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Rampur Bushahar News: दरकाली में ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमे ग्रामीण
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देवता साहिब लक्ष्मी नारायण शालनू के जन्मोत्सव में उमड़े श्रद्धालु
सुबह से मंदिर में जुटने शुरू हुए लोग, देवता के सामने हुए नतमस्तक
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। दरकाली पंचायत में अधिष्ठाता देवता साहिब लक्ष्मी नारायण शालनू का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। देवता साहिब के जन्मोत्सव की खुशी में ग्रामीणों ने देर शाम तक नाटियों का दौर जारी रखा।
सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। ग्रामीणों ने अपने इष्ट देवता के समक्ष शीश नवाकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। सबसे पहले मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद देवता साहिब कोठी से निकलकर मंदिर परिसर में विराजमान हुए। ग्रामीणों ने आराध्य देवता का भव्य स्वागत किया। हजारों श्रद्धालुओं ने इष्ट देवता के समक्ष शीश नवाया।
ग्रामीणों ने बताया कि इष्ट देवता साहिब का जन्मोत्सव वर्ष 2009 से मनाया जा रहा है। वर्ष 2008 में देवता साहिब का मंदिर अग्निकांड की भेंट चढ़ गया था। इसके बाद ग्रामीणों ने एक वर्ष में ही भव्य मंदिर का निर्माण कराया। वर्ष 2009 में देवता साहिब अपने मुख्य स्थान रोहड़ू के देवीधार से दरकाली लौटे। इसके बाद ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि इस दिन को हर वर्ष देवता साहिब के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाएगा।
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मंदिर समिति के अध्यक्ष बहादुर सिंह बदरेल ने बताया कि इस वर्ष भी देवता साहिब का जन्मोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। ग्रामीणों के अलावा दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने भी देवता साहिब के दर्शन कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया।
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सुबह से मंदिर में जुटने शुरू हुए लोग, देवता के सामने हुए नतमस्तक
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। दरकाली पंचायत में अधिष्ठाता देवता साहिब लक्ष्मी नारायण शालनू का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। देवता साहिब के जन्मोत्सव की खुशी में ग्रामीणों ने देर शाम तक नाटियों का दौर जारी रखा।
सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। ग्रामीणों ने अपने इष्ट देवता के समक्ष शीश नवाकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। सबसे पहले मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद देवता साहिब कोठी से निकलकर मंदिर परिसर में विराजमान हुए। ग्रामीणों ने आराध्य देवता का भव्य स्वागत किया। हजारों श्रद्धालुओं ने इष्ट देवता के समक्ष शीश नवाया।
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ग्रामीणों ने बताया कि इष्ट देवता साहिब का जन्मोत्सव वर्ष 2009 से मनाया जा रहा है। वर्ष 2008 में देवता साहिब का मंदिर अग्निकांड की भेंट चढ़ गया था। इसके बाद ग्रामीणों ने एक वर्ष में ही भव्य मंदिर का निर्माण कराया। वर्ष 2009 में देवता साहिब अपने मुख्य स्थान रोहड़ू के देवीधार से दरकाली लौटे। इसके बाद ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि इस दिन को हर वर्ष देवता साहिब के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाएगा।
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मंदिर समिति के अध्यक्ष बहादुर सिंह बदरेल ने बताया कि इस वर्ष भी देवता साहिब का जन्मोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। ग्रामीणों के अलावा दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने भी देवता साहिब के दर्शन कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया।