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रेणुका वेटलैंड पहुंची 40 प्रजातियों की तितलियां
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अमर उजाला ब्यूरो
ददाहू (सिरमौर)।
वन्य प्राणी विभाग रेणुका जी में तितलियों का एक अलग पार्क विकसित करने की संभावनाओं को तलाश रहा है। विभाग के वैज्ञानिक शीघ्र इस विषय में शोध कर योजना तैयार करेंगे। रेणुका वेटलैंड में करीब 40 प्रजातियों की तितलियां पाई गई हैं। ये पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र होनेे के साथ रेणुका की खूबसूरती को चार चांद लगा रही हैं। पर्यावरण संरक्षण में तितलियों को भी बड़ा सहायक माना गया है। विभाग के विशेषज्ञों के मुताबिक रेणुका जी में तितलियों की प्रजातियां और संख्या के बढ़ने का मुख्य कारण उन्हें यहां प्रचुर मात्रा में भोजन का मिलना है। हालांकि, करीब एक दशक पूर्व भी विभाग ने यहां तितलियों का प्रजनन केंद्र स्थापित करने की बात कही थी, लेकिन यह योजना सिरे नहीं चढ़ सकी। अब विभाग यहां तितलियों का एक अलग से पार्क विकसित करने की योजना बना रहा है। योजना को लेकर विभाग के विशेषज्ञों की एक टीम शीघ्र ही रेणुका वेटलैंड का दौरा करके इसका अध्ययन करेगी।
वन्य प्राणी विभाग के मुख्य अरण्यपाल सुशील काप्टा ने बताया कि रेणुका वैटलैंड में बढ़ती तितलियों की प्रजातियों को ध्यान में रखते हुए यहां तितलियों का एक अलग से पार्क विकसित करने की संभावनाओं को तलाशा जाएगा। वैज्ञानिकों के शोध के उपरांत यदि यह संभव हो पाया तो यहां तितलियों का एक पार्क स्थापित किया जाएगा। जो कि विभाग की एक अलग पहल होगी।
वन्य प्राणी विभाग के मुख्य अरण्यपाल सुशील काप्टा ने बताया कि वन्य प्राणी परिक्षेत्र रेणुका में कैंपा के तहत विभिन्न विकास योजनाओं की राशि खर्च की जाएगी। इस राशि का लाभ अभी तक जिले के सिंबलवाडा नेशनल पार्क को दिया गया है। जहां करीब 25 लाख रुपये की राशि खर्च की गई है। रेणुका वन्य प्राणी विहार में भी इस राशि को खर्च करके नई योजनाओं को स्थापित किया जाएगा।
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ददाहू (सिरमौर)।
वन्य प्राणी विभाग रेणुका जी में तितलियों का एक अलग पार्क विकसित करने की संभावनाओं को तलाश रहा है। विभाग के वैज्ञानिक शीघ्र इस विषय में शोध कर योजना तैयार करेंगे। रेणुका वेटलैंड में करीब 40 प्रजातियों की तितलियां पाई गई हैं। ये पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र होनेे के साथ रेणुका की खूबसूरती को चार चांद लगा रही हैं। पर्यावरण संरक्षण में तितलियों को भी बड़ा सहायक माना गया है। विभाग के विशेषज्ञों के मुताबिक रेणुका जी में तितलियों की प्रजातियां और संख्या के बढ़ने का मुख्य कारण उन्हें यहां प्रचुर मात्रा में भोजन का मिलना है। हालांकि, करीब एक दशक पूर्व भी विभाग ने यहां तितलियों का प्रजनन केंद्र स्थापित करने की बात कही थी, लेकिन यह योजना सिरे नहीं चढ़ सकी। अब विभाग यहां तितलियों का एक अलग से पार्क विकसित करने की योजना बना रहा है। योजना को लेकर विभाग के विशेषज्ञों की एक टीम शीघ्र ही रेणुका वेटलैंड का दौरा करके इसका अध्ययन करेगी।
वन्य प्राणी विभाग के मुख्य अरण्यपाल सुशील काप्टा ने बताया कि रेणुका वैटलैंड में बढ़ती तितलियों की प्रजातियों को ध्यान में रखते हुए यहां तितलियों का एक अलग से पार्क विकसित करने की संभावनाओं को तलाशा जाएगा। वैज्ञानिकों के शोध के उपरांत यदि यह संभव हो पाया तो यहां तितलियों का एक पार्क स्थापित किया जाएगा। जो कि विभाग की एक अलग पहल होगी।
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वन्य प्राणी विभाग के मुख्य अरण्यपाल सुशील काप्टा ने बताया कि वन्य प्राणी परिक्षेत्र रेणुका में कैंपा के तहत विभिन्न विकास योजनाओं की राशि खर्च की जाएगी। इस राशि का लाभ अभी तक जिले के सिंबलवाडा नेशनल पार्क को दिया गया है। जहां करीब 25 लाख रुपये की राशि खर्च की गई है। रेणुका वन्य प्राणी विहार में भी इस राशि को खर्च करके नई योजनाओं को स्थापित किया जाएगा।
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