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Rampur Bushahar News: दस सालों से बिना कर्मचारी के चल रहा मनेवटी पशु औषद्यालय
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चौपाल की दूरदराज पंचायत किरण में पशु औषद्दालय मनेवटी
निजी फार्मासिस्ट को दिन के डेढ़ हजार रुपये अदा कर करवाया जाता है टीकाकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहडू)। उपमंडल चौपाल की दूरदराज पंचायत किरण में तीन दशक पहले खोला गया पशु औषद्यालय पर ताला लटका है। औषद्यालय परटेलर और किरण पंचायत के सैकड़ों पशुपालक निर्भर हैं। तीन दशक बीत जाने के बाद भी इस औषद्यालय के पास अपना भवन तक नहीं है।
औषद्यालय बीते दस सालों से बिना किसी कर्मचारी के चल रहा है। गुम्मा पशु औषद्यालय में तैनात फार्मासिस्ट को प्रतिनियुक्त पर भेजा तो जाता है। कई किलोमीटर का सफर कर एक फार्मासिस्ट को दो दो औषद्यालय का कार्यभार देखना पड़ रहा है।
पंचायत निवासी संत राम पांडेय, विजय जुरटा, शूरवीर, देबन सिंह, सोहन सिंह, राजा चौहान ने आरोप लगाया कि दुर्गम पंचायत में करीब तीन दशक पहले एक घर के बरामदे में पशु औषधालय खोला गया था। इसमें दस सालों से एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक की नियुक्ति नहीं की गई है। आज आलम यह है कि लोगों को पशुओं का टीकाकरण करवाने तथा छोटे छोटे उपचार के लिए भी उत्तराखंड के त्यूणी से निजी फार्मासिस्ट बुलवाना पड़ता है। वह वेक्सिनेशन करने के एक दिन के डेढ़ हजार रुपये तक ले लेता है। साथ ही इस फार्मासिस्ट का रहने और खाने-पीने का खर्च भी पशुपालक को करना पड़ता है।
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ढाई दशक पूर्व खोली डिपेंसरी के पास अपना भवन तो दूर की बात है इसके लिए अभी तक जमीन तक भी उपलब्ध नहीं हो पाई है। इस वजह से एक मकान के बरामदे में इसे चलाया जा रहा है। कई बार तो समय पर सही उपचार न मिल पाने की वजह से पशु बेमौत मर जाते हैं। पंचायतवासियों ने सरकार से गुहार लगाई कि मनेवटी पशु औषधालय में फार्मासिस्ट सहित अन्य स्टाफ की शीघ्र तैनाती की जाए।
वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी कुपवी डॉ. मनीष कुमार सहोटा ने कहा कि समय-समय पर खाली पदों और निजी भवन में पशु औषद्यालय के चलने की रिपोर्ट सरकार को भेजी जाती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल (रोहडू)। उपमंडल चौपाल की दूरदराज पंचायत किरण में तीन दशक पहले खोला गया पशु औषद्यालय पर ताला लटका है। औषद्यालय परटेलर और किरण पंचायत के सैकड़ों पशुपालक निर्भर हैं। तीन दशक बीत जाने के बाद भी इस औषद्यालय के पास अपना भवन तक नहीं है।
औषद्यालय बीते दस सालों से बिना किसी कर्मचारी के चल रहा है। गुम्मा पशु औषद्यालय में तैनात फार्मासिस्ट को प्रतिनियुक्त पर भेजा तो जाता है। कई किलोमीटर का सफर कर एक फार्मासिस्ट को दो दो औषद्यालय का कार्यभार देखना पड़ रहा है।
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पंचायत निवासी संत राम पांडेय, विजय जुरटा, शूरवीर, देबन सिंह, सोहन सिंह, राजा चौहान ने आरोप लगाया कि दुर्गम पंचायत में करीब तीन दशक पहले एक घर के बरामदे में पशु औषधालय खोला गया था। इसमें दस सालों से एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक की नियुक्ति नहीं की गई है। आज आलम यह है कि लोगों को पशुओं का टीकाकरण करवाने तथा छोटे छोटे उपचार के लिए भी उत्तराखंड के त्यूणी से निजी फार्मासिस्ट बुलवाना पड़ता है। वह वेक्सिनेशन करने के एक दिन के डेढ़ हजार रुपये तक ले लेता है। साथ ही इस फार्मासिस्ट का रहने और खाने-पीने का खर्च भी पशुपालक को करना पड़ता है।
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ढाई दशक पूर्व खोली डिपेंसरी के पास अपना भवन तो दूर की बात है इसके लिए अभी तक जमीन तक भी उपलब्ध नहीं हो पाई है। इस वजह से एक मकान के बरामदे में इसे चलाया जा रहा है। कई बार तो समय पर सही उपचार न मिल पाने की वजह से पशु बेमौत मर जाते हैं। पंचायतवासियों ने सरकार से गुहार लगाई कि मनेवटी पशु औषधालय में फार्मासिस्ट सहित अन्य स्टाफ की शीघ्र तैनाती की जाए।
वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी कुपवी डॉ. मनीष कुमार सहोटा ने कहा कि समय-समय पर खाली पदों और निजी भवन में पशु औषद्यालय के चलने की रिपोर्ट सरकार को भेजी जाती है।