{"_id":"67cd7467b6c85782a50b832b","slug":"rhododendron-flowers-nitthar-kullu-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1031-131198-2025-03-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: बुरांश की ललिमा से सराबोर आउटर सिराज की वादियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: बुरांश की ललिमा से सराबोर आउटर सिराज की वादियां
विज्ञापन
नित्थर क्षेत्रइ में बुरांस के फूल
वैशाख के महीने में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं बुरांश के फूल
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर (कुल्लू) । इन दिनों आउटर सिराज की खूबसूरत वादियां बुरांश के फूलों की ललिमा से सराबोर हैं। यह फूल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अधिक मात्रा में पाए जाते है। चेत्र और वैशाख के महीने में ज्यादा होते हैं। इस बार मौसम में बदलाव और जनवरी-फरवरी में बारिश के कम होने की वजह से एक महीना पहले बुरांश से फूल खिल गए हैं। इन फूलों में औषधीय गुण पाए जाते हैं। कई बीमारियों को दूर करने में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी तासीर ठंडी होती है। बुरांश के फूलों को आज भी घरों को सजाने के अलावा शरबत, जैम और चटनी बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। निथर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों ऐडशी, बुआई, कंडागई और लोट पंचायत के ऊपरी क्षेत्रों, शिल्ली और कुठेड़ पंचायत के गांव में अधिक मात्रा में यह फूल पाए। जाते है स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि पहले के समय में कई आयुर्वेदिक औषधि बनाने में इस फूल का इस्तेमाल किया जाता था। नाक की नकसीर निकलने पर उसे ठीक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर (कुल्लू) । इन दिनों आउटर सिराज की खूबसूरत वादियां बुरांश के फूलों की ललिमा से सराबोर हैं। यह फूल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अधिक मात्रा में पाए जाते है। चेत्र और वैशाख के महीने में ज्यादा होते हैं। इस बार मौसम में बदलाव और जनवरी-फरवरी में बारिश के कम होने की वजह से एक महीना पहले बुरांश से फूल खिल गए हैं। इन फूलों में औषधीय गुण पाए जाते हैं। कई बीमारियों को दूर करने में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी तासीर ठंडी होती है। बुरांश के फूलों को आज भी घरों को सजाने के अलावा शरबत, जैम और चटनी बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। निथर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों ऐडशी, बुआई, कंडागई और लोट पंचायत के ऊपरी क्षेत्रों, शिल्ली और कुठेड़ पंचायत के गांव में अधिक मात्रा में यह फूल पाए। जाते है स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि पहले के समय में कई आयुर्वेदिक औषधि बनाने में इस फूल का इस्तेमाल किया जाता था। नाक की नकसीर निकलने पर उसे ठीक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।