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पूर्व बीएसएफ अधिकारी को समय पर मिलती मदद तो बच सकती थी जान : जगत सिंह
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रिकांगपिओ(किन्नौर)। किन्नौर के नेसंग गांव से संबंध रखने वाले पूर्व बीएसएफ अधिकारी एससी नेगी को 80 घंटे तक हेली सेवा न मिलना निंदनीय है। विधायक जगत सिंह नेगी ने आईटीबीपी की अंतिम पोस्ट से आगे जोडचेन ला सड़क सर्वे के लिए निकले पूर्व बीएसएफ अधिकारी की मौत मामले में सरकार, आईटीबीपी और बीएसएफ की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं।
रिकांगपिओ में पत्रकार वार्ता के दौरान जगत सिंह नेगी ने कहा कि यदि समय रहते एससी नेगी को प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन द्वारा हेली सेवा उपलब्ध करवाई गई होती तो शायद उनकी जान बच सकती थी। नेसंग से एलएसी लगभग 30 किलोमीटर दूरी पर है। यहां सड़क बनाने के लिए बीएडीपी के तहत बजट का प्रावधान किया गया था और सीमा तक पहुंचने के लिए सड़क का सर्वे होना था। बीते दो-तीन वर्षों से इस सर्वे की कोशिश की जा रही थी, परंतु दुर्गम रास्ता होने के कारण यह कार्य पूरा नहीं हो पाया है। गत सप्ताह बीएसएफ से सेवानिवृत्त डीआईजी एससी नेगी आईटीबीपी, लोनिवि और नेसंग के युवकों के दल के साथ सर्वे के लिए जा रहे थे कि रास्ते में पैर फिसलने के कारण वे गहरी खाई में गिर गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। लगभग 8 घंटे बाद उनका देहांत हो गया। नेगी ने सरकार, जिला प्रशासन, आईटीबीपी और बीएसएफ पर आरोप लगाते हुए कहा कि देश के महत्वपूर्ण कार्य के लिए निकले दल को दुर्घटना के समय किसी तरह की मदद नहीं पहुंचाई गई। हादसे के बाद इसकी सूचना सेटेलाइट के माध्यम से आईटीबीपी, बीएसएफ के उच्चाधिकारियों और जिला प्रशासन को दी गई। जब एससी नेगी को घायल अवस्था में हेलीपेड से लिफ्ट करने के लिए हेलीकाप्टर की मांग की गई तो न सरकार, न आईटीबीपी और न ही बीएसएफ ने हेलीकाप्टर भेजा। नेसंग गांव के युवाओं ने घायल एससी नेगी को 11 किलोमीटर दुर्गम रास्ते से पैदल हेलीपैड तक पहुंचाया। यहां भी शाम तक इंतजार करने के बाद हेली सेवा नहीं मिली, जिससे उनका देहांत हो गया। देश सेवा में जुटे पूर्व सेना अधिकारी को करीब 80 घंटे हेली सेवा न मिलने काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मांग की है कि नेसंग से एलएसी तक प्रस्तावित सड़क एससी नेगी के नाम से बनाई जाए। इस मौके पर चंद्र गोपाल नेगी और डॉ. सूर्या बोरस मौजूद रहे।
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रिकांगपिओ में पत्रकार वार्ता के दौरान जगत सिंह नेगी ने कहा कि यदि समय रहते एससी नेगी को प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन द्वारा हेली सेवा उपलब्ध करवाई गई होती तो शायद उनकी जान बच सकती थी। नेसंग से एलएसी लगभग 30 किलोमीटर दूरी पर है। यहां सड़क बनाने के लिए बीएडीपी के तहत बजट का प्रावधान किया गया था और सीमा तक पहुंचने के लिए सड़क का सर्वे होना था। बीते दो-तीन वर्षों से इस सर्वे की कोशिश की जा रही थी, परंतु दुर्गम रास्ता होने के कारण यह कार्य पूरा नहीं हो पाया है। गत सप्ताह बीएसएफ से सेवानिवृत्त डीआईजी एससी नेगी आईटीबीपी, लोनिवि और नेसंग के युवकों के दल के साथ सर्वे के लिए जा रहे थे कि रास्ते में पैर फिसलने के कारण वे गहरी खाई में गिर गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। लगभग 8 घंटे बाद उनका देहांत हो गया। नेगी ने सरकार, जिला प्रशासन, आईटीबीपी और बीएसएफ पर आरोप लगाते हुए कहा कि देश के महत्वपूर्ण कार्य के लिए निकले दल को दुर्घटना के समय किसी तरह की मदद नहीं पहुंचाई गई। हादसे के बाद इसकी सूचना सेटेलाइट के माध्यम से आईटीबीपी, बीएसएफ के उच्चाधिकारियों और जिला प्रशासन को दी गई। जब एससी नेगी को घायल अवस्था में हेलीपेड से लिफ्ट करने के लिए हेलीकाप्टर की मांग की गई तो न सरकार, न आईटीबीपी और न ही बीएसएफ ने हेलीकाप्टर भेजा। नेसंग गांव के युवाओं ने घायल एससी नेगी को 11 किलोमीटर दुर्गम रास्ते से पैदल हेलीपैड तक पहुंचाया। यहां भी शाम तक इंतजार करने के बाद हेली सेवा नहीं मिली, जिससे उनका देहांत हो गया। देश सेवा में जुटे पूर्व सेना अधिकारी को करीब 80 घंटे हेली सेवा न मिलने काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मांग की है कि नेसंग से एलएसी तक प्रस्तावित सड़क एससी नेगी के नाम से बनाई जाए। इस मौके पर चंद्र गोपाल नेगी और डॉ. सूर्या बोरस मौजूद रहे।
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