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Rampur Bushahar News: उपायुक्त ने किया सवाल 11 से ही क्यों सजता है लवी मेला, कमेटी से नहीं मिल पाया जवाब
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वर्षों से 11 नवंबर से शुरू होता आ रहा है अंतरराष्ट्रीय लवी मेला
कुल्लू दशहरा मेले के चलते हर वर्ष देरी से सजता है मेले का कारोबार
जिला प्रशासन से एक माह तक मेला सजाने का रखा प्रस्ताव
तिलक राज कायथ
रामपुर बुशहर। रामपुर का ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय लवी मेला सदियों से 11 नवंबर को ही क्यों शुरू होता है, इसका अभी तक कोई ठोस प्रमाण नहीं मिल पाया है। सोमवार को आयोजित बैठक में उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने मेला कमेटी के सदस्यों से सवाल किया कि यह मेला 11 नवंबर को ही क्यों शुरू होता है, तो इस सवाल का जवाब कोई नहीं दे पाया। हालांकि, तर्क दिया गया कि ठंड के इस माह में ऊंचाई वाले क्षेत्रों से पशुपालन और भेड़पालक रामपुर में व्यापार के लिए पहुंचते थे और यहां से जरूरत का सामान लेकर वापस लौटते थे। 11 से 14 नवंबर तक मेला आयोजित करने के बारे में कोई पुख्ता जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है। बैठक में सवाल उठे कि मेला भले ही 11 नवंबर से शुरू होता है, लेकिन मेले का कारोबार 20 नवंबर के बाद ही सजता है। ऐसे में मेले में आने वाले कारोबारियों को मेला सजाने के लिए कम समय मिलता है और उन्हें तय अवधि के बाद हटाना भी जरूरी है। सदस्यों ने कहा कि मेला देरी से सजने का कारण कुल्लू में आयोजित होने वाला अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव है। दशहरा उत्सव से ही व्यापारी रामपुर के लवी मेले में पहुंचते हैं। साथ ही किन्नौर महोत्सव के कारण भी रामपुर के लवी मेले का व्यापार देरी से सजता है। मेले में समय पर व्यापार गतिविधियां शुरू हो, इसके लिए प्रभावी और ठोस योजना आज दिन तक नहीं बन पाई है। हालांकि, जिस दिन राज्यपाल इस मेले का शुभारंभ करते हैं, तो केवल 30 प्रतिशत तक ही दुकानें सज पाती हैं। मेला सजते-सजते 20 नवंबर तक पहुंच जाता है और मेले की तय अवधि 30 नवंबर तय रहती है। मेला समिति की ओर से केवल दिसंबर के पहले सप्ताह तक ही कारोबार की छूट दी जाती है। ऐसे में व्यापारियों का कारोबार और मेले की व्यापार गतिविधियों भी प्रभावित होती हैं। ऐसे में यदि अंतरराष्ट्रीय लवी मेले को सजाने की तिथि में बदलाव होता है, तो व्यापारी, खरीदार और मेले में आने वाले लोग इसका लुत्फ उठा पाएंगे। नगर परिषद और मेला कमेटी सदस्यों ने जिला प्रशासन से मेले की अवधि एक माह तक निर्धारित करने की मांग उठाई है। हालांकि, बैठक में मेले की तिथि में फेरबदल करने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई हैं, लेकिन निकट भविष्य में इसे देखते हुए कोई निर्णय लिया जा सकता है।
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कुल्लू दशहरा मेले के चलते हर वर्ष देरी से सजता है मेले का कारोबार
जिला प्रशासन से एक माह तक मेला सजाने का रखा प्रस्ताव
तिलक राज कायथ
रामपुर बुशहर। रामपुर का ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय लवी मेला सदियों से 11 नवंबर को ही क्यों शुरू होता है, इसका अभी तक कोई ठोस प्रमाण नहीं मिल पाया है। सोमवार को आयोजित बैठक में उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने मेला कमेटी के सदस्यों से सवाल किया कि यह मेला 11 नवंबर को ही क्यों शुरू होता है, तो इस सवाल का जवाब कोई नहीं दे पाया। हालांकि, तर्क दिया गया कि ठंड के इस माह में ऊंचाई वाले क्षेत्रों से पशुपालन और भेड़पालक रामपुर में व्यापार के लिए पहुंचते थे और यहां से जरूरत का सामान लेकर वापस लौटते थे। 11 से 14 नवंबर तक मेला आयोजित करने के बारे में कोई पुख्ता जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है। बैठक में सवाल उठे कि मेला भले ही 11 नवंबर से शुरू होता है, लेकिन मेले का कारोबार 20 नवंबर के बाद ही सजता है। ऐसे में मेले में आने वाले कारोबारियों को मेला सजाने के लिए कम समय मिलता है और उन्हें तय अवधि के बाद हटाना भी जरूरी है। सदस्यों ने कहा कि मेला देरी से सजने का कारण कुल्लू में आयोजित होने वाला अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव है। दशहरा उत्सव से ही व्यापारी रामपुर के लवी मेले में पहुंचते हैं। साथ ही किन्नौर महोत्सव के कारण भी रामपुर के लवी मेले का व्यापार देरी से सजता है। मेले में समय पर व्यापार गतिविधियां शुरू हो, इसके लिए प्रभावी और ठोस योजना आज दिन तक नहीं बन पाई है। हालांकि, जिस दिन राज्यपाल इस मेले का शुभारंभ करते हैं, तो केवल 30 प्रतिशत तक ही दुकानें सज पाती हैं। मेला सजते-सजते 20 नवंबर तक पहुंच जाता है और मेले की तय अवधि 30 नवंबर तय रहती है। मेला समिति की ओर से केवल दिसंबर के पहले सप्ताह तक ही कारोबार की छूट दी जाती है। ऐसे में व्यापारियों का कारोबार और मेले की व्यापार गतिविधियों भी प्रभावित होती हैं। ऐसे में यदि अंतरराष्ट्रीय लवी मेले को सजाने की तिथि में बदलाव होता है, तो व्यापारी, खरीदार और मेले में आने वाले लोग इसका लुत्फ उठा पाएंगे। नगर परिषद और मेला कमेटी सदस्यों ने जिला प्रशासन से मेले की अवधि एक माह तक निर्धारित करने की मांग उठाई है। हालांकि, बैठक में मेले की तिथि में फेरबदल करने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई हैं, लेकिन निकट भविष्य में इसे देखते हुए कोई निर्णय लिया जा सकता है।