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Rampur Bushahar News: फसल कम, खर्च ज्यादा, बागवान चिंतित

Wed, 19 Aug 2026 11:26 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 19 Aug 2026 11:26 PM IST
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समय पर सरकार ने राहत नहीं दी तो छोटे और सीमांत बागवानों की बढ़ेगी परेशानी
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बागवानों के सामने खड़ा हुआ आर्थिक संकट, खर्च निकालना भी हुआ मुश्किल

संवाद न्यूज एजेंसी

कोटखाई (रोहड़ू)।
इस वर्ष सेब की फसल कम होने से बागवान चिंता में हैं। उनका कहना है कि इस बार का सेब सीजन ‘आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया’ जैसी स्थिति लेकर आया है। फसल में आई कमी के कारण बागवानों को पूरे साल के खर्चों की चिंता सताने लगी है। बागवान शिव प्रताप, राजेश स्तान, ज्ञान ठाकुर, संजीव सावंत, जतिंदर चौहान और वरिंदर चौहान का कहना है कि सेब उत्पादन कम होने के बावजूद बागवानी पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। मजदूरों की मजदूरी, स्प्रे और दवाइयों का खर्च, बगीचों की देखभाल, परिवहन, पैकेजिंग, खाद-उर्वरक और अन्य कृषि कार्यों पर भारी खर्च हो रहा है। ऐसे में कम फसल से मिलने वाली आय पूरे वर्ष के खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। स्थानीय बागवानों ने बताया कि सेब की कम पैदावार के कारण अब पूरे साल के राशन, बैंक की ईएमआई, बच्चों की स्कूल फीस, बिजली-पानी के बिल और घरेलू खर्चों को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई बागवानों का कहना है कि सेब ही उनकी मुख्य आय का स्रोत है और इसी आमदनी पर पूरे परिवार का सालभर का बजट निर्भर करता है। बागवानों का कहना है कि मौसम की मार, कम फसल, रोगों और बढ़ती लागत ने उनकी आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है। उनका कहना है कि यदि सरकार और संबंधित एजेंसियों की ओर से राहत के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो छोटे और मध्यम वर्ग के बागवानों के लिए आने वाला समय और भी कठिन हो सकता है। बागवानों ने सरकार से बागवानी लागत कम करने, दवाइयों और कृषि सामग्री पर राहत, आसान ऋण पुनर्गठन तथा प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित बागवानों के लिए विशेष सहायता पैकेज की मांग की है। उनका कहना है कि इस बार कम फसल के कारण पूरे साल की आर्थिक व्यवस्था संभालना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
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