{"_id":"5cdae380bdec22074909f9e9","slug":"161557848960-sirmour-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एसटी के मुद्दे पर नेताओं की चुप्पी पर सवाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एसटी के मुद्दे पर नेताओं की चुप्पी पर सवाल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
राजगढ़ (सिरमौर)। लोकसभा चुनाव के दौरान सुर्खियों में रहने वाले गिरिपार को एसटी का दर्जा देने के मुद्दे पर इस बार नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठने लगे हैं। हाल ही में हुई भाजपा की दो बड़ी चुनावी रैलियों में शीर्ष नेताओं ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की। स्थानीय नेताओं ने भी इस मुद्दे पर नहीं बोला। केंद्रीय हाटी समिति ने इस पर नाराजगी जताई है।
समिति अध्यक्ष डॉ. अमीचंद कमल और महासचिव कुंदन सिंह शास्त्री ने संयुक्त बयान में कहा कि हाटी समिति ने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के राष्ट्रीय नेताओं से शिमला संसदीय क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान हाटी मुद्दे पर तर्कसंगत बात करने की अपेक्षा की थी लेकिन, हाल ही में नाहन में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और सोलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों में इस अहम मुद्दे को अनदेखा किया गया। भाजपा वर्ष 2009 से लेकर लगातार इस मुद्दे को अपने घोषणापत्र में डालकर सरकारी दस्तावेज बनाने का दावा करती आ रही थी। आज वही पार्टी इस मुद्दे पर बात करने को भी राजी नहीं है, जिसका हाटी समुदाय में बहुत गलत संदेश गया है। समिति का मानना है कि स्थानीय भाजपा नेताओं ने राष्ट्रीय नेताओं के समक्ष इस मुद्दे को ठीक से प्रस्तुत नहीं किया। यह गिरिपार के करीब पौने तीन लाख लोगों की जनभावनाओं से जुड़ा हुआ मुद्दा है। जो भी दल इसे अनदेखा करेगा, उसे जनता की नाराजगी झेलनी ही पड़ेगी। हाटी समिति जनजातीय अधिकार के लिए अपना तर्कसंगत प्रयास जारी रखेगी और केंद्र में बनने वाली नई सरकार के साथ शीघ्र तालमेल बनाया जाएगा।
विज्ञापन
राजगढ़ (सिरमौर)। लोकसभा चुनाव के दौरान सुर्खियों में रहने वाले गिरिपार को एसटी का दर्जा देने के मुद्दे पर इस बार नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठने लगे हैं। हाल ही में हुई भाजपा की दो बड़ी चुनावी रैलियों में शीर्ष नेताओं ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की। स्थानीय नेताओं ने भी इस मुद्दे पर नहीं बोला। केंद्रीय हाटी समिति ने इस पर नाराजगी जताई है।
समिति अध्यक्ष डॉ. अमीचंद कमल और महासचिव कुंदन सिंह शास्त्री ने संयुक्त बयान में कहा कि हाटी समिति ने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के राष्ट्रीय नेताओं से शिमला संसदीय क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान हाटी मुद्दे पर तर्कसंगत बात करने की अपेक्षा की थी लेकिन, हाल ही में नाहन में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और सोलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों में इस अहम मुद्दे को अनदेखा किया गया। भाजपा वर्ष 2009 से लेकर लगातार इस मुद्दे को अपने घोषणापत्र में डालकर सरकारी दस्तावेज बनाने का दावा करती आ रही थी। आज वही पार्टी इस मुद्दे पर बात करने को भी राजी नहीं है, जिसका हाटी समुदाय में बहुत गलत संदेश गया है। समिति का मानना है कि स्थानीय भाजपा नेताओं ने राष्ट्रीय नेताओं के समक्ष इस मुद्दे को ठीक से प्रस्तुत नहीं किया। यह गिरिपार के करीब पौने तीन लाख लोगों की जनभावनाओं से जुड़ा हुआ मुद्दा है। जो भी दल इसे अनदेखा करेगा, उसे जनता की नाराजगी झेलनी ही पड़ेगी। हाटी समिति जनजातीय अधिकार के लिए अपना तर्कसंगत प्रयास जारी रखेगी और केंद्र में बनने वाली नई सरकार के साथ शीघ्र तालमेल बनाया जाएगा।
विज्ञापन