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Rampur Bushahar News: धनाह में धूमधाम से मनाया आठ बैसाख ठिरशु मेला
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देवता साहिब रखाऊ नाग से आशीर्वाद प्राप्त कर मेले में जमकर थिरके ग्रामीण
संवाद न्यूज एजेंसी
निथर(कुल्लू)। निथर उपतहसील के धनाह में शनिवार को आठ बैसाख का ठिरशु मेला धूमधाम से मनाया गया। आठ बैसाख को धनाह में ठिरशु मेला सैकड़ों वर्षों से मनाया जाता आ रहा है। मेले का मुख्य आकर्षण पौराणिक तरीके के स्वांग नृत्य रहा। मेले के दौरान पहाड़ी संस्कृति का नजारा देखने को मिला। मेले में बच्चों से लेकर बुजुर्ग अपना योगदान देते हैं। वर्षों से बने मुखौटे पहनकर गांव के पुरुष स्वांग नृत्य की प्रस्तुति दी। मेले के दौरान पूरा दिन लोगों ने नाटी पर झूमकर लोगों का खूब मनोरंजन किया। सात बैसाख में देवता साहिब रखाऊ नाग पूरे लाव लश्कर के साथ मंदिर से थोड़ी दूर द्रुमण नामक स्थान तक जाते हैं, जहां पर गांव की महिलाएं और पुरुष देवता साहब के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। देवता साहिब वाद्य यंत्रों की थापपर मंदिर की तरफ आते हैं। मंदिर के कारदार चांद कुमार शर्मा, मंदिर कमेटी के प्रधान पवन गोस्वामी, उप प्रधान विजय भूषण गोस्वामी, सचिव प्रेम पाल कोषाध्यक्ष राज पाल भंडारी, रमेश शर्मा कराउक, तोता राम, सुशील धनाटा, पूरवेश शर्मा, देसराज, विरेंद्र शर्मा, राम प्रकाश, सुनील दत्त, लाल राज, राजा राम और वार्ड पंच राम प्रकाश ने कहा कि गांव के बजुर्गों के अनुसार मेले का ऐतिहासिक दृष्टि से बड़ा महत्व है। पुराने समय में जब संचार के साधन नहीं हुआ करते थे, तब मेलों का आयोजन मिलने-जुलने के लिए किया जाता था। पौराणिक संस्कृति को दिखाने के लिए आज भी मेलों का बड़ा महत्व है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
निथर(कुल्लू)। निथर उपतहसील के धनाह में शनिवार को आठ बैसाख का ठिरशु मेला धूमधाम से मनाया गया। आठ बैसाख को धनाह में ठिरशु मेला सैकड़ों वर्षों से मनाया जाता आ रहा है। मेले का मुख्य आकर्षण पौराणिक तरीके के स्वांग नृत्य रहा। मेले के दौरान पहाड़ी संस्कृति का नजारा देखने को मिला। मेले में बच्चों से लेकर बुजुर्ग अपना योगदान देते हैं। वर्षों से बने मुखौटे पहनकर गांव के पुरुष स्वांग नृत्य की प्रस्तुति दी। मेले के दौरान पूरा दिन लोगों ने नाटी पर झूमकर लोगों का खूब मनोरंजन किया। सात बैसाख में देवता साहिब रखाऊ नाग पूरे लाव लश्कर के साथ मंदिर से थोड़ी दूर द्रुमण नामक स्थान तक जाते हैं, जहां पर गांव की महिलाएं और पुरुष देवता साहब के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। देवता साहिब वाद्य यंत्रों की थापपर मंदिर की तरफ आते हैं। मंदिर के कारदार चांद कुमार शर्मा, मंदिर कमेटी के प्रधान पवन गोस्वामी, उप प्रधान विजय भूषण गोस्वामी, सचिव प्रेम पाल कोषाध्यक्ष राज पाल भंडारी, रमेश शर्मा कराउक, तोता राम, सुशील धनाटा, पूरवेश शर्मा, देसराज, विरेंद्र शर्मा, राम प्रकाश, सुनील दत्त, लाल राज, राजा राम और वार्ड पंच राम प्रकाश ने कहा कि गांव के बजुर्गों के अनुसार मेले का ऐतिहासिक दृष्टि से बड़ा महत्व है। पुराने समय में जब संचार के साधन नहीं हुआ करते थे, तब मेलों का आयोजन मिलने-जुलने के लिए किया जाता था। पौराणिक संस्कृति को दिखाने के लिए आज भी मेलों का बड़ा महत्व है।