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भगवान प्रत्येक जीव के हृदय में विराजमान : श्रीनिवासाचार्य
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आनी के कराणा में श्रीमद भागवत कथा सुनते ग्रामीण। संवाद
कराणा में श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन भक्ति, धर्म और मातृ सम्मान का दिया संदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
आनी (कुल्लू)। आनी खंड के कराणा गांव में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा चल रही है। तीसरे दिन कथावाचक श्रीनिवासाचार्य ने श्रद्धालुओं को भक्ति के मार्ग से भगवान की प्राप्ति का सुलभ उपाय बताया। उन्होंने कहा कि जहां भगवान की भक्ति होती है, वहां स्वयं भगवान निवास करते हैं। भगवान के नाम-स्मरण और ध्यान से ही मानव जीवन सफल बनता है, इसलिए जीवन भर इन दोनों बातों को अपनाना चाहिए। कथावाचक ने कहा कि भगवान प्रत्येक जीव के हृदय में विराजमान हैं। संसार को भले ही इसका ज्ञान न हो, लेकिन भगवान हर जीव के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। कथा के दौरान उन्होंने दक्ष प्रजापति, मनु के पुत्रों, ध्रुव और पृथु की प्रेरक कथाएं सुनाकर भक्ति, धैर्य और धर्म का महत्व समझाया। श्रीनिवासाचार्य ने कहा कि धर्म का पालन करते हुए ही अर्थ का अर्जन करना चाहिए और कामनाएं उतनी ही रखनी चाहिए, जिससे मोक्ष के मार्ग में कोई बाधा न आए।
उन्होंने माता के महत्व पर विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि मां अपने आप में सबसे सुंदर स्वरूप है। पहला गुरु मां ही होती है और मातृ ऋण से कभी मुक्ति नहीं मिलती, जिसने अपने हृदय का रस पिलाया है, उस मां से बढ़कर इस संसार में कोई भी नहीं है। गो सेवा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग गो सेवा के बजाय कुत्तों की सेवा को अधिक महत्व देने लगे हैं। कुत्ते पालना गलत नहीं, लेकिन घर के भीतर उनका प्रवेश उचित नहीं है, जबकि गो माता में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना गया है। कथा के तीसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति रस में डूबकर भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का श्रवण किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
आनी (कुल्लू)। आनी खंड के कराणा गांव में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा चल रही है। तीसरे दिन कथावाचक श्रीनिवासाचार्य ने श्रद्धालुओं को भक्ति के मार्ग से भगवान की प्राप्ति का सुलभ उपाय बताया। उन्होंने कहा कि जहां भगवान की भक्ति होती है, वहां स्वयं भगवान निवास करते हैं। भगवान के नाम-स्मरण और ध्यान से ही मानव जीवन सफल बनता है, इसलिए जीवन भर इन दोनों बातों को अपनाना चाहिए। कथावाचक ने कहा कि भगवान प्रत्येक जीव के हृदय में विराजमान हैं। संसार को भले ही इसका ज्ञान न हो, लेकिन भगवान हर जीव के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं। कथा के दौरान उन्होंने दक्ष प्रजापति, मनु के पुत्रों, ध्रुव और पृथु की प्रेरक कथाएं सुनाकर भक्ति, धैर्य और धर्म का महत्व समझाया। श्रीनिवासाचार्य ने कहा कि धर्म का पालन करते हुए ही अर्थ का अर्जन करना चाहिए और कामनाएं उतनी ही रखनी चाहिए, जिससे मोक्ष के मार्ग में कोई बाधा न आए।
उन्होंने माता के महत्व पर विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि मां अपने आप में सबसे सुंदर स्वरूप है। पहला गुरु मां ही होती है और मातृ ऋण से कभी मुक्ति नहीं मिलती, जिसने अपने हृदय का रस पिलाया है, उस मां से बढ़कर इस संसार में कोई भी नहीं है। गो सेवा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में लोग गो सेवा के बजाय कुत्तों की सेवा को अधिक महत्व देने लगे हैं। कुत्ते पालना गलत नहीं, लेकिन घर के भीतर उनका प्रवेश उचित नहीं है, जबकि गो माता में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना गया है। कथा के तीसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति रस में डूबकर भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का श्रवण किया।
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