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लोकतांत्रिक प्रणाली हो रही कमजोर, न्यायपालिका भी जिम्मेवारी निभाने में नहीं सक्षम : सिंघा
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रामपुर में प्रेसवार्ता करते किसान सभा राज्य महासचिव राकेश सिंघा। संवाद
किसान सभा के राज्य सम्मेलन में किसान, मजदूर और आम आवाम के मुद्दों पर होगा मंथन
रामपुर में 13 और 14 को होगा सभा का 17वां राज्य सम्मेलन
सम्मेलन से पूर्व 13 अक्टूबर को रामपुर में होगी विशाल जनसभा
सम्मेलन को राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक धवले करेंगे संबोधित
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
हिमाचल किसान सभा का 17वां राज्य सम्मेलन 13 और 14 अक्तूबर को रामपुर बुशहर में होगा। इससे पहले 13 अक्तूबर को पूर्वाह्न 11 बजे विशाल जनसभा होगी। इसमें अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक धवले मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करेंगे। सम्मेलन में प्रदेशभर से किसान-बागवान और मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि भाग लेकर राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मुद्दों पर मंथन करेंगे। हिमाचल किसान सभा के राज्य महासचिव राकेश सिंघा ने रामपुर में प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिका बार-बार ईरान पर हमला कर रहा है और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज बंद पड़ा है। ऐसे में आने वाले समय में देश और प्रदेश में भुखमरी जैसे हालात पैदा होने वाले हैं। इसी को लेकर किसान सभा रणनीति तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि देश में लोकतांत्रिक प्रणाली कमजोर हो रही है। बीते शुक्रवार को जंतर-मंतर में लोगों को एकत्रित नहीं होने दिया गया। लोकतांत्रिक प्रणाली को नष्ट किया जा रहा है, मतदाताओं को मतदाता सूचियों से निकाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो जिम्मेदारी न्यायपालिका की भी है। वह भी अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभाने में सक्षम नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सम्मेलन में सम्मेलन में किसानों-बागवानों, मजदूरों और आम जनता की समस्याओं को लेकर आगामी संघर्ष की रणनीति तैयार की जाएगी। सेब उत्पादकों के लंबित भुगतान, प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का मुआवजा और रामपुर परियोजना की एक प्रतिशत रॉयल्टी का भुगतान प्रमुख मुद्दे रहेंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 और 2025 की प्राकृतिक आपदाओं में जिन लोगों के मकान और जमीनें क्षतिग्रस्त हुई हैं, लेकिन उन्हें अभी तक मुआवजा नहीं मिला है, उन्हें राहत देने की मांग उठाई जाएगी। बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत खरीदे गए सेब का लंबित भुगतान जारी करने पर भी जोर दिया जाएगा। किसान सभा दूध की गुणवत्ता के आधार पर निर्धारित 61 रुपये प्रति लीटर की दर का लाभ सीधे उत्पादकों के बैंक खातों में देने, प्रत्येक दुग्ध सहकारी समिति को दूध जांचने की मशीन उपलब्ध करवाने और भुगतान हर महीने सुनिश्चित करने की मांग उठाएगी। इसके अलावा मनरेगा को बहाल करने और कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग भी सम्मेलन में प्रमुखता से रखी जाएगी। सम्मेलन में बढ़ती महंगाई, कृषि लागत में वृद्धि, फसलों के उचित दाम, ग्रामीण रोजगार, मुक्त व्यापार समझौतों के प्रभाव, दलितों और महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। सभा ने किसानों-बागवानों के हितों की रक्षा और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान किया है। स्वागत समिति ने 13 अक्तूबर की जनसभा को सफल बनाने के लिए आम जनता से सहयोग की अपील की है।
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रामपुर में 13 और 14 को होगा सभा का 17वां राज्य सम्मेलन
सम्मेलन से पूर्व 13 अक्टूबर को रामपुर में होगी विशाल जनसभा
सम्मेलन को राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक धवले करेंगे संबोधित
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर।
हिमाचल किसान सभा का 17वां राज्य सम्मेलन 13 और 14 अक्तूबर को रामपुर बुशहर में होगा। इससे पहले 13 अक्तूबर को पूर्वाह्न 11 बजे विशाल जनसभा होगी। इसमें अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक धवले मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करेंगे। सम्मेलन में प्रदेशभर से किसान-बागवान और मजदूर संगठनों के प्रतिनिधि भाग लेकर राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मुद्दों पर मंथन करेंगे। हिमाचल किसान सभा के राज्य महासचिव राकेश सिंघा ने रामपुर में प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिका बार-बार ईरान पर हमला कर रहा है और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज बंद पड़ा है। ऐसे में आने वाले समय में देश और प्रदेश में भुखमरी जैसे हालात पैदा होने वाले हैं। इसी को लेकर किसान सभा रणनीति तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि देश में लोकतांत्रिक प्रणाली कमजोर हो रही है। बीते शुक्रवार को जंतर-मंतर में लोगों को एकत्रित नहीं होने दिया गया। लोकतांत्रिक प्रणाली को नष्ट किया जा रहा है, मतदाताओं को मतदाता सूचियों से निकाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो जिम्मेदारी न्यायपालिका की भी है। वह भी अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभाने में सक्षम नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सम्मेलन में सम्मेलन में किसानों-बागवानों, मजदूरों और आम जनता की समस्याओं को लेकर आगामी संघर्ष की रणनीति तैयार की जाएगी। सेब उत्पादकों के लंबित भुगतान, प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का मुआवजा और रामपुर परियोजना की एक प्रतिशत रॉयल्टी का भुगतान प्रमुख मुद्दे रहेंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 और 2025 की प्राकृतिक आपदाओं में जिन लोगों के मकान और जमीनें क्षतिग्रस्त हुई हैं, लेकिन उन्हें अभी तक मुआवजा नहीं मिला है, उन्हें राहत देने की मांग उठाई जाएगी। बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत खरीदे गए सेब का लंबित भुगतान जारी करने पर भी जोर दिया जाएगा। किसान सभा दूध की गुणवत्ता के आधार पर निर्धारित 61 रुपये प्रति लीटर की दर का लाभ सीधे उत्पादकों के बैंक खातों में देने, प्रत्येक दुग्ध सहकारी समिति को दूध जांचने की मशीन उपलब्ध करवाने और भुगतान हर महीने सुनिश्चित करने की मांग उठाएगी। इसके अलावा मनरेगा को बहाल करने और कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग भी सम्मेलन में प्रमुखता से रखी जाएगी। सम्मेलन में बढ़ती महंगाई, कृषि लागत में वृद्धि, फसलों के उचित दाम, ग्रामीण रोजगार, मुक्त व्यापार समझौतों के प्रभाव, दलितों और महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। सभा ने किसानों-बागवानों के हितों की रक्षा और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान किया है। स्वागत समिति ने 13 अक्तूबर की जनसभा को सफल बनाने के लिए आम जनता से सहयोग की अपील की है।