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Himachal News: राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी बोले- हिमाचल प्रदेश में धारा-118 का नहीं होगा सरलीकरण
Wed, 29 Oct 2025 06:39 PM IST
अंकेश डोगरा
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Wed, 29 Oct 2025 06:39 PM IST
सार
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि धारा-118 में संशोधन करने के लिए पहले मामला विधानसभा में लाया जाता है, सरकार ऐसा नहीं कर रही। भाजपा इस मामले को जबरन तूल देने में लगी है। उन्होंने कहा कि धारा-118 में किसी भी तरह का न तो संशोधन किया गया है और न ही इसमें सरलीकरण होगा।
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राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में धारा-118 में किसी भी तरह का न तो संशोधन किया गया है और न ही इसमें सरलीकरण होगा। सरकार ने विस में बिल लाकर केवल लैंड सीलिंग एक्ट-1972 में संशोधन किया है। इसमें डेढ़ सौ बीघा तक जमीन किसी भी धार्मिक संस्था को दी जा सकती है। यह संस्थाएं भी इस जमीन को होटल या अन्य व्यवसायिक गतिविधियों में इस्तेमाल में नहीं ला सकती हैं। इस जमीन पर सिर्फ धार्मिक गतिविधियां की जा सकती है।
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राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि धारा-118 में संशोधन करने के लिए पहले मामला विधानसभा में लाया जाता है, सरकार ऐसा नहीं कर रही। भाजपा इस मामले को जबरन तूल देने में लगी है। प्रदेश सरकार की ओर से विधानसभा में पारित संशोधित विधेयक को राजभवन ने राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद ही इसे हिमाचल में लागू किया जा सकेगा। सरकार ने इस संशोधित विधेयक में संस्थाओं को सिर्फ धार्मिक गतिविधियों के लिए जमीन देने की बात कही है। होटल और अन्य व्यावसायिक के लिए जमीन न तो बेची जाएगी और न ही ट्रांसफर की जा सकेगी।
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राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लोगों ने सैकड़ों बीघा जमीन धार्मिक संस्थाओं को दान की है। इस समय हिमाचल में इन संस्थाओं के पास अरबों की संपत्ति है। हिमाचल सरकार लैंड सीलिंग एक्ट-1972 में संशोधन किया गया है। पूर्व सीएम स्व. डॉ. वाईएस परमार के समय हिमाचल प्रदेश सीलिंग ऑन लैंड होल्डिंग एक्ट इसलिए बनाया गया था, जिससे भूमि के व्यक्तिगत उपयोग की सीमा तय की जा सके। एक्ट की धारा 5 के अनुसार राज्य और केंद्र सरकार, सहकारी समितियों, सहकारी बैंकों, स्थानीय निकायों, चाय बागानों, उद्योगों, जल विद्युत परियोजनाओं और राधा स्वामी सत्संग ब्यास की जमीन को सीलिंग से छूट दी गई है।
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