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Rampur Bushahar News: डेढ़ साल बाद भी सिरे नहीं चढ़ा भगवान परशुराम के प्रवेश द्वार का निर्माण
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चार ठहरियों को जोड़ने के उद्देश्य से किया जा रहा निर्माण, बजट के बावजूद कछुआ गति से चल रहा कार्य
लोगों ओर जनप्रतिनिधियों ने कार्य जल्द पूरा करने की उठाई मांग
ईशिका गौतम
रामपुर बुशहर। हिमाचल देव संस्कृति से जुड़ा एक ऐतिहासिक स्थल है। यहां विभिन्न देवी-देवता विराजमान हैं, जिन पर हजारों लोगों की आस्था आज भी कायम हैं। इसी संस्कृति को संजोए रखने के उद्देश्य से रामपुर में भगवान परशुराम के नाम से प्रवेशद्वार बनाया जा रहा है, जिसका कार्य बीते डेढ़ वर्ष से कछुआ गति से चल रहा है। बजट के बावजूद धीमी गति से चल रहे कार्य को लेकर क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों और ग्रामीणों में भारी रोष है। उन्होंने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से जल्द कार्य को पूरा करने की गुहार लगाई है। गौर हो कि रामपुर नप के जीरो प्वाइंट से भगवान परशुराम की चार ठहरियों को जोड़ने वाली सड़क पर प्रवेश द्वार का निर्माण कार्य डेढ़ वर्ष पहले शुरू हुआ था। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रवेश द्वार के लिए 10 लाख रुपये का बजट जारी किया था। प्रवेश द्वार का निर्माण भगवान परशु राम की चार ठहरियों शिंगला, लालसा, डंसा और को जोड़ने के उद्देश्य से किया जा रहा है। परशुराम देव समिति नोग घोड़ी चार ठहरी के अध्यक्ष बहादुर लाल, ग्राम पंचायत प्रधान शिंगला राज कुमार, डंसा प्रधान देशराज हुड्डन, सह सचिव कृष्ण कुमार, सचिव डॉ. मोहन लाल और अन्य ग्रामीणों ने कहा कि परशुराम की चार ठहरियों को जोड़ने के लिए भगवान परशुराम मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण लंबे अरसे से कछुआ गति से चल रहा है। जीरो प्वाइंट पर भूस्खलन का भी डर बना रहता है। बीती बरसात में भी द्वार के साथ भूस्खलन होने से सड़क को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने यहां सुरक्षा दीवार लगाने की मांग की भी मांग की। उन्होंने स्थानीय विधायक नंद लाल और लोक निर्माण विभाग से जीरों प्वाइंट पर शौचालय और वर्षाशालिका का निर्माण करने की भी मांग की है, जिससे क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों को जाने वाली आबादी को परेशानियां न झेलनी पड़े। लोक निर्माण विभाग रामपुर के अधिशासी अभियंता रजनीश बहल ने बताया कि सड़क के साथ हो रहे भूस्खलन से प्रवेशद्वार को कोई खतरा नहीं है। प्रवेश द्वार की छत लगाने का कार्य शेष बचा है, जो जल्द पूरा किया जाएगा।
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लोगों ओर जनप्रतिनिधियों ने कार्य जल्द पूरा करने की उठाई मांग
ईशिका गौतम
रामपुर बुशहर। हिमाचल देव संस्कृति से जुड़ा एक ऐतिहासिक स्थल है। यहां विभिन्न देवी-देवता विराजमान हैं, जिन पर हजारों लोगों की आस्था आज भी कायम हैं। इसी संस्कृति को संजोए रखने के उद्देश्य से रामपुर में भगवान परशुराम के नाम से प्रवेशद्वार बनाया जा रहा है, जिसका कार्य बीते डेढ़ वर्ष से कछुआ गति से चल रहा है। बजट के बावजूद धीमी गति से चल रहे कार्य को लेकर क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों और ग्रामीणों में भारी रोष है। उन्होंने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से जल्द कार्य को पूरा करने की गुहार लगाई है। गौर हो कि रामपुर नप के जीरो प्वाइंट से भगवान परशुराम की चार ठहरियों को जोड़ने वाली सड़क पर प्रवेश द्वार का निर्माण कार्य डेढ़ वर्ष पहले शुरू हुआ था। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रवेश द्वार के लिए 10 लाख रुपये का बजट जारी किया था। प्रवेश द्वार का निर्माण भगवान परशु राम की चार ठहरियों शिंगला, लालसा, डंसा और को जोड़ने के उद्देश्य से किया जा रहा है। परशुराम देव समिति नोग घोड़ी चार ठहरी के अध्यक्ष बहादुर लाल, ग्राम पंचायत प्रधान शिंगला राज कुमार, डंसा प्रधान देशराज हुड्डन, सह सचिव कृष्ण कुमार, सचिव डॉ. मोहन लाल और अन्य ग्रामीणों ने कहा कि परशुराम की चार ठहरियों को जोड़ने के लिए भगवान परशुराम मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण लंबे अरसे से कछुआ गति से चल रहा है। जीरो प्वाइंट पर भूस्खलन का भी डर बना रहता है। बीती बरसात में भी द्वार के साथ भूस्खलन होने से सड़क को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने यहां सुरक्षा दीवार लगाने की मांग की भी मांग की। उन्होंने स्थानीय विधायक नंद लाल और लोक निर्माण विभाग से जीरों प्वाइंट पर शौचालय और वर्षाशालिका का निर्माण करने की भी मांग की है, जिससे क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों को जाने वाली आबादी को परेशानियां न झेलनी पड़े। लोक निर्माण विभाग रामपुर के अधिशासी अभियंता रजनीश बहल ने बताया कि सड़क के साथ हो रहे भूस्खलन से प्रवेशद्वार को कोई खतरा नहीं है। प्रवेश द्वार की छत लगाने का कार्य शेष बचा है, जो जल्द पूरा किया जाएगा।