फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   Sheep and goats sick, Kinnaur, Bhavnagar,

Rampur Bushahar News: भेड़-बकरियों में फैली बीमारी दवा के लिए भटक रहे पशुपालक

Wed, 28 Aug 2024 11:49 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 28 Aug 2024 11:49 PM IST
विज्ञापन
पशुपालक चिंंतित, पशु औषधालयों में दवाइयां नहीं, बकरियों को जंगलों में छोड़कर दवाइयों के लिए भटक रहे पशुपालक
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी

भावानगर (किन्नौर)। किन्नौर जिले के चौरा और तरांडा पंचायत के कंडों-जंगलों में भेड़ बकरियों में फैली बीमारी से पशुपालक चिंतित हैं। पशुपालकों का कहना है कि बीमारी से सैकड़ों भेड़ बकरियां बीमार हो गई हैं, वहीं पशुपालन विभाग के पशु औषधालयों में बकरियों की फेफड़ों से जुड़ी बीमारी की दवा उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में पशुपालकों को अपनी भेड़- बकरियों को जंगलों में छोड़कर दवाइयों की खोज में दर-दर भटकना पड़ रहा है। चौरा और तरांडा पंचायत के कंडे में काफी समय से भेड़ और बकरियों में बीमारियां फैली हैं। पशुपालकों ने अपने स्तर पर दवाइयां लेकर ठीक करने का प्रयास किया, लेकिन कामयाब नहीं हुए। हालांकि, पशुपालन विभाग के चिकित्सकों के दल ने कुछ भेड़ पालकों तक पहुंचकर भेड़-बकरियों का इलाज भी किया है। पशुपालकों का कहना है कि विभाग जल्द दवाइयां उपलब्ध कराए, क्योंकि जो दवाइयां भावानगर में निजी दवाइयों की दुकानों से उपलब्ध हो रही हैं, वो काफी महंगी है। चौरा गांव के भेड़ पालक मेहर चंद, अशोक कुमार, गोपीचंद, जय सिंह, कैलाश और ज्ञान सिंह ने बताया कि पिछले पांच दिन से भेड़-बकरियों में तेजी से बीमारी फैली है। करीब सौ भेड़-बकरियां बीमार हो गई है। खासकर, बकरियों के फेफड़ों से जुड़ी बीमारी की दवा कहीं उपलब्ध नहीं है। विभाग के औषधालयों में संबंधित दवा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने विभाग से तुरंत दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग की है। इनका कहना है कि गर्मियों में बाहर से आने वाले गुज्जरों की भेड़-बकरियां को संबंधित क्षेत्र में लाने पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए, क्योंकि गुज्जर हर वर्ष प्रदेश और प्रदेश के बाहर से भेड़-बकरियां लेकर आते हैं। इनमें कई तरह की बीमारियां होती है। इस बार भी गुज्जरों की भेड़-बकरियों में पहले बीमारियां थीं और चुगान साथ होने से अब धीरे-धीरे उनकी भेड़-बकरियों में भी बीमारी लग गई है। चौरा गांव के फकीर चंद ने बताया कि उनका एक बकरा पिछले कल बीमारी से मर गया, क्योंकि उसे फेफड़ों से जुड़ी बीमारी की दवा उपलब्ध नहीं हुई।

बकरियों में सीसीपी बीमारी फैली

तरांडा कंडे जाकर काफी पशुओं का इलाज किया। बकरियों में सीसीपी बीमारी फैली है। इससे फेफड़ों में पानी की बूंदे जैसी बनती हैं। इसके लिए कारगर और तुरंत प्रभावी दवा पशुपालकों को बताई गई है। फिलहाल, विभागीय सप्लाई में यह दवा नहीं है। पशुपालकों को किसी भी तरह की समस्या हो तो संपर्क कर सकते हैं। - रजत दत्ता, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी भावानगर
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article