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शिमला मस्जिद विवाद : हिंसक प्रदर्शन के लिए विहिप नेताओं, पूर्व पार्षदों समेत 50 लोगों पर मामला दर्ज

Sun, 15 Sep 2024 04:00 PM IST
अंकेश डोगरा पीटीआई, शिमला
पीटीआई, शिमला Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 15 Sep 2024 04:00 PM IST
सार

संजौली इलाके में एक मस्जिद के अवैध हिस्से को गिराने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन मामले में विहिप नेताओं, पूर्व पार्षदों और पंचायत प्रमुख समेत 50 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। 

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Shimla Mosque Dispute Case filed against 50 people including VHP leaders former councillors
संजौली में प्रदर्शन। (फाइल फोटो)। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पुलिस ने रविवार को बताया कि संजौली इलाके में एक मस्जिद के अवैध हिस्से को गिराने की मांग को लेकर पिछले सप्ताह यहां आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा के लिए विहिप नेताओं, पूर्व पार्षदों और पंचायत प्रमुख समेत 50 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। 11 सितंबर को प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों के साथ झड़प की, बैरिकेड तोड़ दिए और पथराव किया, जबकि पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें और लाठियां चलाईं। पुलिस और महिलाओं समेत करीब 10 लोग घायल हो गए।

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'भड़काने वाले लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड एकत्र'
शिमला के पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार गांधी ने बताया कि विरोध प्रदर्शन को भड़काने वाले लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड एकत्र किए गए हैं और और मामले दर्ज किए जाएंगे। अधिकारी ने कहा, "सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और फोटोग्राफ में लोगों के हाथ में पत्थर लिए हुए होने के सबूत हैं, जिन्हें ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों पर फेंका गया।" अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने अब तक जिन 50 लोगों की पहचान की है और आठ मामले दर्ज किए हैं उनमें विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेता, पंचायत प्रमुख और उनके प्रतिनिधि, पूर्व पार्षद और दुकानदारों के अलावा चौपाल और ठियोग के लोग शामिल हैं।

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'सोशल मीडिया पर पूरी घटना को भड़काने वालों की पहचान'
प्रदर्शनकारियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 (1) (धर्म के आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देना); 196 (2) (पूजा स्थल पर अपराध); 189 (गैरकानूनी सभा); 126 (2) (गलत तरीके से रोकना); 61 (2) (आपराधिक साजिश और हमला); 353 (2) (धर्म पर गलत जानकारी फैलाना); 223 (लोक सेवकों के आदेशों की अवहेलना करना; और 132 (लोक सेवक पर हमला करना)। "यह शांति भंग करने के लिए एक पूर्व नियोजित विरोध था। सोशल मीडिया पर पूरी घटना को भड़काने वालों की पहचान कर ली गई है और उनके कृत्य और आचरण से पता चलता है कि वे अपराध में कैसे शामिल थे," एसपी ने कहा। "एक वीडियो में, एक व्यक्ति को एक टेंपो पर खड़े होकर लोगों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा तोड़ने के लिए उकसाते हुए देखा गया था। हमें विरोध करने की अनुमति मांगने वाला कोई आवेदन नहीं मिला," उन्होंने कहा।

'दोषी लोगों से कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाएगा'
एसपी ने कहा कि दो पुलिस कर्मियों को गंभीर चोटें आई हैं, जिनमें से एक की पीठ पर और दूसरे के सिर पर चोटें आई हैं, और इसके लिए दोषी लोगों से कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाएगा। संजौली मस्जिद मुद्दे पर शिमला में तनाव के बीच, पिछले गुरुवार को एक मुस्लिम कल्याण समिति ने अनधिकृत हिस्से को ध्वस्त करने की पेशकश की, जबकि समुदाय के सदस्यों ने खुद मंडी में सरकारी जमीन पर एक मस्जिद की दीवार गिरा दी।

शिमला नगर आयुक्त भूपेंद्र सिंह को ज्ञापन देते हुए कल्याण समिति का एक प्रतिनिधिमंडल अत्री ने कहा कि इलाके में रहने वाले मुसलमान हिमाचल प्रदेश के स्थायी निवासी हैं और यह सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। कल्याण समिति के सदस्य मुफ्ती मोहम्मद शफी कासमी ने कहा, "हमने संजौली में स्थित मस्जिद के अनधिकृत हिस्से को ध्वस्त करने के लिए शिमला नगर आयुक्त से अनुमति मांगी है।" मस्जिद में अनधिकृत निर्माण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आह्वान करने वाले देव भूमि संघर्ष समिति के सदस्यों ने इस कदम का स्वागत किया। समिति के सदस्य विजय शर्मा ने कहा, "हम मुस्लिम समुदाय के कदम का स्वागत करते हैं और व्यापक हित में यह पहल करने के लिए हम सबसे पहले उनका अभिवादन करेंगे।"

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