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उच्च न्यायालय के फैसले को भी ठेंगा दिखा रही केंद्र सरकार : यूनियन
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मीड डे मील वर्कस ज्यूरी में बैठक के दौरान। संवाद
सरकार की मिड-डे मील वर्कर्स विरोधी नीतियों के खिलाफ मई में होगी देशव्यापी हड़ताल
ज्यूरी में यूनियन ने बैठक कर तैयार की आगामी रणनीति
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्यूरी (रामपुर बुशहर)। मिड-डे मील वर्करों की मांगों और केंद्र सरकार की विरोधी नीतियों के खिलाफ मई महीने में देशव्यापी हड़ताल होगी। प्रदेश में कार्यरत 21 हजार मिड-डे मील कर्मियों की स्थिति बेहद दयनीय है। मिड-डे मील वर्कर यूनियन संबंधित सीटू की ब्लॉक इकाई सराहन की ज्यूरी में आयोजित बैठक में यूनियन अध्यक्ष मीना यह बात कही। बैठक में कई मुद्दों पर मंथन किया गया। इस अवसर पर सीटू जिला सचिव अमित, नारायण खन्ना, मीना, संगीता, दीक्षा, कृष्णा, विजय लक्ष्मी, सुमन, कृष्णा मेहता और उषा मौजूद रहीं। अमित, नारायण खन्ना, मीना और संगीता ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि वर्करों का मात्र 4,500 रुपये प्रतिमाह वेतन घोषित किया है, जोकि कई कई महीनों तक नहीं मिल रहा है। समय पर वेतन न मिलने से मिड-डे मील वर्करों को जीवनयापन करना मुश्किल हो रहा है। मिड-डे मील वर्करों को साल में एक भी छुट्टी नहीं दी जाती है। उन्हें इमरजेंसी, बीमारी व पारिवारिक कार्यक्रमों में छुट्टी करने पर अपनी जगह रिलीवर भेजना पड़ता है, जिसकी पांच सौ से सात सौ रुपये की दिहाड़ी का खर्चा भी उन्हें खुद ही उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 व वर्ष 2024 में माननीय उच्च न्यायालय ने मिड-डे मील वर्करों को 10 महीने की बजाय 12 महीने का वेतन देने का निर्णय सुनाया है, लेकिन उच्च न्यायालय के फैसले को अभी तक लागू नहीं किया गया है। प्रदेश सरकार की ओर से कम बच्चों की संख्या वाले स्कूलों को बंद करने और कुछ स्कूलों को दूसरे स्कूलों में मर्ज करने पर इन स्कूलों में कार्यरत मिड-डे मील वर्करों को भी अन्य कर्मचारियों की तर्ज पर अनिवार्य तौर पर अन्य नजदीकी स्कूलों में समायोजित किया जाए। कर्मियों को प्रतिमाह पहली तारीख को वेतन देने, न्यूनतम वेतन 12 हजार देने और वेतन स्लिप देने की मांग उठाई है। उन्हें आंगनबाड़ी की तर्ज पर एक साल में कम से कम 20 छुट्टियां दी जाएं। उन्हें आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं की तर्ज पर साल में दो वर्दी देने सहित कई अन्य मांगें पूरी करने की गुहार लगाई है।
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ज्यूरी में यूनियन ने बैठक कर तैयार की आगामी रणनीति
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्यूरी (रामपुर बुशहर)। मिड-डे मील वर्करों की मांगों और केंद्र सरकार की विरोधी नीतियों के खिलाफ मई महीने में देशव्यापी हड़ताल होगी। प्रदेश में कार्यरत 21 हजार मिड-डे मील कर्मियों की स्थिति बेहद दयनीय है। मिड-डे मील वर्कर यूनियन संबंधित सीटू की ब्लॉक इकाई सराहन की ज्यूरी में आयोजित बैठक में यूनियन अध्यक्ष मीना यह बात कही। बैठक में कई मुद्दों पर मंथन किया गया। इस अवसर पर सीटू जिला सचिव अमित, नारायण खन्ना, मीना, संगीता, दीक्षा, कृष्णा, विजय लक्ष्मी, सुमन, कृष्णा मेहता और उषा मौजूद रहीं। अमित, नारायण खन्ना, मीना और संगीता ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि वर्करों का मात्र 4,500 रुपये प्रतिमाह वेतन घोषित किया है, जोकि कई कई महीनों तक नहीं मिल रहा है। समय पर वेतन न मिलने से मिड-डे मील वर्करों को जीवनयापन करना मुश्किल हो रहा है। मिड-डे मील वर्करों को साल में एक भी छुट्टी नहीं दी जाती है। उन्हें इमरजेंसी, बीमारी व पारिवारिक कार्यक्रमों में छुट्टी करने पर अपनी जगह रिलीवर भेजना पड़ता है, जिसकी पांच सौ से सात सौ रुपये की दिहाड़ी का खर्चा भी उन्हें खुद ही उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 व वर्ष 2024 में माननीय उच्च न्यायालय ने मिड-डे मील वर्करों को 10 महीने की बजाय 12 महीने का वेतन देने का निर्णय सुनाया है, लेकिन उच्च न्यायालय के फैसले को अभी तक लागू नहीं किया गया है। प्रदेश सरकार की ओर से कम बच्चों की संख्या वाले स्कूलों को बंद करने और कुछ स्कूलों को दूसरे स्कूलों में मर्ज करने पर इन स्कूलों में कार्यरत मिड-डे मील वर्करों को भी अन्य कर्मचारियों की तर्ज पर अनिवार्य तौर पर अन्य नजदीकी स्कूलों में समायोजित किया जाए। कर्मियों को प्रतिमाह पहली तारीख को वेतन देने, न्यूनतम वेतन 12 हजार देने और वेतन स्लिप देने की मांग उठाई है। उन्हें आंगनबाड़ी की तर्ज पर एक साल में कम से कम 20 छुट्टियां दी जाएं। उन्हें आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं की तर्ज पर साल में दो वर्दी देने सहित कई अन्य मांगें पूरी करने की गुहार लगाई है।