{"_id":"5c1ba48ebdec2256f972b04c","slug":"11545315470-sirmour-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हजारों टन गन्ना की खरीद को नहीं मिल रहे खरीदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हजारों टन गन्ना की खरीद को नहीं मिल रहे खरीदार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
राजपुर (सिरमौर)। उत्तराखंड की डोईवाला शुगर मिल से गन्ना खरीद शुरू नहीं होने से पांवटा साहिब के गन्ना उत्पादकों को तगड़ा झटका लगा है। उत्तराखंड में दो दिसंबर को उत्तराखंड के सीएम ने मिल का शुभारंभ कर गन्ना पैराई सत्र शुरू किया था। लेकिन, उपमंडल पांवटा साहिब से सैकड़ों गन्ना उत्पादकों से गन्ने की खरीद नहीं हो रही। इससे गन्ना उत्पादकों में मायूसी है।
गौरतलब है कि प्रदेश में गन्ना की फसल पांवटा दून क्षेत्र में सबसे ज्यादा होती है। लेकिन, राज्य में सरकारी एवं निजी गन्ना मिल न होने से वर्ष1989-90 में पांवटा के पूर्व विधायक फतेह सिंह के हस्तक्षेप से गन्ना किसानों का पड़ोसी राज्य उत्तराखंड की शुगर मिल डोईवाला के साथ गन्ना खरीदने का अनुबंध हुआ। तब से पांवटा का हजारों टन गन्ना उत्तराखंड की मिल खरीद रही है। लेकिन, इस बार मिल ने स्थापित गन्ना तोल केंद्र खोडोवाला, बद्रीपुर, बतामंडी आदि पर गन्ना तोलना एवं खरीदना शुरू नहीं किया। इससे पांवटा के सैकड़ों किसानों का हजारों टन गन्ना खराब होने के कगार पर पहुंच गया है। पिछले वर्ष 26 नवंबर को मिल ने पांवटा से गन्ना की खरीद शुरू की थी। इस बार आधा दिसंबर से भी ज्यादा समय गुजर जाने के बावजूद खरीदारी नहीं हो रही। गन्ने की खरीद नहीं होने के कारण किसान अपना गन्ना चरखी वालों को औने-पौने दामों में बेचने को विवश हो रहे हैं। उधर, उपमंडल में गन्ना मिल के सचिव नेकराम ने कहा कि मिल के साथ किसानों की दोबारा बैठक हो चुकी है। एक-दो दिन के भीतर गन्ना खरीद शुरू होने की उम्मीद है।
विज्ञापन
राजपुर (सिरमौर)। उत्तराखंड की डोईवाला शुगर मिल से गन्ना खरीद शुरू नहीं होने से पांवटा साहिब के गन्ना उत्पादकों को तगड़ा झटका लगा है। उत्तराखंड में दो दिसंबर को उत्तराखंड के सीएम ने मिल का शुभारंभ कर गन्ना पैराई सत्र शुरू किया था। लेकिन, उपमंडल पांवटा साहिब से सैकड़ों गन्ना उत्पादकों से गन्ने की खरीद नहीं हो रही। इससे गन्ना उत्पादकों में मायूसी है।
गौरतलब है कि प्रदेश में गन्ना की फसल पांवटा दून क्षेत्र में सबसे ज्यादा होती है। लेकिन, राज्य में सरकारी एवं निजी गन्ना मिल न होने से वर्ष1989-90 में पांवटा के पूर्व विधायक फतेह सिंह के हस्तक्षेप से गन्ना किसानों का पड़ोसी राज्य उत्तराखंड की शुगर मिल डोईवाला के साथ गन्ना खरीदने का अनुबंध हुआ। तब से पांवटा का हजारों टन गन्ना उत्तराखंड की मिल खरीद रही है। लेकिन, इस बार मिल ने स्थापित गन्ना तोल केंद्र खोडोवाला, बद्रीपुर, बतामंडी आदि पर गन्ना तोलना एवं खरीदना शुरू नहीं किया। इससे पांवटा के सैकड़ों किसानों का हजारों टन गन्ना खराब होने के कगार पर पहुंच गया है। पिछले वर्ष 26 नवंबर को मिल ने पांवटा से गन्ना की खरीद शुरू की थी। इस बार आधा दिसंबर से भी ज्यादा समय गुजर जाने के बावजूद खरीदारी नहीं हो रही। गन्ने की खरीद नहीं होने के कारण किसान अपना गन्ना चरखी वालों को औने-पौने दामों में बेचने को विवश हो रहे हैं। उधर, उपमंडल में गन्ना मिल के सचिव नेकराम ने कहा कि मिल के साथ किसानों की दोबारा बैठक हो चुकी है। एक-दो दिन के भीतर गन्ना खरीद शुरू होने की उम्मीद है।
विज्ञापन