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Rampur Bushahar News: नई परिसर प्रणाली के खिलाफ प्राथमिक शिक्षकों ने खोला मोर्चा
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. किन्नौर में सैकड़ों शिक्षकों ने निकाली रोष रैली, उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन
. चेताया, सरकार अधिसूचना वापस नहीं लेगी तो प्रदेश भर में होगी आक्रोश रैली और हड़ताल
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। प्रदेश सरकार की ओर से जारी नई परिसर प्रणाली (स्कूल क्लस्टर सिस्टम) की अधिसूचना के खिलाफ राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ किन्नौर ने मोर्चा खोल दिया है। संघ के आह्वान पर जिले के तीनों खंडों से सैकड़ों शिक्षक उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा कार्यालय पहुंचे और जोरदार विरोध-प्रदर्शन प्रदर्शन किया। वहीं, उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा के माध्यम से मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को ज्ञापन भेजा। शिक्षकों ने कहा कि 23 सितंबर 2025 को जारी निर्देश प्राथमिक शिक्षा के स्वतंत्र अस्तित्व को समाप्त करने वाले हैं। इसके विरोध में शिक्षकों ने शांतिपूर्ण ढंग से करीब एक किलोमीटर तक पैदल मार्च करते हुए उपायुक्त कार्यालय रिकांगपिओ तक रैली निकाली। संघ के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार, महासचिव संजय कुमार नेगी, पूर्व अध्यक्ष शमशेर डेरयान, राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के महालेखाकार तंजीन नेगी, महिला विंग जिला अध्यक्ष शीला देवी सहित अन्य खंड अध्यक्षों ने कहा कि वर्ष 1984 से प्राथमिक शिक्षा अलग एवं स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्य कर रही है। इसी व्यवस्था के चलते हिमाचल प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई अधिसूचना के तहत प्राथमिक विद्यालयों का पूर्ण नियंत्रण उच्च विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को सौंपा जा रहा है, जो प्राथमिक शिक्षकों के हितों पर कुठाराघात है। शिक्षकों का कहना है कि पूरी व्यवस्था को प्रधानाचार्यों के अधीन करने से कार्य का अत्यधिक केंद्रीकरण होगा। इससे मुख्य शिक्षक (एचटी), केंद्रीय मुख्य शिक्षक (सीएचटी) और खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (बीईईओ) की शक्तियां सीमित हो जाएगी और भविष्य में ये पद औपचारिक बनकर रह जाएंगे। एक ही स्तर पर समस्त जिम्मेदारी आने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। ज्ञापन में कहा कि 13 फरवरी 2024 को हुई वार्ता में सरकार ने आश्वासन दिया था कि क्लस्टर सिस्टम केवल संसाधनों के साझा उपयोग तक सीमित रहेगा और प्राथमिक शिक्षा के मूल ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। संघ का आरोप है कि 25 सितंबर 2025 को जारी अधिसूचना उस समझौते के विपरीत है। संघ पदाधिकारियों ने दावा किया कि 2024 और 2025 की शैक्षिक रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश ने देश में दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया है, जो शिक्षकों की मेहनत का परिणाम है, न कि परिसर प्रणाली का है। संघ ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि परिसर प्रणाली को तत्काल वापस नहीं लिया गया तो प्रदेश स्तर पर आक्रोश रैली और हड़ताल से भी पीछे नहीं हटेंगे। शिक्षकों ने कहा प्राथमिक शिक्षा को दो प्रशासनिक इकाइयों के अधीन करना तर्कसंगत नहीं है। यह निर्णय शिक्षकों के मनोबल को गिराने के साथ-साथ छोटे बच्चों की पढ़ाई को भी प्रभावित करेगा। सरकार अविलंब इस अधिसूचना को वापस ले।
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. चेताया, सरकार अधिसूचना वापस नहीं लेगी तो प्रदेश भर में होगी आक्रोश रैली और हड़ताल
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। प्रदेश सरकार की ओर से जारी नई परिसर प्रणाली (स्कूल क्लस्टर सिस्टम) की अधिसूचना के खिलाफ राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ किन्नौर ने मोर्चा खोल दिया है। संघ के आह्वान पर जिले के तीनों खंडों से सैकड़ों शिक्षक उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा कार्यालय पहुंचे और जोरदार विरोध-प्रदर्शन प्रदर्शन किया। वहीं, उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा के माध्यम से मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को ज्ञापन भेजा। शिक्षकों ने कहा कि 23 सितंबर 2025 को जारी निर्देश प्राथमिक शिक्षा के स्वतंत्र अस्तित्व को समाप्त करने वाले हैं। इसके विरोध में शिक्षकों ने शांतिपूर्ण ढंग से करीब एक किलोमीटर तक पैदल मार्च करते हुए उपायुक्त कार्यालय रिकांगपिओ तक रैली निकाली। संघ के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार, महासचिव संजय कुमार नेगी, पूर्व अध्यक्ष शमशेर डेरयान, राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के महालेखाकार तंजीन नेगी, महिला विंग जिला अध्यक्ष शीला देवी सहित अन्य खंड अध्यक्षों ने कहा कि वर्ष 1984 से प्राथमिक शिक्षा अलग एवं स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्य कर रही है। इसी व्यवस्था के चलते हिमाचल प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई अधिसूचना के तहत प्राथमिक विद्यालयों का पूर्ण नियंत्रण उच्च विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को सौंपा जा रहा है, जो प्राथमिक शिक्षकों के हितों पर कुठाराघात है। शिक्षकों का कहना है कि पूरी व्यवस्था को प्रधानाचार्यों के अधीन करने से कार्य का अत्यधिक केंद्रीकरण होगा। इससे मुख्य शिक्षक (एचटी), केंद्रीय मुख्य शिक्षक (सीएचटी) और खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (बीईईओ) की शक्तियां सीमित हो जाएगी और भविष्य में ये पद औपचारिक बनकर रह जाएंगे। एक ही स्तर पर समस्त जिम्मेदारी आने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। ज्ञापन में कहा कि 13 फरवरी 2024 को हुई वार्ता में सरकार ने आश्वासन दिया था कि क्लस्टर सिस्टम केवल संसाधनों के साझा उपयोग तक सीमित रहेगा और प्राथमिक शिक्षा के मूल ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। संघ का आरोप है कि 25 सितंबर 2025 को जारी अधिसूचना उस समझौते के विपरीत है। संघ पदाधिकारियों ने दावा किया कि 2024 और 2025 की शैक्षिक रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश ने देश में दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया है, जो शिक्षकों की मेहनत का परिणाम है, न कि परिसर प्रणाली का है। संघ ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि परिसर प्रणाली को तत्काल वापस नहीं लिया गया तो प्रदेश स्तर पर आक्रोश रैली और हड़ताल से भी पीछे नहीं हटेंगे। शिक्षकों ने कहा प्राथमिक शिक्षा को दो प्रशासनिक इकाइयों के अधीन करना तर्कसंगत नहीं है। यह निर्णय शिक्षकों के मनोबल को गिराने के साथ-साथ छोटे बच्चों की पढ़ाई को भी प्रभावित करेगा। सरकार अविलंब इस अधिसूचना को वापस ले।