनी शुरू कर दी हैं जो कि 108 कर्मियों का फैसला न होने तक अपनी सेवाएं देते रहेंगे।
उधर, सीएमओ डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि वैकल्पिक तौर पर यह व्यवस्था की गई है। बाहरी राज्यों से आए चालकों को रास्ता समझाने के लिए अस्पताल से ही कर्मियों को साथ में भेजा जाएगा, जिससे ईएमटी का कार्य भी चलाया जा सके। उन्होंने बताया कि फिलहाल चालकों की ही व्यवस्था की गई है। ईएमटी की कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है।
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ददाहू (सिरमौर)। प्रदेश भर में 108 और 102 एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल के चलते जिला में बंद पड़ी इन सेवाओं को बहाल कर दिया गया है। बंद पड़ी 108 सेवाओं पर उत्तराखंड के चालकों ने मोर्चा संभाल लिया है। शनिवार को सिविल अस्पताल ददाहू में भी 108 की सेवा बहाल की गई जहां उत्तराखंड के चंपावत जिला के तनकपुर से आया चालक अपनी सेवाएं देने पहुंचा लेकिन सिरमौर जिला के दुर्गम क्षेत्रों व गांवों के रास्तों के जानकारी न होने के कारण यह चालक असमंजस की स्थिति में हैं। कॉल आने पर यह अपनी सेवाएं देने के तैयार तो हैं लेकिन इन्हें गांव के रास्तों व सड़कों का कोई ज्ञान नहीं है। यहां तक कि ईएमटी की भी फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में रोगियों को उनके घरों से उठा कर अस्पताल तक पहुंचा पाना मुश्किल साबित हो रहा है।
इसके अलावा चालकों के रास्ते से अंजान होने के कारण इनको मरीज तक पहुंचने में ही घंटों का समय लग जाएगा। वैसे भी ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर लोग 108 पर ही निर्भर हैं। ऐसे में 108 कर्मियों की हड़ताल से निपटने के लिए सरकार व जिला प्रशासन ने बाहरी राज्यों से चालकों तो बुला लिया है लेकिन यह सभी चालक जिला के रास्तों से पूरी तरह से अंजान हैं। जिला में स्थित 108 की 18 गाड़ियों में से 14 गाड़ियों में उत्तराखंड के चालकों ने अपनी सेवाएं देनी शुरू कर दी हैं जो कि 108 कर्मियों का फैसला न होने तक अपनी सेवाएं देते रहेंगे।
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उधर, सीएमओ डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि वैकल्पिक तौर पर यह व्यवस्था की गई है। बाहरी राज्यों से आए चालकों को रास्ता समझाने के लिए अस्पताल से ही कर्मियों को साथ में भेजा जाएगा, जिससे ईएमटी का कार्य भी चलाया जा सके। उन्होंने बताया कि फिलहाल चालकों की ही व्यवस्था की गई है। ईएमटी की कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है।
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