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नकदी फसल अदरक और लहसुन पर सूखे की मार
Updated Mon, 22 Jan 2018 10:59 PM IST
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- फोटो : Getty Images
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अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
एशिया भर में प्रसिद्ध जिला सिरमौर के अदरक पर मौसम की मार भारी पड़ रही है। हालांकि सरकार आज तक अदरक का समर्थन मूल्य का निर्धारण नहीं कर पाई है लेकिन जिस तरह से अदरक पर मौसम के मिजाज भारी पड़ने लगा है, उसे देखकर लगता है कि आने वाले समय में अदरक के मूल्य में भी भारी वृद्घि हो सकती है।
जिला के ऊपरी क्षेत्र में अदरक खेतों में ही सूखने लगी है। ऊपरी क्षेत्र का अदरक अक्तूबर व नवंबर माह में तैयार हो जाता है लेकिन इंद्रदेव के रहमोकरम पर निर्भर किसानों का अदरक खेतों में ही सूखने लगा है। अदरक की फसल तैयार होकर दिल्ली व पंजाब की बड़ी मंडियों में पहुंचती है। अभी अदरक महज 500 से एक हजार रुपये प्रति मन (20 किलोग्राम) के हिसाब से बिक रहा है। पिछले कई सालों से अदरक की यही हालत है। हालांकि, उचित दाम न मिलने के कारण अदरक के उत्पादन में भी भारी गिरावट आई है। गिरिपार व सैनधार इलाके के कुछ ही किसान अदरक की फसल का उत्पादन कर रहे हैं।
बाक्स--
लहसुन भी सूखे की चपेट में
जिला सिरमौर में इस बार 8 हजार हेक्टेयर के करीब किसानों ने लहसुन का उत्पादन किया है लेकिन जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा नहीं है, वहां पर लहसुन पीला पड़ने लगा है। गिरिपार इलाके की दर्जनों पंचायत में लहसुन की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है। पिछले लंबे समय से बारिश न होने से किसानों की इस फसल पर बुरा असर पड़ने लगा है।
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महज 20 फीसदी क्षेत्र में सिंचाई सुविधा--
जनपद सिरमौर के ऊपरी क्षेत्रों में सिर्फ 20 फीसदी क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। बाकि 80 फीसदी किसान बारिश के रहमोकरम पर ही फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। इस साल बारिश की बेरुखी के चलते किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
कई फसलें प्रभावित--
सूखे का असर फसलों के दामों पर पड़ेगा
उधर, कृषि उपनिदेशक सिरमौर डॉ. विद्यासागर ने बताया कि सूखे से कई फसलें प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रभावित फसलों की फील्ड से रिपोर्ट ली जा रही है। सूखे से यदि फसलें प्रभावित होती हैं तो दामों में भी उछाल आएगा। विभाग अपने स्तर पर सूखे की रिपोर्ट तैयार करने में जुटा है।
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नाहन (सिरमौर)।
एशिया भर में प्रसिद्ध जिला सिरमौर के अदरक पर मौसम की मार भारी पड़ रही है। हालांकि सरकार आज तक अदरक का समर्थन मूल्य का निर्धारण नहीं कर पाई है लेकिन जिस तरह से अदरक पर मौसम के मिजाज भारी पड़ने लगा है, उसे देखकर लगता है कि आने वाले समय में अदरक के मूल्य में भी भारी वृद्घि हो सकती है।
जिला के ऊपरी क्षेत्र में अदरक खेतों में ही सूखने लगी है। ऊपरी क्षेत्र का अदरक अक्तूबर व नवंबर माह में तैयार हो जाता है लेकिन इंद्रदेव के रहमोकरम पर निर्भर किसानों का अदरक खेतों में ही सूखने लगा है। अदरक की फसल तैयार होकर दिल्ली व पंजाब की बड़ी मंडियों में पहुंचती है। अभी अदरक महज 500 से एक हजार रुपये प्रति मन (20 किलोग्राम) के हिसाब से बिक रहा है। पिछले कई सालों से अदरक की यही हालत है। हालांकि, उचित दाम न मिलने के कारण अदरक के उत्पादन में भी भारी गिरावट आई है। गिरिपार व सैनधार इलाके के कुछ ही किसान अदरक की फसल का उत्पादन कर रहे हैं।
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लहसुन भी सूखे की चपेट में
जिला सिरमौर में इस बार 8 हजार हेक्टेयर के करीब किसानों ने लहसुन का उत्पादन किया है लेकिन जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा नहीं है, वहां पर लहसुन पीला पड़ने लगा है। गिरिपार इलाके की दर्जनों पंचायत में लहसुन की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है। पिछले लंबे समय से बारिश न होने से किसानों की इस फसल पर बुरा असर पड़ने लगा है।
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महज 20 फीसदी क्षेत्र में सिंचाई सुविधा--
जनपद सिरमौर के ऊपरी क्षेत्रों में सिर्फ 20 फीसदी क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। बाकि 80 फीसदी किसान बारिश के रहमोकरम पर ही फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। इस साल बारिश की बेरुखी के चलते किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
कई फसलें प्रभावित--
सूखे का असर फसलों के दामों पर पड़ेगा
उधर, कृषि उपनिदेशक सिरमौर डॉ. विद्यासागर ने बताया कि सूखे से कई फसलें प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रभावित फसलों की फील्ड से रिपोर्ट ली जा रही है। सूखे से यदि फसलें प्रभावित होती हैं तो दामों में भी उछाल आएगा। विभाग अपने स्तर पर सूखे की रिपोर्ट तैयार करने में जुटा है।