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फाइलों में सिमट गई करोड़ों की स्वच्छता परियोजनाएं
Updated Sun, 16 Sep 2018 10:46 PM IST
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फाइलों में सिमट गईं करोड़ों की स्वच्छता परियोजनाएं
शिलाई बाजार में फैली गंदगी से गुजरना भी दूभर
नाक पर रुमाल रखकर चलने को विवश हो रहे लोग
अमर उजाला ब्यूरो
शिलाई (सिरमौर)। भले ही प्रदेश सरकार स्वच्छता पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन, जमीनी स्तर की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। करोड़ों रुपये की स्वच्छता योजनाएं फाइलों में ही सिमट कर रह गई हैं। विज्ञापन और रैलियों में ही लाखों रुपये की स्वच्छता दिख रही है। शिलाई उपमंडल मुख्यालय इसका उदाहरण है। यहां आगंतुकों और स्थानीय निवासी बाजार से निकलते समय मुंह पर रुमाल रखने को विवश हैं। उपमंडल मुख्यालय शिलाई में जहां-तहां कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। हालांकि, कूड़े के लिए व्यापार मंडल और ग्राम पंचायत शिलाई ने कुछ समय एक ट्रैक्टर भी लगाया और बाजार के व्यापारियों से 100 से 150 रुपये महीना भी वसूला लेकिन, बेहतर व्यवस्था न होने के कारण अब यह ट्रैक्टर ही बंद हो गया है। बाजार में फैली दुर्गंध से लोग परेशान हैं। हैरत यह है कि एसडीएम कार्यालय, तहसील कार्यालय, विकास अधिकारी कार्यालय सहित लगभग दो दर्जन सरकारी दफ्तर मात्र दो सौ मीटर के दायरे में आते है और इसी इलाके में गंदगी का साम्राज्य फैला है। स्थानीय लोगों संत राम, दौलत सिंह, अमित कुमार, केशव कुमार, सुरेंद्र सिंह, गुमान सिंह, खयालु राम, बलदेव सिंह, वीरेंद्र सिंह, दिनेश कुमार, सुरेश कुमार, तपेंद्र सिंह और विजय ठाकुर ने बताया कि शिलाई बाजार में स्वच्छता जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। बाजार के अंदर हर तरफ कूड़ा-कचरा फैला हुआ है। शौचालय की सही व्यवस्था न होने के कारण यहां सड़क किनारे ही लोग लघुशंका से निवृत्त हो रहे हैं। वाई प्वाइंट नाया सड़क, निकट यूकों बैंक व अस्पताल के निकट शौचालय की कई सालों से मांग की जी रही है लेकिन, इस पर कोई गौर नहीं किया जा रहा। ग्राम पंचायत शिलाई के सचिव गोपाल सिंह का कहना है कि पंचायत से प्रपोजल भेजा गया है। उसमें हर तरह के कूड़े को ठिकाने लगाने का प्रावधान रखा गया है। बीस लाख की इस परियोजना को स्वीकृति मिलते ही समस्या का समाधान हो जाएगा। कार्यवाहक एसडीएस और तहसीलदार शिलाई मस्त राम कश्यप ने बताया कि समस्या विकराल है, जिसका समाधान करने के लिए व्यापार मंडल को हिदायत दी गई है।
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शिलाई बाजार में फैली गंदगी से गुजरना भी दूभर
नाक पर रुमाल रखकर चलने को विवश हो रहे लोग
अमर उजाला ब्यूरो
शिलाई (सिरमौर)। भले ही प्रदेश सरकार स्वच्छता पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन, जमीनी स्तर की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। करोड़ों रुपये की स्वच्छता योजनाएं फाइलों में ही सिमट कर रह गई हैं। विज्ञापन और रैलियों में ही लाखों रुपये की स्वच्छता दिख रही है। शिलाई उपमंडल मुख्यालय इसका उदाहरण है। यहां आगंतुकों और स्थानीय निवासी बाजार से निकलते समय मुंह पर रुमाल रखने को विवश हैं। उपमंडल मुख्यालय शिलाई में जहां-तहां कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। हालांकि, कूड़े के लिए व्यापार मंडल और ग्राम पंचायत शिलाई ने कुछ समय एक ट्रैक्टर भी लगाया और बाजार के व्यापारियों से 100 से 150 रुपये महीना भी वसूला लेकिन, बेहतर व्यवस्था न होने के कारण अब यह ट्रैक्टर ही बंद हो गया है। बाजार में फैली दुर्गंध से लोग परेशान हैं। हैरत यह है कि एसडीएम कार्यालय, तहसील कार्यालय, विकास अधिकारी कार्यालय सहित लगभग दो दर्जन सरकारी दफ्तर मात्र दो सौ मीटर के दायरे में आते है और इसी इलाके में गंदगी का साम्राज्य फैला है। स्थानीय लोगों संत राम, दौलत सिंह, अमित कुमार, केशव कुमार, सुरेंद्र सिंह, गुमान सिंह, खयालु राम, बलदेव सिंह, वीरेंद्र सिंह, दिनेश कुमार, सुरेश कुमार, तपेंद्र सिंह और विजय ठाकुर ने बताया कि शिलाई बाजार में स्वच्छता जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। बाजार के अंदर हर तरफ कूड़ा-कचरा फैला हुआ है। शौचालय की सही व्यवस्था न होने के कारण यहां सड़क किनारे ही लोग लघुशंका से निवृत्त हो रहे हैं। वाई प्वाइंट नाया सड़क, निकट यूकों बैंक व अस्पताल के निकट शौचालय की कई सालों से मांग की जी रही है लेकिन, इस पर कोई गौर नहीं किया जा रहा। ग्राम पंचायत शिलाई के सचिव गोपाल सिंह का कहना है कि पंचायत से प्रपोजल भेजा गया है। उसमें हर तरह के कूड़े को ठिकाने लगाने का प्रावधान रखा गया है। बीस लाख की इस परियोजना को स्वीकृति मिलते ही समस्या का समाधान हो जाएगा। कार्यवाहक एसडीएस और तहसीलदार शिलाई मस्त राम कश्यप ने बताया कि समस्या विकराल है, जिसका समाधान करने के लिए व्यापार मंडल को हिदायत दी गई है।