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...आज भी कब्र में जिंदा है अंग्रेजी मेम की प्रेमगाथा
Updated Wed, 14 Feb 2018 11:28 PM IST
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संजय भारद्वाज
नाहन (सिरमौर)।
जनम जनम का साथ है तुम्हारा हमारा.....। बॉलीवुड फिल्म का यह तराना पति-पत्नी के जन्म-जन्मांतर के साथ का अहसास करवाता है। सिरमौर में रियासतकाल की ऐसी ही एक प्रेम कहानी का जिक्र गाहे बगाहे लोगाें की जुबान पर मिसाल के तौर पर आ जाता है। कहानी एक अंग्रेजी मेम की है जिसके पति की सिरमौर में मौत हो गई थी। पति की कब्र के साथ दफन होने की ख्वाहिश में यह अंग्रेजी मेम सिरमौर न छोड़ सकीं। मौत होने पर उसे भी पति की कब्र के नजदीक दफनाया गया।
कहानी महाराजा शमशेर प्रकाश के शासनकाल के दौरान डॉ. इडविन पियरसाल सिरमौर के चीफ मेडिकल अफसर और उनकी पत्नी मैडम लूसिया पिसरसाल की है। हिमाचल के पूर्व विस अध्यक्ष टीएस नेगी की सिरमौर गेजेटियर, कंवर रणजोर सिंह की तारीख-ए-रियासत सिरमौर और हिस्ट्री ऑफ सिरमौर में भी डॉ. पियरसाल का जिक्र है। डॉ. पियरसाल ने 11 साल तक महाराजा के लिए सेवाएं दीं। 19 नवंबर, 1883 में उनका 50 वर्ष की उम्र में इंतकाल हो गया। इस दौरान लेडी लूसिया 49 साल की थीं। महाराजा ने डॉ. पियरसाल को पूरे सैनिक सम्मान के साथ नाहन शहर के ऐतिहासिक विला राउंड में दफन किया। मैडम की मृत्यु के बाद उसका शव राजकीय सम्मान के साथ यहीं दफना दिया गया। वर्ष 1885 में लूसिया ने धन खर्च कर अपने पति की कब्र को पक्का करवाया और इंग्लैंड न लौटकर यहीं की हो गईं। पति की मृत्यु के बाद अंग्रेजी मैडम लगभग 38 साल यहीं रहीं। लूसिया चाहती थीं कि जब उन्हें मौत आए तो वह भी अपने पति की कब्र के साथ दफन हों। इसके लिए लूसिया ने 38 साल मौत का इंतजार किया। 19 अक्तूबर, 1921 को लूसिया ने आखिरी सांस ली, जिसके बाद लूसिया की आखिरी ख्वाहिश को महाराजा ने सम्मान सहित पति डॉ. पियरसाल की कब्र की बगल में दफनाया।
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राजवंशज एवं पूर्व विधायक कंवर अजय बहादुर ने बताया कि विभिन्न पुस्तकों में भी इसका जिक्र है। मैडम लूसिया की इच्छा थी कि उनकी मृत्यु के बाद उन्हें पति के बगल में दफनाया जाए। उनकी मृत्यु के बाद बाकायदा उन्हें राजकीय सम्मान के साथ दफनाया गया।
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नाहन (सिरमौर)।
जनम जनम का साथ है तुम्हारा हमारा.....। बॉलीवुड फिल्म का यह तराना पति-पत्नी के जन्म-जन्मांतर के साथ का अहसास करवाता है। सिरमौर में रियासतकाल की ऐसी ही एक प्रेम कहानी का जिक्र गाहे बगाहे लोगाें की जुबान पर मिसाल के तौर पर आ जाता है। कहानी एक अंग्रेजी मेम की है जिसके पति की सिरमौर में मौत हो गई थी। पति की कब्र के साथ दफन होने की ख्वाहिश में यह अंग्रेजी मेम सिरमौर न छोड़ सकीं। मौत होने पर उसे भी पति की कब्र के नजदीक दफनाया गया।
कहानी महाराजा शमशेर प्रकाश के शासनकाल के दौरान डॉ. इडविन पियरसाल सिरमौर के चीफ मेडिकल अफसर और उनकी पत्नी मैडम लूसिया पिसरसाल की है। हिमाचल के पूर्व विस अध्यक्ष टीएस नेगी की सिरमौर गेजेटियर, कंवर रणजोर सिंह की तारीख-ए-रियासत सिरमौर और हिस्ट्री ऑफ सिरमौर में भी डॉ. पियरसाल का जिक्र है। डॉ. पियरसाल ने 11 साल तक महाराजा के लिए सेवाएं दीं। 19 नवंबर, 1883 में उनका 50 वर्ष की उम्र में इंतकाल हो गया। इस दौरान लेडी लूसिया 49 साल की थीं। महाराजा ने डॉ. पियरसाल को पूरे सैनिक सम्मान के साथ नाहन शहर के ऐतिहासिक विला राउंड में दफन किया। मैडम की मृत्यु के बाद उसका शव राजकीय सम्मान के साथ यहीं दफना दिया गया। वर्ष 1885 में लूसिया ने धन खर्च कर अपने पति की कब्र को पक्का करवाया और इंग्लैंड न लौटकर यहीं की हो गईं। पति की मृत्यु के बाद अंग्रेजी मैडम लगभग 38 साल यहीं रहीं। लूसिया चाहती थीं कि जब उन्हें मौत आए तो वह भी अपने पति की कब्र के साथ दफन हों। इसके लिए लूसिया ने 38 साल मौत का इंतजार किया। 19 अक्तूबर, 1921 को लूसिया ने आखिरी सांस ली, जिसके बाद लूसिया की आखिरी ख्वाहिश को महाराजा ने सम्मान सहित पति डॉ. पियरसाल की कब्र की बगल में दफनाया।
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राजवंशज एवं पूर्व विधायक कंवर अजय बहादुर ने बताया कि विभिन्न पुस्तकों में भी इसका जिक्र है। मैडम लूसिया की इच्छा थी कि उनकी मृत्यु के बाद उन्हें पति के बगल में दफनाया जाए। उनकी मृत्यु के बाद बाकायदा उन्हें राजकीय सम्मान के साथ दफनाया गया।
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