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Rampur Bushahar News: प्राकृतिक खेती ने लुभाया मन, सेवानिवृत्ति के बाद न्यायाधीश इसी में बिताएंगे जीवन
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल शलखर पहुंचकर ग्रामीणों के खेतों में ज
शलखर में ग्रामीणों की प्राकृतिक खेती का जायजा लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संजय करोल ने जाहिर की ईच्छा
संवाद न्यूज एजेंसी
पूह(किन्नौर)। किन्नौर जिले के सीमांत क्षेत्र में ग्रामीण प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसकी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संजय करोल ने सराहना की है। उन्होंने शुक्रवार को पूह खंड के शलखर पहुंचकर ग्रामीणों के खेतों में जाकर प्राकृतिक खेती का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने सेवानिवृत्त होने के बाद प्राकृतिक खेती करने की ईच्छा जताई। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संजय करोल शुक्रवार को पूह ब्लॉक के आदर्श प्राकृतिक गांव शलखर पहुंचे। यहां उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी हासिल की। ग्रामीणों ने न्यायाधीश को बताया कि वे नौ साल से बौद्ध गुरु लोचा रिंबोछे के दिए धार्मिक ज्ञान और आस्था को देखते हुए प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। यहां किसान और बागवान अपने खेतों में सेब, मटर, राजमाह और अन्य सब्जियों के उत्पादन में कीटनाशकों का उपयोग नहीं कर रहे हैं। वे प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। हालांकि, शुरू में वातावरण में बदलाव के चलते कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन वर्ष 2018 के बाद कृषि विभाग के साथ जुड़कर प्राकृतिक खेती की जानकारी ली। उसके बाद वे प्राकृतिक तरीके से रोगों और कीटों पर नियंत्रण कर रहे हैं। यहां किसान रासायनिक खाद के बजाय जैविक खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें गोमूत्र, गोबर, गुड़, खट्टी लस्सी आदि का मिश्रण होता है। न्यायाधीश किसानों की बताई जैविक खाद की इस विधि से काफी प्रभावित हुए और सेवानिवृत्ति के बाद अपने खेत में प्राकृतिक खेती करने की इच्छा जाहिर की।
इस मौके पर एडीएम पूह विनय मोदी, जिला बागवानी अधिकारी भूपेंद्र सिंह नेगी, विषय विशेषज्ञ शमशेर देहरू, देवराज कायथ, उद्यान विकास अधिकारी राधेश नेगी, जिला कृषि अधिकारी एवं परियोजना निदेशक आत्मा ओम प्रकाश बंसल, खंड तकनीकी प्रबंधक आत्मा जय नेगी, अरुण, पंचायत प्रधान सुमन लता नेगी सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पूह(किन्नौर)। किन्नौर जिले के सीमांत क्षेत्र में ग्रामीण प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसकी सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संजय करोल ने सराहना की है। उन्होंने शुक्रवार को पूह खंड के शलखर पहुंचकर ग्रामीणों के खेतों में जाकर प्राकृतिक खेती का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने सेवानिवृत्त होने के बाद प्राकृतिक खेती करने की ईच्छा जताई। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संजय करोल शुक्रवार को पूह ब्लॉक के आदर्श प्राकृतिक गांव शलखर पहुंचे। यहां उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी हासिल की। ग्रामीणों ने न्यायाधीश को बताया कि वे नौ साल से बौद्ध गुरु लोचा रिंबोछे के दिए धार्मिक ज्ञान और आस्था को देखते हुए प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। यहां किसान और बागवान अपने खेतों में सेब, मटर, राजमाह और अन्य सब्जियों के उत्पादन में कीटनाशकों का उपयोग नहीं कर रहे हैं। वे प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। हालांकि, शुरू में वातावरण में बदलाव के चलते कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन वर्ष 2018 के बाद कृषि विभाग के साथ जुड़कर प्राकृतिक खेती की जानकारी ली। उसके बाद वे प्राकृतिक तरीके से रोगों और कीटों पर नियंत्रण कर रहे हैं। यहां किसान रासायनिक खाद के बजाय जैविक खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें गोमूत्र, गोबर, गुड़, खट्टी लस्सी आदि का मिश्रण होता है। न्यायाधीश किसानों की बताई जैविक खाद की इस विधि से काफी प्रभावित हुए और सेवानिवृत्ति के बाद अपने खेत में प्राकृतिक खेती करने की इच्छा जाहिर की।
इस मौके पर एडीएम पूह विनय मोदी, जिला बागवानी अधिकारी भूपेंद्र सिंह नेगी, विषय विशेषज्ञ शमशेर देहरू, देवराज कायथ, उद्यान विकास अधिकारी राधेश नेगी, जिला कृषि अधिकारी एवं परियोजना निदेशक आत्मा ओम प्रकाश बंसल, खंड तकनीकी प्रबंधक आत्मा जय नेगी, अरुण, पंचायत प्रधान सुमन लता नेगी सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
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