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Rampur Bushahar News: चौपाल विद्युत मंडल में 40 फीसदी से अधिक पद रिक्त, कामकाज प्रभावित
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. उपलब्ध स्टाफ पर काम का अतिरिक्त बोझ बढ़ा, उपभोक्ता भी परेशान
. कमी को पूरा करने के लिए आउटसोर्स फील्ड कर्मचारियों की सेवाएं ली जा रहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू)।
चौपाल विद्युत मंडल में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण विभागीय कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। मंडल के कार्यालयों और फील्ड में 40 फीसदी से अधिक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इस कमी का सीधा असर बिजली लाइनों के रखरखाव और उपभोक्ताओं से जुड़े कार्यों पर पड़ रहा है। उपलब्ध स्टाफ पर काम का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। मंडल के तीनों उपमंडलों चौपाल, नेरवा और कुपवी में कनिष्ठ अभियंताओं के सात पद रिक्त हैं। इनमें चौपाल में पांच, नेरवा और कुपवी में एक-एक पद खाली है। नेरवा में सहायक अभियंता का पद रिक्त है। इसका अतिरिक्त कार्यभार चौपाल को सौंपा गया है। चौपाल में स्वीकृत चार पदों के मुकाबले केवल एक अधिकारी कार्यरत है, जो इसी माह सेवानिवृत्त हो जाएगा। कार्यालयों में भी कर्मचारियों की भारी कमी है। मंडलीय कार्यालय में वरिष्ठ सहायक का एक और कनिष्ठ कार्यालय सहायक के तीनों पद खाली हैं। उपमंडल कार्यालयों में भी कनिष्ठ कार्यालय सहायक के कई पद रिक्त हैं। ड्राइंग और लेखा शाखाएं भी स्टाफ की कमी से जूझ रही हैं, जिससे तकनीकी और वित्तीय कार्य बाधित हो रहे हैं। विद्युत व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण फील्ड स्टाफ की भी भारी कमी है। नेरवा में इलेक्ट्रीशियन का एकमात्र पद रिक्त है। फोरमैन के चौपाल में दो, नेरवा में एक और कुपवी में एक पद खाली है। लाइनमैन के चौपाल में दस में से छह और नेरवा में बारह में से सात पद रिक्त हैं। सहायक लाइनमैन और टीमेट के भी कई पद खाली पड़े हैं। चालकों के दोनों स्वीकृत पद भी रिक्त हैं। नियमित कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए आउटसोर्स फील्ड कर्मचारियों की सेवाएं ली जा रही हैं। चौपाल में दस, नेरवा में नौ और कुपवी में तेरह आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों के माध्यम से मुख्य विद्युत लाइनों का रखरखाव और बिजली आपूर्ति सुचारू रखने के प्रयास हो रहे हैं। हालांकि, नियमित स्टाफ की कमी से दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में खराबी ठीक करने में समय लगता है। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण सीमित स्टाफ पर काम का दबाव अधिक है।
रिक्त पदों की सूची सरकार को भेज दी गई है। स्टाफ की कमी से कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ है। कार्य करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उपलब्ध नियमित और आउटसोर्स कर्मचारियों से विद्युत व्यवस्था बनाए रखने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।-- गोवर्धन दिल्टा, अधिशासी अभियंता, विद्युत मंडल चौपाल
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. कमी को पूरा करने के लिए आउटसोर्स फील्ड कर्मचारियों की सेवाएं ली जा रहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहड़ू)।
चौपाल विद्युत मंडल में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण विभागीय कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। मंडल के कार्यालयों और फील्ड में 40 फीसदी से अधिक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इस कमी का सीधा असर बिजली लाइनों के रखरखाव और उपभोक्ताओं से जुड़े कार्यों पर पड़ रहा है। उपलब्ध स्टाफ पर काम का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। मंडल के तीनों उपमंडलों चौपाल, नेरवा और कुपवी में कनिष्ठ अभियंताओं के सात पद रिक्त हैं। इनमें चौपाल में पांच, नेरवा और कुपवी में एक-एक पद खाली है। नेरवा में सहायक अभियंता का पद रिक्त है। इसका अतिरिक्त कार्यभार चौपाल को सौंपा गया है। चौपाल में स्वीकृत चार पदों के मुकाबले केवल एक अधिकारी कार्यरत है, जो इसी माह सेवानिवृत्त हो जाएगा। कार्यालयों में भी कर्मचारियों की भारी कमी है। मंडलीय कार्यालय में वरिष्ठ सहायक का एक और कनिष्ठ कार्यालय सहायक के तीनों पद खाली हैं। उपमंडल कार्यालयों में भी कनिष्ठ कार्यालय सहायक के कई पद रिक्त हैं। ड्राइंग और लेखा शाखाएं भी स्टाफ की कमी से जूझ रही हैं, जिससे तकनीकी और वित्तीय कार्य बाधित हो रहे हैं। विद्युत व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण फील्ड स्टाफ की भी भारी कमी है। नेरवा में इलेक्ट्रीशियन का एकमात्र पद रिक्त है। फोरमैन के चौपाल में दो, नेरवा में एक और कुपवी में एक पद खाली है। लाइनमैन के चौपाल में दस में से छह और नेरवा में बारह में से सात पद रिक्त हैं। सहायक लाइनमैन और टीमेट के भी कई पद खाली पड़े हैं। चालकों के दोनों स्वीकृत पद भी रिक्त हैं। नियमित कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए आउटसोर्स फील्ड कर्मचारियों की सेवाएं ली जा रही हैं। चौपाल में दस, नेरवा में नौ और कुपवी में तेरह आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों के माध्यम से मुख्य विद्युत लाइनों का रखरखाव और बिजली आपूर्ति सुचारू रखने के प्रयास हो रहे हैं। हालांकि, नियमित स्टाफ की कमी से दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में खराबी ठीक करने में समय लगता है। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण सीमित स्टाफ पर काम का दबाव अधिक है।
रिक्त पदों की सूची सरकार को भेज दी गई है। स्टाफ की कमी से कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ है। कार्य करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उपलब्ध नियमित और आउटसोर्स कर्मचारियों से विद्युत व्यवस्था बनाए रखने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
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