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Rampur Bushahar News: दरोटी गांव में जलते रहे मकान, एक किलोमीटर से डेढ़ घंटे में नहीं पहुंची दमकल टीम
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टिक्कर के दरोटी गांव में रात के समय भड़की आग
रोहडू। टिक्कर तहसील के दरोटी गांव में शनिवार रात हुए भीषण अग्निकांड में घर जलते रहे लेकिन महज एक किलोमीटर दूर अग्निशमन केंद्र से टीम को पहुंचने में डेढ़ घंटा लग गया। ऐसे में ग्रामीणों ने मिलकर आधे गांव को आग की चपेट में आने से बचाया। लोगों का मानना है कि अगर समय रहते दमकल विभाग की टीम पहुंच जाती है तो कई और घरों को बचाया जा सकता था।
अग्निकांड में नौ घर जलने से करीब 21 परिवार बेघर हो गए हैं। घरों के साथ ही कीमती सामान भी आग की भेंट चढ़ गया। अब प्रभावित परिवार दूसरे के घरों में शरण लेने को मजबूर हैं। इसमें कई परिवार ऐसे हैं जिनका सबकुछ इस अग्निकांड में राख हो गया है। हादसे से पहले आलीशान घरों में रहने वाले परिवार अब खुले आसमान के नीचे तिरपाल से बने तंबुओं में दिन गुजारने को मजबूर हैं। घटना के बाद दरोटी गांव में रविवार को दिनभर प्रभावितों से मिलने के लिए सैकड़ों लोग पहुंचे।
इस दौरान शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान, उपायुक्त शिमला आदित्य नेगी और एसडीएम ने प्रभाविताें से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को दस-दस हजार रुपये की फौरी राहत के साथ कंबल और राशन वितरित किया गया। रविवार को भी गांव के जले घरों से धुंआ उठता रहा, जिसे देखकर प्रभावित परिवार रोते बिलखते रहे।
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स्थानीय निवासी सुरेंद्र रांटा ने बताया कि गांव के बीच में उनका एक करीब तीन सौ साल पुराना मकान था। इस अग्निकांड में उनकर सबकुछ जलकर राख हो गया है। उनके पास बदन पर कपड़ों के सिवा कुछ नहीं बचा है। उन्होंने बताया कि आग पर काबू पाने के लिए पांच घरों को बाहर से तोड़ा गया। वहीं इस अग्निकांड ने परिवारों को कभी न भूलने वाले जख्म दिए हैं।
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अग्निकांड में नौ घर जलने से करीब 21 परिवार बेघर हो गए हैं। घरों के साथ ही कीमती सामान भी आग की भेंट चढ़ गया। अब प्रभावित परिवार दूसरे के घरों में शरण लेने को मजबूर हैं। इसमें कई परिवार ऐसे हैं जिनका सबकुछ इस अग्निकांड में राख हो गया है। हादसे से पहले आलीशान घरों में रहने वाले परिवार अब खुले आसमान के नीचे तिरपाल से बने तंबुओं में दिन गुजारने को मजबूर हैं। घटना के बाद दरोटी गांव में रविवार को दिनभर प्रभावितों से मिलने के लिए सैकड़ों लोग पहुंचे।
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इस दौरान शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान, उपायुक्त शिमला आदित्य नेगी और एसडीएम ने प्रभाविताें से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को दस-दस हजार रुपये की फौरी राहत के साथ कंबल और राशन वितरित किया गया। रविवार को भी गांव के जले घरों से धुंआ उठता रहा, जिसे देखकर प्रभावित परिवार रोते बिलखते रहे।
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स्थानीय निवासी सुरेंद्र रांटा ने बताया कि गांव के बीच में उनका एक करीब तीन सौ साल पुराना मकान था। इस अग्निकांड में उनकर सबकुछ जलकर राख हो गया है। उनके पास बदन पर कपड़ों के सिवा कुछ नहीं बचा है। उन्होंने बताया कि आग पर काबू पाने के लिए पांच घरों को बाहर से तोड़ा गया। वहीं इस अग्निकांड ने परिवारों को कभी न भूलने वाले जख्म दिए हैं।