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नए वेतनमान से नाखुश स्कूल प्रवक्ता संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी
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रोहड़ू। हिमाचल स्कूल प्रवक्ता संघ नए वेतनमान से नाखुश है। संघ का आरोप है कि नए वेतनमान में सबसे अधिक नुकसान 2016 के बाद अनुबंध से नियमित हुए स्कूल प्रवक्ताओं को हुआ है।
जिला शिमला के प्रधान अजय नेगी राज्य वरिष्ठ उपप्रधान लोकेंद्र नेगी, जिला महासचिव आकाशदीप शर्मा, राज्य कार्यकारिणी के संरक्षक केदार, राज्य मुख्य सलाहकार प्रेमपाल दुल्टा, यशपाल ठाकुर, दुर्गा मेहता, प्रेम शर्मा, विकेश जनारथा, सुरेंद्र राग्टा, विवेक मेहता, डॉ. उमेश दाउटू, वीरेंद्र वाशिंगटा, तरुण नेश्टा, सूरज चौहान, युगल किशोर, जसवंत जस्टा, सुशील चौहान, पवन शर्मा, सुरेंद्र ठाकुर, विशाल ठाकुर, डॉ. विनोद, देवदत्त शर्मा, डॉ. बबीता, अंजू नायक, जगदीश कश्यप, राजेंद्र मेहता, जेपी पराशर, दिलीप चौहान, वीरेंद्र नेगी, प्रदीप ठाकुर, देवेंद्र, अजीत सिंह, यशपाल शर्मा, अवनीश, सुनील शर्मा, सुशील चंदेल, भूपेश नेगी, प्रमोद शर्मा, राकेश शर्मा, विनोद कायथ ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि अनुबंध से नियमित प्रवक्ताओं को न्याय दिया जाए।
उन्होंने कहा कि हाल ही में हिमाचल वित्त विभाग ने नए वेतनमान की जो अधिसूचना जारी की है उसमे दो फैक्टर 2.59 पुरानी ग्रेड पे के साथ व 2.25 हायर ग्रेड पे के साथ दिए गए हैं। अब प्रदेश सरकार व वित्त विभाग यह स्पष्ट करे कि 2.25 बिना इनिशियल स्टार्ट से किन कर्मचारियों को दिया गया है। इससे कौन से कर्मचारी लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा नुकसान 2016 के बाद नियमित हुए प्रवक्ताओं के साथ हुआ है। नियमित होने के बाद पंजाब वेतनमान वर्ष 2011 में हुआ। वर्ष 2012 के पे रिवीजन से इनिशियल स्टार्ट की जगह मिनिमम ऑफ पे बैंड दिया गया जबकि पंजाब ने ऐसे प्रवक्ताओं को हायर ग्रेड पे के साथ 2011 से इनिशियल स्टार्ट 20300 दिया था। आठ साल अनुबंध पर काम करने के बाद भी उन्हें लोअर ग्रेड पे 4200 दिया गया है और हायर ग्रेड पे 5400 पाने के लिए दो साल की शर्त भी लगा दी। ये दोनो शर्तें असंवैधानिक हैं। पंजाब के 2011 पे रिवीजन में ऐसी कोई शर्त नहीं है। 2016 के बाद नियमित हुए हजारों प्रवक्ता 2012 पे रिविजन की असंवैधानिक शर्तों की वजह से प्रभावित हुए हैं। पंजाब वेतनमान से हिमाचल के कर्मचारियों का वेतन बढ़ने के बजाय कम हो रहा है। संघ सरकार से मांग करता है कि 2012 से जो दो साल के प्रोबेशन पीरियड की जो शर्त लगाई है, उसे तुरंत हटाया जाए। इसके साथ 2012 से पंजाब के समान इनिशियल स्टार्ट दिया जाए। अगर संघ का मांगें पूरी नहीं हुई तो प्रवक्ताओं को मजबूरन नए वेतनमान के विरोध में सड़कों पर उतरना पडे़गा।
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जिला शिमला के प्रधान अजय नेगी राज्य वरिष्ठ उपप्रधान लोकेंद्र नेगी, जिला महासचिव आकाशदीप शर्मा, राज्य कार्यकारिणी के संरक्षक केदार, राज्य मुख्य सलाहकार प्रेमपाल दुल्टा, यशपाल ठाकुर, दुर्गा मेहता, प्रेम शर्मा, विकेश जनारथा, सुरेंद्र राग्टा, विवेक मेहता, डॉ. उमेश दाउटू, वीरेंद्र वाशिंगटा, तरुण नेश्टा, सूरज चौहान, युगल किशोर, जसवंत जस्टा, सुशील चौहान, पवन शर्मा, सुरेंद्र ठाकुर, विशाल ठाकुर, डॉ. विनोद, देवदत्त शर्मा, डॉ. बबीता, अंजू नायक, जगदीश कश्यप, राजेंद्र मेहता, जेपी पराशर, दिलीप चौहान, वीरेंद्र नेगी, प्रदीप ठाकुर, देवेंद्र, अजीत सिंह, यशपाल शर्मा, अवनीश, सुनील शर्मा, सुशील चंदेल, भूपेश नेगी, प्रमोद शर्मा, राकेश शर्मा, विनोद कायथ ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि अनुबंध से नियमित प्रवक्ताओं को न्याय दिया जाए।
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उन्होंने कहा कि हाल ही में हिमाचल वित्त विभाग ने नए वेतनमान की जो अधिसूचना जारी की है उसमे दो फैक्टर 2.59 पुरानी ग्रेड पे के साथ व 2.25 हायर ग्रेड पे के साथ दिए गए हैं। अब प्रदेश सरकार व वित्त विभाग यह स्पष्ट करे कि 2.25 बिना इनिशियल स्टार्ट से किन कर्मचारियों को दिया गया है। इससे कौन से कर्मचारी लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा नुकसान 2016 के बाद नियमित हुए प्रवक्ताओं के साथ हुआ है। नियमित होने के बाद पंजाब वेतनमान वर्ष 2011 में हुआ। वर्ष 2012 के पे रिवीजन से इनिशियल स्टार्ट की जगह मिनिमम ऑफ पे बैंड दिया गया जबकि पंजाब ने ऐसे प्रवक्ताओं को हायर ग्रेड पे के साथ 2011 से इनिशियल स्टार्ट 20300 दिया था। आठ साल अनुबंध पर काम करने के बाद भी उन्हें लोअर ग्रेड पे 4200 दिया गया है और हायर ग्रेड पे 5400 पाने के लिए दो साल की शर्त भी लगा दी। ये दोनो शर्तें असंवैधानिक हैं। पंजाब के 2011 पे रिवीजन में ऐसी कोई शर्त नहीं है। 2016 के बाद नियमित हुए हजारों प्रवक्ता 2012 पे रिविजन की असंवैधानिक शर्तों की वजह से प्रभावित हुए हैं। पंजाब वेतनमान से हिमाचल के कर्मचारियों का वेतन बढ़ने के बजाय कम हो रहा है। संघ सरकार से मांग करता है कि 2012 से जो दो साल के प्रोबेशन पीरियड की जो शर्त लगाई है, उसे तुरंत हटाया जाए। इसके साथ 2012 से पंजाब के समान इनिशियल स्टार्ट दिया जाए। अगर संघ का मांगें पूरी नहीं हुई तो प्रवक्ताओं को मजबूरन नए वेतनमान के विरोध में सड़कों पर उतरना पडे़गा।
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