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कसन्नौर की मूरंग पंचायत में ओरमिंग मेले की धूम
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Orming fair celebrated in Moorang Panchayat
- फोटो : Kullu
सांगला (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर की समृद्ध लोक संस्कृति में ओरमिंग पर्व की अपनी एक अलग पहचान है। जिले के पूह खंड की मूरंग पंचायत में 8 दिन तक चलने वाले इस विशेष पर्व को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह देखा जाता है। यह विशेष पर्व बीते वीरवार से देवताओं के स्वर्ग प्रवास से लौटने के साथ ही शुरू हो गया है।
मूरंग पंचायत में सदियों से आयोजित हो रहे ओरमिंग पर्व क्षेत्र के ईष्ट देवता कुलदेवोशुंग और ओरमिंग शू के आदेशानुसार मनाया जाता है। देवों के निर्देशानुसार यह मेला चार दिन का होता है, जबकि अन्य चार दिन देवता के कार करिदें और ग्रामीण इस मेले को एक अलग अंदाज में मनाते हैं। इस मेले को लेकर मूरंग पंचायत के थवारिंग, कारजांग, ग्रामंग, लालेन, शिलींग, खोक्पा, कारवा और मकयरमंग सात गांव के लोगों में खासा उत्साह देखा जाता है। मेले के पहले दिन गांव के ईष्ट देवता कुलदेवोशुंग के साथ गांव से चुनें गए पांच पाडवों सहित करीब 40 लोगों का दल वाद्ययंत्रों की थाप पर मंदिर प्रांगण से चारों दिशाओं की पूजा अर्चना करते हैं। इसके बाद देवता क्षेत्र के भ्रमण के लिए निकलते हैं।
मूरंग के हर गांव में देवता भ्रमण कर शुभ आशीर्वाद देते हैं। हर गांव में देवता का गर्मजोशी से स्वागत होता है और नाचे गाने का खूब दौर चलता है। पर्व के चौथे दिन सुबह गांव के ईष्ट देवता कुलदेवोशुंग अपने मंदिर में विधिवत तरीके से पूजा अर्चना के साथ विराजमान होते हैं। इसके बाद देवता के कार कंरिदे और ग्रामीण ग्रामंग सानतांग में पारंपरिक वेश भूषाओं में सज-धजकर खूब नाटी यानी कायंग डालते हैं।
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ओरमिंग शू देवता के मोतमीन महेश्वर सिंह नेगी और देवता कुलदेवोशुंग के मुख्य कारदार एवं पूर्व प्रधान मूरंग प्रेम कुमार बासयान ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी इस पारंपरिक मेले को हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।
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मूरंग पंचायत में सदियों से आयोजित हो रहे ओरमिंग पर्व क्षेत्र के ईष्ट देवता कुलदेवोशुंग और ओरमिंग शू के आदेशानुसार मनाया जाता है। देवों के निर्देशानुसार यह मेला चार दिन का होता है, जबकि अन्य चार दिन देवता के कार करिदें और ग्रामीण इस मेले को एक अलग अंदाज में मनाते हैं। इस मेले को लेकर मूरंग पंचायत के थवारिंग, कारजांग, ग्रामंग, लालेन, शिलींग, खोक्पा, कारवा और मकयरमंग सात गांव के लोगों में खासा उत्साह देखा जाता है। मेले के पहले दिन गांव के ईष्ट देवता कुलदेवोशुंग के साथ गांव से चुनें गए पांच पाडवों सहित करीब 40 लोगों का दल वाद्ययंत्रों की थाप पर मंदिर प्रांगण से चारों दिशाओं की पूजा अर्चना करते हैं। इसके बाद देवता क्षेत्र के भ्रमण के लिए निकलते हैं।
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मूरंग के हर गांव में देवता भ्रमण कर शुभ आशीर्वाद देते हैं। हर गांव में देवता का गर्मजोशी से स्वागत होता है और नाचे गाने का खूब दौर चलता है। पर्व के चौथे दिन सुबह गांव के ईष्ट देवता कुलदेवोशुंग अपने मंदिर में विधिवत तरीके से पूजा अर्चना के साथ विराजमान होते हैं। इसके बाद देवता के कार कंरिदे और ग्रामीण ग्रामंग सानतांग में पारंपरिक वेश भूषाओं में सज-धजकर खूब नाटी यानी कायंग डालते हैं।
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ओरमिंग शू देवता के मोतमीन महेश्वर सिंह नेगी और देवता कुलदेवोशुंग के मुख्य कारदार एवं पूर्व प्रधान मूरंग प्रेम कुमार बासयान ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी इस पारंपरिक मेले को हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।