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Rampur Bushahar News: उपमंडल स्तरीय समितियों ने जिला स्तरीय समिति को नहीं भेजे एफआरए के मामले

Sun, 18 Jan 2026 11:17 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 18 Jan 2026 11:17 PM IST
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बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने जताई चिंता, मार्च तक निपटारा करने का दिया आदेश
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ग्रामीण स्तरीय वन अधिकार समितियों ने 196 मामले भेजे

संवाद न्यूज एजेंसी

रामपुर बुशहर। जिले में ग्रामीण स्तरीय वन अधिकार समितियों (एफआरसी) की ओर से एफआरए के 196 मामले उपमंडल स्तरीय समितियों को भेजे गए, लेकिन आज तक एक भी मामला उपमंडल स्तरीय समिति ने जिला स्तरीय समिति को नहीं भेजा। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी इस पर चिंता जताई और अधिकारियों को मार्च तक अधिकतर मामलों का निपटारा करने का आदेश दिया। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने एफआरए (वन अधिकार अधिनियम-2006) के संबंध में शिमला जिले की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने रोहड़ू, जुब्बल, चौपाल, शिमला-ग्रामीण और कुपवी के उपमंडल अधिकारियों से एफआरए के मामलों की फीडबैक ली। राजस्व मंत्री ने कहा कि जिले में अब तक ग्रामसभा स्तर पर कुल 262 (सदस्य और समुदायों से) मामले प्राप्त हुए हैं। ग्रामीण स्तरीय वन अधिकार समितियों (एफआरसी) की ओर से 196 मामले उपमंडल स्तरीय समितियों को भेजे गए हैं, लेकिन यह बेहद चिंता का विषय है कि एक भी मामला आज तक उपमंडल स्तरीय समिति की ओर से जिला स्तरीय समिति को नहीं भेजा गया। उन्होंने अधिकारियों को मार्च तक अधिकतर मामलों का निपटारा करने के निर्देश दिए।

बैठक में अवगत करवाया गया कि जिले में 2,266 वन अधिकार समितियां गठित की गई हैं। चौपाल में 277, डोडरा-क्वार में नौ, जुब्बल में 129, कोटखाई में 215, कुपवी में 53, कुमारसैन में 154, रामपुर में 216, रोहड़ू में 170, शिमला ग्रामीण में 473, शिमला शहरी में 19, सुन्नी में 180 और ठियोग में 371 वन अधिकार समितियां गठित की गई हैं। इससे पहले बैठक में जनजातीय विकास के संयुक्त निदेशक कैलाश चौहान ने एफआरए-2006 के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र में यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2006 में वन अधिकार अधिनियम को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्रदान की गई थी और 1 जनवरी, 2008 से वन अधिकार अधिनियम लागू किया गया। उन्होंने कहा कि एफआरए 2006 के तहत अनुसूचित जनजाति और अन्य सभी श्रेणी के सदस्य या समुदाय जो 13 दिसंबर, 2005 से पहले कम से कम तीन पीढ़ियों से प्राथमिक रूप से वन भूमि पर निवास करते आ रहे हैं और अपनी आजीविका की वास्तविक जरूरतों के लिए वन या वन भूमि पर निर्भर हैं, उनको भूमि का अधिकार दिया जाएगा। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत, अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा, उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप, जिला के सभी एसडीएम, तहसीलदार, वन अधिकारी और अन्य राजस्व अधिकारी उपस्थित रहे।
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