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न्याय के लिए दर-दर भटक रहा उड़ीसा का कर्मी
Updated Sun, 07 Jan 2018 10:42 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में चल रहे एक उद्योग ने कथित तौर पर बिना नोटिस दिए एक कर्मचारी को बाहर निकाल दिया। वहीं, नौकरी के बाद मिलने वाली राशि का भी भुगतान नहीं किया। उड़ीसा का रहने वाला देवव्रत नायक नामक कर्मचारी न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। श्रम विभाग, पुलिस विभाग और कंपनी प्रबंधन उसकी एक नहीं सुन रहा। उसका आरोप है कि कंपनी ने उसे और उसके भाई मनोज नायक को बिना किसी कारण के बाहर का रास्ता दिखाया।
नाहन में पत्रकार वार्ता के दौरान देवव्रत ने न केवल उद्योग प्रबंधन बल्कि श्रम और पुलिस विभाग पर भी अनदेखी के आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि 70 दिनों से वह अपने हक के लिए दर-दर भटक रहा है। कभी श्रम विभाग तो कभी पुलिस के कार्यालयों के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही। वह जिस भी अधिकारी के पास जाते हैं, कार्रवाई की जा रही है कह कर वापस भेज दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि वह लगभग 11 साल से कालाअंब के धागा उद्योग में कार्यरत था। नवंबर महीने में उसे और उसके भाई को बिना किसी कारण बताए कंपनी से बाहर निकाला गया। यहां तक कि उसे कोई नोटिस तक नहीं दिया गया। कंपनी ने उसे जो मकान दिया था, उसे भी खाली करवाया गया।
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उन्होंने कहा कि उसने न्याय के लिए पुलिस और श्रम विभाग से गुहार लगाई, लेकिन कहीं पर भी सुनवाई नहीं हुई। श्रम विभाग में तो उससे दुर्व्यवहार भी किया गया। इसके बाद उसने एसपी को भी इसकी शिकायत की। कंपनी ने कुछ पैसे बिना बताए उनके अकाउंट में डाल दिए हैं। अब उसी राशि को फुल एंड फाइनल बताया जा रहा है। कंपनी उन्हें अनुभव प्रमाण पत्र भी नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि वह इतने वर्ष तक कंपनी में कार्य करते रहे लेकिन उन्हें किसी तरह का कोई बोनस तक नहीं दिया गया।
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बॉक्स के लिए
जिला श्रम अधिकारी आरएस चौहान ने बताया कि बताया कि कर्मचारी का फुल एंड फाइनल करवाने के लिए कंपनी और देवव्रत दोनों को ही बुलाया गया था। कंपनी से उसकी राशि दिलवाई गई है लेकिन वह संतुष्ट नहीं है तो वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
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नाहन (सिरमौर)।
औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में चल रहे एक उद्योग ने कथित तौर पर बिना नोटिस दिए एक कर्मचारी को बाहर निकाल दिया। वहीं, नौकरी के बाद मिलने वाली राशि का भी भुगतान नहीं किया। उड़ीसा का रहने वाला देवव्रत नायक नामक कर्मचारी न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। श्रम विभाग, पुलिस विभाग और कंपनी प्रबंधन उसकी एक नहीं सुन रहा। उसका आरोप है कि कंपनी ने उसे और उसके भाई मनोज नायक को बिना किसी कारण के बाहर का रास्ता दिखाया।
नाहन में पत्रकार वार्ता के दौरान देवव्रत ने न केवल उद्योग प्रबंधन बल्कि श्रम और पुलिस विभाग पर भी अनदेखी के आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि 70 दिनों से वह अपने हक के लिए दर-दर भटक रहा है। कभी श्रम विभाग तो कभी पुलिस के कार्यालयों के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही। वह जिस भी अधिकारी के पास जाते हैं, कार्रवाई की जा रही है कह कर वापस भेज दिया जाता है।
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उन्होंने कहा कि वह लगभग 11 साल से कालाअंब के धागा उद्योग में कार्यरत था। नवंबर महीने में उसे और उसके भाई को बिना किसी कारण बताए कंपनी से बाहर निकाला गया। यहां तक कि उसे कोई नोटिस तक नहीं दिया गया। कंपनी ने उसे जो मकान दिया था, उसे भी खाली करवाया गया।
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उन्होंने कहा कि उसने न्याय के लिए पुलिस और श्रम विभाग से गुहार लगाई, लेकिन कहीं पर भी सुनवाई नहीं हुई। श्रम विभाग में तो उससे दुर्व्यवहार भी किया गया। इसके बाद उसने एसपी को भी इसकी शिकायत की। कंपनी ने कुछ पैसे बिना बताए उनके अकाउंट में डाल दिए हैं। अब उसी राशि को फुल एंड फाइनल बताया जा रहा है। कंपनी उन्हें अनुभव प्रमाण पत्र भी नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि वह इतने वर्ष तक कंपनी में कार्य करते रहे लेकिन उन्हें किसी तरह का कोई बोनस तक नहीं दिया गया।
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बॉक्स के लिए
जिला श्रम अधिकारी आरएस चौहान ने बताया कि बताया कि कर्मचारी का फुल एंड फाइनल करवाने के लिए कंपनी और देवव्रत दोनों को ही बुलाया गया था। कंपनी से उसकी राशि दिलवाई गई है लेकिन वह संतुष्ट नहीं है तो वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
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