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लहसुन का होगा बीमा, पंजीकरण करें किसान
Updated Wed, 29 Nov 2017 10:37 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नौहराधार (सिरमौर)।
जनपद सिरमौर के लहसुन उत्पादकों के लिए अच्छी खबर है। इस बार लहसुन को पहली बार फसल बीमा योजना में शामिल किया गया है। किसान जल्द से जल्द इसके लिए पंजीकरण करवा सकते हैं। लहसुन को फसल बीमा योजना में शामिल करने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं।
इस योजना से जुड़ने के लिए किसानों को इसी वर्ष अपना पंजीकरण करवाना होगा। किसानों को इसके लिए 300 रुपये प्रीमियम देना होगा। प्रदेश के कुल्लू व सिरमौर जिला में लहसुन की बंपर पैदावार होती है। सिरमौर के ऊपरी क्षेत्र नौहराधार, घंडूरी, गत्ताधार, देवामानल चौरास आदि में करीब 800 हेक्टेयर भूमि पर लहसुन की पैदावार होती हैं।
जबकि पूरे हिमाचल में करीब 4000 हेक्टेयर में लहसुन की खेती हो रही है। मौसम निर्धारित बीमा योजना से किसानों को बहुत ज्यादा फायदा होगा क्योंकि हर वर्ष अधिकतर स्थानों में लहसुन में सड़न रोग लग रहा हैं। लहसुन के पत्ते पीले हो जाते हैं तथा नीचे जड़ों में रोग लग जाता हैं।
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जानकारी के अनुसार मौसम आधारित बीमा योजना के लिए रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारियों ने क्षेत्रों का दौरा करना शुरू कर दिया हैं। मौसम के अनुरूप यदि किसानों की लहसुन को अज्ञात बीमारी लगती है, तो 6000 रुपये प्रति बीघा के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा। प्रगतिशील किसान इस योजना से बहुत ज्यादा खुश हैं। पिछले वर्ष जिला में कई क्षेत्रों में लहसुन में रोग लगा था।
उधर, कृषि उपनिदेशक विद्या सागर ने कहा कि केंद्र सरकार ने लहसुन को भी बीमा योजना में शामिल किया है। इसमें बीघा के हिसाब से कीमत लगाई गई। यह योजना इस सीजन से शुरू हो जाएगी। किसान अपने खंडों में पंजीकरण करवा सकते हैं।
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नौहराधार (सिरमौर)।
जनपद सिरमौर के लहसुन उत्पादकों के लिए अच्छी खबर है। इस बार लहसुन को पहली बार फसल बीमा योजना में शामिल किया गया है। किसान जल्द से जल्द इसके लिए पंजीकरण करवा सकते हैं। लहसुन को फसल बीमा योजना में शामिल करने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं।
इस योजना से जुड़ने के लिए किसानों को इसी वर्ष अपना पंजीकरण करवाना होगा। किसानों को इसके लिए 300 रुपये प्रीमियम देना होगा। प्रदेश के कुल्लू व सिरमौर जिला में लहसुन की बंपर पैदावार होती है। सिरमौर के ऊपरी क्षेत्र नौहराधार, घंडूरी, गत्ताधार, देवामानल चौरास आदि में करीब 800 हेक्टेयर भूमि पर लहसुन की पैदावार होती हैं।
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जबकि पूरे हिमाचल में करीब 4000 हेक्टेयर में लहसुन की खेती हो रही है। मौसम निर्धारित बीमा योजना से किसानों को बहुत ज्यादा फायदा होगा क्योंकि हर वर्ष अधिकतर स्थानों में लहसुन में सड़न रोग लग रहा हैं। लहसुन के पत्ते पीले हो जाते हैं तथा नीचे जड़ों में रोग लग जाता हैं।
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जानकारी के अनुसार मौसम आधारित बीमा योजना के लिए रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारियों ने क्षेत्रों का दौरा करना शुरू कर दिया हैं। मौसम के अनुरूप यदि किसानों की लहसुन को अज्ञात बीमारी लगती है, तो 6000 रुपये प्रति बीघा के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा। प्रगतिशील किसान इस योजना से बहुत ज्यादा खुश हैं। पिछले वर्ष जिला में कई क्षेत्रों में लहसुन में रोग लगा था।
उधर, कृषि उपनिदेशक विद्या सागर ने कहा कि केंद्र सरकार ने लहसुन को भी बीमा योजना में शामिल किया है। इसमें बीघा के हिसाब से कीमत लगाई गई। यह योजना इस सीजन से शुरू हो जाएगी। किसान अपने खंडों में पंजीकरण करवा सकते हैं।