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Rampur Bushahar News: सनाबाग मेले में ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमे ग्रामीण और भेड़ पालक
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12/20 क्षेत्र में सदियों पुरानी परंपरा, भेड़पालकों की घटती संख्या से विलुप्ति के कगार पर पहुंची लोक संस्कृति
संवाद न्यूज एजेंसी
डंसा (रामपुर बुशहर)। 12/20 घाटी के कूहल गांव में पारंपरिक सनाबाग मेला धूमधाम से मनाया गया। ग्रामीणों और भेड़पालकों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाटी डाली। मेले में पहुंचे लोगों ने देवता साहिब के समक्ष शीश नवाया और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया। सनाबाग मेला आज भी भेड़पालकों की घर वापसी की पुरानी परंपरा को जीवंत किए हुए है। देवता साहिब दत्त महाराज बसाहरा और देवता साहिब छिज्जा कालेश्वर के आशीर्वाद से जुड़ा यह मेला भेड़पालकों के कंडे से अपने गांव लौटने पर उनके स्वागत के लिए आयोजित किया जाता है। हालांकि, समय के साथ भेड़पालन का कारोबार सिमटने से यह परंपरा धीरे-धीरे विलुप्त होने के कगार पर पहुंच रही है। बताया जाता है कि पहले 12/20 क्षेत्र के लगभग हर गांव और घर में भेड़-बकरियां पालने की परंपरा थी। गर्मियों के दौरान भेड़पालक अपने पशुधन के साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में डेरा डालते थे। घर वापसी पर उनके स्वागत के लिए सनाबाग मेले का आयोजन किया जाता था। भेड़पालक अपने डेरे में विशेष पकवान तैयार कर रिश्तेदारों और खास लोगों को आमंत्रित करते थे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
डंसा (रामपुर बुशहर)। 12/20 घाटी के कूहल गांव में पारंपरिक सनाबाग मेला धूमधाम से मनाया गया। ग्रामीणों और भेड़पालकों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाटी डाली। मेले में पहुंचे लोगों ने देवता साहिब के समक्ष शीश नवाया और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया। सनाबाग मेला आज भी भेड़पालकों की घर वापसी की पुरानी परंपरा को जीवंत किए हुए है। देवता साहिब दत्त महाराज बसाहरा और देवता साहिब छिज्जा कालेश्वर के आशीर्वाद से जुड़ा यह मेला भेड़पालकों के कंडे से अपने गांव लौटने पर उनके स्वागत के लिए आयोजित किया जाता है। हालांकि, समय के साथ भेड़पालन का कारोबार सिमटने से यह परंपरा धीरे-धीरे विलुप्त होने के कगार पर पहुंच रही है। बताया जाता है कि पहले 12/20 क्षेत्र के लगभग हर गांव और घर में भेड़-बकरियां पालने की परंपरा थी। गर्मियों के दौरान भेड़पालक अपने पशुधन के साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में डेरा डालते थे। घर वापसी पर उनके स्वागत के लिए सनाबाग मेले का आयोजन किया जाता था। भेड़पालक अपने डेरे में विशेष पकवान तैयार कर रिश्तेदारों और खास लोगों को आमंत्रित करते थे।