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गिरि पावर हाउस की उत्पादन क्षमता 11 मेगावाट तक सिमटी
Updated Wed, 29 Nov 2017 10:39 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
ददाहू (सिरमौर)।
सर्दी के इस मौसम में वर्षा न होने के कारण गिरि नदी में गिरते जलस्तर के कारण गिरि पावर हाउस में उत्पादन क्षमता मात्र साढ़े 11 मेगावाट पर सिमट कर रह गई है। इससे राज्य बिजली बोर्ड को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। सनद् रहे कि इस परियोजना की उत्पादन क्षमता 60 मेगावाट है। जो वर्षा न होने के कारण अब गिरकर साढ़े 11 मेगावाट पर आ सिमटी है।
उल्लेखनीय है कि करीब ढाई माह पूर्व बरसात के दौरान इस परियोजना में उत्पादन क्षमता बढ़कर शत प्रतिशत पर पहुंच गई थी, जो वर्तमान में घटकर मात्र 19 फीसदी पर सिमट कर रह गई है। गिरिनदी में निरंतर घटते जल बहाव के कारण परियोजना में लगी दो विशाल टरबाइन मशीनों में से मात्र एक टरबाइन मशीन से ही काम लिया जा रहा है। जब तक वर्षा नहीं होती तब तक उत्पादन क्षमता बढ़ने के भी कोई आसार नहीं हैं क्योंकि विद्युत उत्पादन गिरिनदी के जलस्तर पर ही पूरी तरह निर्भर है।
उधर, परियोजना के स्थानिक अभियंता रणधीर सिंह ठाकुर ने उत्पादन क्षमता साढ़े 11 मेगावाट पर सिमटने की पुष्टि करते हुए बताया कि वर्षा न होने के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। यदि समय पर वर्षा नहीं हुई तो उत्पादन में और अधिक गिरावट आ सकती है। यदि वर्षा होती है तो उत्पादन बढ़ भी सकता है।
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ददाहू (सिरमौर)।
सर्दी के इस मौसम में वर्षा न होने के कारण गिरि नदी में गिरते जलस्तर के कारण गिरि पावर हाउस में उत्पादन क्षमता मात्र साढ़े 11 मेगावाट पर सिमट कर रह गई है। इससे राज्य बिजली बोर्ड को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। सनद् रहे कि इस परियोजना की उत्पादन क्षमता 60 मेगावाट है। जो वर्षा न होने के कारण अब गिरकर साढ़े 11 मेगावाट पर आ सिमटी है।
उल्लेखनीय है कि करीब ढाई माह पूर्व बरसात के दौरान इस परियोजना में उत्पादन क्षमता बढ़कर शत प्रतिशत पर पहुंच गई थी, जो वर्तमान में घटकर मात्र 19 फीसदी पर सिमट कर रह गई है। गिरिनदी में निरंतर घटते जल बहाव के कारण परियोजना में लगी दो विशाल टरबाइन मशीनों में से मात्र एक टरबाइन मशीन से ही काम लिया जा रहा है। जब तक वर्षा नहीं होती तब तक उत्पादन क्षमता बढ़ने के भी कोई आसार नहीं हैं क्योंकि विद्युत उत्पादन गिरिनदी के जलस्तर पर ही पूरी तरह निर्भर है।
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उधर, परियोजना के स्थानिक अभियंता रणधीर सिंह ठाकुर ने उत्पादन क्षमता साढ़े 11 मेगावाट पर सिमटने की पुष्टि करते हुए बताया कि वर्षा न होने के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। यदि समय पर वर्षा नहीं हुई तो उत्पादन में और अधिक गिरावट आ सकती है। यदि वर्षा होती है तो उत्पादन बढ़ भी सकता है।
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