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बच्चों के भविष्य की नहीं चिंता, वार्षिक समारोह जारी
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नाहन (सिरमौर)। जिले के कुछेक स्कूलों में पढ़ाई से समझौता किया जा रहा है। परीक्षाएं सिर पर हैं, फिर भी स्कूलों में वार्षिक समारोह का सिलसिला जारी है। नए साल में कई स्कूलों ने वार्षिक समारोह की तिथियां घोषित की हैं। इसके मुताबिक आगे आने वाले दिनों में वार्षिक समारोह होंगे। जबकि, 31 दिसंबर को वार्षिक समारोह के आयोजन संबंधी टाइमलाइन समाप्त हो चुकी है। बावजूद इसके इस सप्ताह भी समारोहों का सिलसिला जारी रहने वाला है। जाहिर है कि कई स्कूल प्रबंधक शिक्षा बोर्ड के फरमानों का पालन नहीं कर रहे हैं। वार्षिक समारोह का आयोजन करने वाले स्कूल में 15-20 दिन पहले ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियां शुरू करवाई जाती हैं, जिससे समारोह मनोरंजन भरा हो सके। लेकिन, यह बात भी किसी से छिपी नहीं है कि ऐसे आयोजनों से पढ़ाई का माहौल भी पूरी तरह बिगड़ रहा है। हालांकि, पहले इन कार्यक्रमों को छुट्टियों से पहले निपटाने के प्रयास किए जा रहे थे लेकिन, अब सरकार ने ग्रीष्मकालीन स्कूलों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। ऐसे में कुछ स्कूलों को इसकी मोहलत भी मिल गई है। उधर, शिक्षा उपनिदेशक उच्च उमेश बहुगुणा ने माना कि स्कूलों में वार्षिक समारोह की टाइमलाइन 31 दिसंबर को पूरी हो गई है।
सरकारी स्कूलों में पहले ही शिक्षक नहीं
जिले के अधिकांश स्कूल ऐसे हैं, जहां शिक्षकों की भारी कमी चल रही है। सरकार एसएमसी से प्रवक्ताओं के पद भरने में लगी है। कई स्कूलों में खाली पदों को भरा जा रहा है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिना शिक्षकों के स्कूलों में पढ़ाई का कैसा माहौल होगा? कई जगह ऐसी स्थिति भी है कि अभी सिलेबस भी पूरा नहीं हो रहा है। बिना शिक्षक के कई विषय अधर में लटके हैं। ऐसे में शिक्षा में गुणवत्ता लाने के दावे भी स्कूलों में हवा हो रहे हैं।
कार्यक्रमों में पहुंच रहे माननीय
विभिन्न विद्यालयों में आयोजित हो रहे स्कूलों में स्थानीय विधायक और अन्य नेता बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर रहे हैं। मौजूदा समय में कई स्कूल राजनीतिक रंग में रंगे हैं। स्कूलों में पढ़ाई की बात नहीं, बल्कि सरकार की उपलब्धियों का बखान हो रहा है और विपक्ष पर कटाक्ष किए जा रहे हैं। परीक्षाओं के समय शिक्षा के मंदिर में इस तरह का राजनीतिकरण स्कूली बच्चों पर भारी पड़ रहा है।
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सरकारी स्कूलों में पहले ही शिक्षक नहीं
जिले के अधिकांश स्कूल ऐसे हैं, जहां शिक्षकों की भारी कमी चल रही है। सरकार एसएमसी से प्रवक्ताओं के पद भरने में लगी है। कई स्कूलों में खाली पदों को भरा जा रहा है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिना शिक्षकों के स्कूलों में पढ़ाई का कैसा माहौल होगा? कई जगह ऐसी स्थिति भी है कि अभी सिलेबस भी पूरा नहीं हो रहा है। बिना शिक्षक के कई विषय अधर में लटके हैं। ऐसे में शिक्षा में गुणवत्ता लाने के दावे भी स्कूलों में हवा हो रहे हैं।
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कार्यक्रमों में पहुंच रहे माननीय
विभिन्न विद्यालयों में आयोजित हो रहे स्कूलों में स्थानीय विधायक और अन्य नेता बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर रहे हैं। मौजूदा समय में कई स्कूल राजनीतिक रंग में रंगे हैं। स्कूलों में पढ़ाई की बात नहीं, बल्कि सरकार की उपलब्धियों का बखान हो रहा है और विपक्ष पर कटाक्ष किए जा रहे हैं। परीक्षाओं के समय शिक्षा के मंदिर में इस तरह का राजनीतिकरण स्कूली बच्चों पर भारी पड़ रहा है।
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