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Rampur Bushahar News: ओलावृष्टि के बाद बारिश से बगीचों में छिड़काव का शेड्यूल हुआ प्रभावित
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बागवानों को सताने लगी चिंता, कैसे भरेंगे सेब के घाव
संवाद न्यूज एजेंसी
डंसा (रामपुर बुशहर)। सेब बहुल इलाकों के बागवानों की मौसम के बदले रुख ने परेशानी बढ़ा दी है। बागवानों को पहले ओलावृष्टि की मार झेलनी पड़ी और बारिश के कारण सेब के पेड़ों पर किए जाने वाले छिड़काव का कार्य रुक गया है। बागवानों को आगामी सीजन में फसल प्रभावित होने का डर सता रहा है। बीते शनिवार को भारी बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि से सेब के दानों में घाव बने हैं। सेब में हुए घाव की क्षतिपूर्ति के लिए बागवानी विशेषज्ञों की ओर से आवश्यकता अनुसार छिड़काव करने के सुझाव दिए गए थे, लेकिन रोजाना हो रही बारिश के कारण शेड्यूल गड़बड़ाने से बागवान चिंतित हैं। बागवानी विशेषज्ञों के मुताबिक ओलावृष्टि के बाद 72 घंटे के भीतर दो-तीन छिड़काव करवाने आवश्यक हैं ताकि सेब के दानों में पड़े जख्म काफी हद तक भर सकते हैं। बारिश का सिलसिला अभी आने वाले कुछ दिनों में और चलने के आसार मौसम विभाग ने जताए हैं। ऐसे में बागवान दुविधा में हैं कि छिड़काव करें या न करें, क्योंकि अभी ओलावृष्टि के आसार बन सकते हैं। बीते सप्ताह हुई भारी ओलावृष्टि ने बागवानों और किसानों की नकद फसल सेब, मटर, जौ सहित अन्य सभी तरह की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया था। क्षेत्र के प्रगतिशील बागवान पवन कुमार, जगत सिंह, छतर सिंह, बंसी लाल, दौलत राम, रूप दास, गोवर्धन, सूरज, लायक राम, यशपाल सहित सैकड़ों बागवानों का कहना है कि ओलावृष्टि से हर साल करोड़ों की बागवानी प्रभावित होती है। इससे बागवानों की वर्ष भर की मेहनत चंद पल में ही स्वाह हो जाती है। ओलावृष्टि के बाद मौसम का साफ होना जरूरी है, लेकिन लगातार मौसम की खराबी के चलते आवश्यक दवाइयों का छिड़काव समय रहते न होने से सेब की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा और इससे बागवानों की आर्थिकी प्रभावित होगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
डंसा (रामपुर बुशहर)। सेब बहुल इलाकों के बागवानों की मौसम के बदले रुख ने परेशानी बढ़ा दी है। बागवानों को पहले ओलावृष्टि की मार झेलनी पड़ी और बारिश के कारण सेब के पेड़ों पर किए जाने वाले छिड़काव का कार्य रुक गया है। बागवानों को आगामी सीजन में फसल प्रभावित होने का डर सता रहा है। बीते शनिवार को भारी बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि से सेब के दानों में घाव बने हैं। सेब में हुए घाव की क्षतिपूर्ति के लिए बागवानी विशेषज्ञों की ओर से आवश्यकता अनुसार छिड़काव करने के सुझाव दिए गए थे, लेकिन रोजाना हो रही बारिश के कारण शेड्यूल गड़बड़ाने से बागवान चिंतित हैं। बागवानी विशेषज्ञों के मुताबिक ओलावृष्टि के बाद 72 घंटे के भीतर दो-तीन छिड़काव करवाने आवश्यक हैं ताकि सेब के दानों में पड़े जख्म काफी हद तक भर सकते हैं। बारिश का सिलसिला अभी आने वाले कुछ दिनों में और चलने के आसार मौसम विभाग ने जताए हैं। ऐसे में बागवान दुविधा में हैं कि छिड़काव करें या न करें, क्योंकि अभी ओलावृष्टि के आसार बन सकते हैं। बीते सप्ताह हुई भारी ओलावृष्टि ने बागवानों और किसानों की नकद फसल सेब, मटर, जौ सहित अन्य सभी तरह की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया था। क्षेत्र के प्रगतिशील बागवान पवन कुमार, जगत सिंह, छतर सिंह, बंसी लाल, दौलत राम, रूप दास, गोवर्धन, सूरज, लायक राम, यशपाल सहित सैकड़ों बागवानों का कहना है कि ओलावृष्टि से हर साल करोड़ों की बागवानी प्रभावित होती है। इससे बागवानों की वर्ष भर की मेहनत चंद पल में ही स्वाह हो जाती है। ओलावृष्टि के बाद मौसम का साफ होना जरूरी है, लेकिन लगातार मौसम की खराबी के चलते आवश्यक दवाइयों का छिड़काव समय रहते न होने से सेब की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा और इससे बागवानों की आर्थिकी प्रभावित होगी।