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Rampur Bushahar News: पावनी गांव में तीन दिवसीय फुल्याच मेला का हुआ संपन्न
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ग्रामीणों ने अपने देवी-देवता की पहाड़ों से ब्रह्मकमल लाकर की पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
भावानगर (किन्नौर)। जिले के पग्रमंग क्षेत्र के पावनी गांव में तीन दिवसीय फुल्याच मेले का मंगलवार को समापन हो गया। फुल्याच का अर्थ फूलों का मेला होता है। स्थानीय ग्रामीण पहाड़ों से ब्रह्मकमल लाकर अपने देवता को समर्पित करते हैं। पानवी गांव में आयोजित हुए फुल्याच मेले की शुरुआत शनिवार को हुई थी। मेले में स्थानीय ग्रामीण अपने जय कुलदेव नारायण और जय कुगदा नागिन माता जी के मंदिर के प्रांगण में इकट्ठा हुए। सभी ग्रामीण किन्नौर की पारंपरिक वेशभूषा पहनकर पहुंचे थे। स्थानीय देवता को ब्रह्मकमल समर्पित कर उनकी पूजा-अर्चना की गई। किन्नौर में साल में एक बार फुल्याच मेला मनाया जाता है। यह मेला गांव में आपसी सामंजस्य व देव समाज के नियमों को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सैकड़ों वर्ष पुराने इस मेले के आयोजन का उद्देश्य गांव की सुख-शांति व समृद्धि के लिए होता है। जिसे आज भी जिले के लोग अपने-अपने ग्रामीण क्षेत्रों में अपने समय अनुसार मनाते हैं। तीन दिन तक मनाए जाने वाले मेले के दौरान ग्रामीण अपने खेती-बाड़ी और घर के काम छोड़कर मंदिर परिसर में सिर्फ मेले का आनंद लेते हैं। फुल्याच मेले के दौरान स्थानीय लोग पारंपरिक खान-पान का ही इस्तेमाल करते हैं। तीन दिनों तक देवी-देवताओं की पूजा अर्चना कर ग्रामीण उनका आशीर्वाद लेते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
भावानगर (किन्नौर)। जिले के पग्रमंग क्षेत्र के पावनी गांव में तीन दिवसीय फुल्याच मेले का मंगलवार को समापन हो गया। फुल्याच का अर्थ फूलों का मेला होता है। स्थानीय ग्रामीण पहाड़ों से ब्रह्मकमल लाकर अपने देवता को समर्पित करते हैं। पानवी गांव में आयोजित हुए फुल्याच मेले की शुरुआत शनिवार को हुई थी। मेले में स्थानीय ग्रामीण अपने जय कुलदेव नारायण और जय कुगदा नागिन माता जी के मंदिर के प्रांगण में इकट्ठा हुए। सभी ग्रामीण किन्नौर की पारंपरिक वेशभूषा पहनकर पहुंचे थे। स्थानीय देवता को ब्रह्मकमल समर्पित कर उनकी पूजा-अर्चना की गई। किन्नौर में साल में एक बार फुल्याच मेला मनाया जाता है। यह मेला गांव में आपसी सामंजस्य व देव समाज के नियमों को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सैकड़ों वर्ष पुराने इस मेले के आयोजन का उद्देश्य गांव की सुख-शांति व समृद्धि के लिए होता है। जिसे आज भी जिले के लोग अपने-अपने ग्रामीण क्षेत्रों में अपने समय अनुसार मनाते हैं। तीन दिन तक मनाए जाने वाले मेले के दौरान ग्रामीण अपने खेती-बाड़ी और घर के काम छोड़कर मंदिर परिसर में सिर्फ मेले का आनंद लेते हैं। फुल्याच मेले के दौरान स्थानीय लोग पारंपरिक खान-पान का ही इस्तेमाल करते हैं। तीन दिनों तक देवी-देवताओं की पूजा अर्चना कर ग्रामीण उनका आशीर्वाद लेते हैं।