{"_id":"666301fdfce4730b3500533f","slug":"lamkhaga-pass-uttarakhand-kinnaur-430-km-journey-maa-ganga-darshan-chitkul-kinnaur-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1031-117048-2024-06-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: लमखागा दर्रा लांघ, 430 किमी यात्रा कर मां गंगा के दर्शन कर छितकुल देवी लौटी अपने धाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: लमखागा दर्रा लांघ, 430 किमी यात्रा कर मां गंगा के दर्शन कर छितकुल देवी लौटी अपने धाम
विज्ञापन
देवी माता छितकुल के साथ गंगोत्री यात्रा पूरी करने बाद गांव पहुंचे 8 लोग
28 दिन बाद नौ लोगों के साथ छितकुल गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने देवी माता का किया भव्य स्वागत
बीरबल नेगी
सांगला (किन्नौर)। जनजातीय क्षेत्र किन्नौर जिले की प्रसिद्ध और शक्तिशाली देवी माता छितकुल पिछले 28 दिन से गांव के नौ लोगों के साथ गंगोत्री और बद्रीनाथ की यात्रा पूरी कर शुक्रवार को अपने धाम छितकुल मंदिर पहुंचीं। इस दौरान गांव के लोगों ने देवी माता का भव्य स्वागत किया और उनके साथ नौ लोगों का भी फूल मालाएं पहनाकर स्वागत किया।
इन 28 दिनों में देवी माता छितकुल के साथ नौ लोग बर्फीले, पथरीले पहाड़ों, ग्लेशियरों और लमखागा दर्रा 17,320 फीट को लांघते हुए 430 किलोमीटर की यात्रा करके गंगोत्री पहुंचे। वहां मां गंगा में स्नान करने के बाद ब्रदीनाथ की यात्रा पर निकले। बद्रीनाथ से वापस उत्तराखंड के जिला उतरकाशी के हरसिल गांव होते हुए वापस छितकुल पहुंचे। इस यात्रा पर गए लोगों में मदन सिंह, हिम्मत सिंह, अशोक नेगी, राजनीश कुमार, जसविंद्र, राजकिरण, राजेश नेगी और प्रवीन कुमार ने बताया कि इतनी कठिन यात्रा माता देवी के आशीर्वाद से ही संभव हो पाई। यात्रा के दौरान इस ट्रैक पर कोई हादसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इस दौरान किन्नौर जिले को उत्तराखंंड को जोड़ने वाले 17,320 फीट का लमखागा दर्रा, दूधियान दर्रा और छोटया दर्रा के रास्ते से चढ़ाई और उतराई करके गांव पहुंचे हैं। उनका कहना है कि लमखागा दर्रा जोखिम भरा है, लेकिन बर्फ होने पर उन्हें चढ़ाई और उतराई करने में परेशानी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि 10 मई को छितकुल गांव से निकले और 28 दिन के बाद शुक्रवार को वापस पहुंचे हैं। उन्होंने बिना प्रशिक्षण किए इस यात्रा को पूरा किया है।
विज्ञापन
बीरबल नेगी
सांगला (किन्नौर)। जनजातीय क्षेत्र किन्नौर जिले की प्रसिद्ध और शक्तिशाली देवी माता छितकुल पिछले 28 दिन से गांव के नौ लोगों के साथ गंगोत्री और बद्रीनाथ की यात्रा पूरी कर शुक्रवार को अपने धाम छितकुल मंदिर पहुंचीं। इस दौरान गांव के लोगों ने देवी माता का भव्य स्वागत किया और उनके साथ नौ लोगों का भी फूल मालाएं पहनाकर स्वागत किया।
इन 28 दिनों में देवी माता छितकुल के साथ नौ लोग बर्फीले, पथरीले पहाड़ों, ग्लेशियरों और लमखागा दर्रा 17,320 फीट को लांघते हुए 430 किलोमीटर की यात्रा करके गंगोत्री पहुंचे। वहां मां गंगा में स्नान करने के बाद ब्रदीनाथ की यात्रा पर निकले। बद्रीनाथ से वापस उत्तराखंड के जिला उतरकाशी के हरसिल गांव होते हुए वापस छितकुल पहुंचे। इस यात्रा पर गए लोगों में मदन सिंह, हिम्मत सिंह, अशोक नेगी, राजनीश कुमार, जसविंद्र, राजकिरण, राजेश नेगी और प्रवीन कुमार ने बताया कि इतनी कठिन यात्रा माता देवी के आशीर्वाद से ही संभव हो पाई। यात्रा के दौरान इस ट्रैक पर कोई हादसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इस दौरान किन्नौर जिले को उत्तराखंंड को जोड़ने वाले 17,320 फीट का लमखागा दर्रा, दूधियान दर्रा और छोटया दर्रा के रास्ते से चढ़ाई और उतराई करके गांव पहुंचे हैं। उनका कहना है कि लमखागा दर्रा जोखिम भरा है, लेकिन बर्फ होने पर उन्हें चढ़ाई और उतराई करने में परेशानी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि 10 मई को छितकुल गांव से निकले और 28 दिन के बाद शुक्रवार को वापस पहुंचे हैं। उन्होंने बिना प्रशिक्षण किए इस यात्रा को पूरा किया है।

देवी माता छितकुल के साथ गंगोत्री यात्रा पूरी करने बाद गांव पहुंचे 8 लोग
विज्ञापन