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40 रुपये मिले प्रति लीटर दूध के दाम, माह की 10 तारीख से पूर्व हो भुगतान : संघ
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रामपुर, निरमंड, आनी, करसोग और कुमारसैन में 10 नवंबर को प्रदर्शन प्रदेश करेंगे दुग्ध पालक
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। हिमाचल दुग्ध उत्पादक संघ ने प्रदेश सरकार से दूध के दाम 40 रुपये प्रतिलीटर निर्धारित करने की मांग उठाई है। दुग्ध उत्पादकों की मांगों को लेकर 10 नवंबर को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे। ये प्रदर्शन निरमंड, रामपुर, आनी, करसोग, ननखड़ी और कुमारसैन में होंगे। हिमाचल दुग्ध उत्पादक संघ के संयोजक देवकी नंद, सह संयोजक दिनेश मेहता ने बताया कि सरकार की गलत नीतियों के कारण दूध उत्पादक दुखी हैं और उनका शोषण हो रहा है। प्रदेश में आई अब तक की सरकारों ने दुग्ध उत्पादकों के लिए कोई स्थाई नीति नहीं बनाई है। इस कारण दूध उत्पादन घाटे का सौदा बन गया है। मिल्क फेडरेशन और निजी कंपनियों द्वारा किसानों को 22 रुपये से लेकर 30 रुपये तक दूध का दाम प्रति लीटर लिया जाता है, फीड, दवाई और चोकर के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इससे कि दूध को पैदा करने की लागत दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। ऐसे में दुग्ध उत्पादकों को अपना परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। दूसरी ओर इन उत्पादकों को दूध की पेमेंट भी समय पर नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने चुनाव से पहले जनता से वादा किया था कि हमारी सरकार सत्ता में आने के बाद 80 और 100 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से दूध खरीदेगी, जो केवल चुनावी घोषणा बनकर रह गया है। पशु औषधालयों में डॉक्टर के पद खाली पड़े हैं और कई पशु औषधालयों में ताले लटके हैं। संघ ने प्रदेश सरकार से मांग उठाई कि दूध के दाम कम से कम 40 रुपये प्रति लीटर किए जाए और दूध की पेमेंट हर माह 10 तारीख से पहले दी जाए। सभी सोसायटियों में दूध की गुणवत्ता को मापने के लिए टेस्टिंग मशीन लगाई जाए, जिससे दूध की गुणवत्ता को सुधारा जा सके। पशु औषधालय में सभी खाली पद भरे जाएं, पशु आहार पर सब्सिडी मिले, दूध को एकत्रित करने के लिए नए चिलिंग प्लांट खोले जाएं। इसके साथ ही संघ ने दत्तनगर में मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट खोलने की मांग की है जिससे यहां के बेरोजगार नौजवानों को रोजगार मिल सके। मिल्क फेडरेशन के लिए बजट का उचित प्रावधान किया जाए। उन्होंने चेताया कि अगर प्रदेश सरकार इन मांगों के समाधान के लिए कोई कदम नहीं उठाती तो 25 नवंबर को शिमला में सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। हिमाचल दुग्ध उत्पादक संघ ने प्रदेश सरकार से दूध के दाम 40 रुपये प्रतिलीटर निर्धारित करने की मांग उठाई है। दुग्ध उत्पादकों की मांगों को लेकर 10 नवंबर को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे। ये प्रदर्शन निरमंड, रामपुर, आनी, करसोग, ननखड़ी और कुमारसैन में होंगे। हिमाचल दुग्ध उत्पादक संघ के संयोजक देवकी नंद, सह संयोजक दिनेश मेहता ने बताया कि सरकार की गलत नीतियों के कारण दूध उत्पादक दुखी हैं और उनका शोषण हो रहा है। प्रदेश में आई अब तक की सरकारों ने दुग्ध उत्पादकों के लिए कोई स्थाई नीति नहीं बनाई है। इस कारण दूध उत्पादन घाटे का सौदा बन गया है। मिल्क फेडरेशन और निजी कंपनियों द्वारा किसानों को 22 रुपये से लेकर 30 रुपये तक दूध का दाम प्रति लीटर लिया जाता है, फीड, दवाई और चोकर के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इससे कि दूध को पैदा करने की लागत दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। ऐसे में दुग्ध उत्पादकों को अपना परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। दूसरी ओर इन उत्पादकों को दूध की पेमेंट भी समय पर नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने चुनाव से पहले जनता से वादा किया था कि हमारी सरकार सत्ता में आने के बाद 80 और 100 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से दूध खरीदेगी, जो केवल चुनावी घोषणा बनकर रह गया है। पशु औषधालयों में डॉक्टर के पद खाली पड़े हैं और कई पशु औषधालयों में ताले लटके हैं। संघ ने प्रदेश सरकार से मांग उठाई कि दूध के दाम कम से कम 40 रुपये प्रति लीटर किए जाए और दूध की पेमेंट हर माह 10 तारीख से पहले दी जाए। सभी सोसायटियों में दूध की गुणवत्ता को मापने के लिए टेस्टिंग मशीन लगाई जाए, जिससे दूध की गुणवत्ता को सुधारा जा सके। पशु औषधालय में सभी खाली पद भरे जाएं, पशु आहार पर सब्सिडी मिले, दूध को एकत्रित करने के लिए नए चिलिंग प्लांट खोले जाएं। इसके साथ ही संघ ने दत्तनगर में मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट खोलने की मांग की है जिससे यहां के बेरोजगार नौजवानों को रोजगार मिल सके। मिल्क फेडरेशन के लिए बजट का उचित प्रावधान किया जाए। उन्होंने चेताया कि अगर प्रदेश सरकार इन मांगों के समाधान के लिए कोई कदम नहीं उठाती तो 25 नवंबर को शिमला में सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा।