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ग्रामीणों की राय लिए बगैर परियोजना निर्माण को कैसे दे दी एनओसी : समिति
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बागासराहन पंचायत के ग्रामीणों ने विद्युत परियोजना के निर्माण पर जताया रोष। संवाद
किसान संघर्ष समिति ने बागीपुल हाइड्रो प्रोजेक्ट के निर्माण को स्थगित करने की उठाई मांग
अवैध वन भूमि कटान, सड़क निर्माण को लेकर जताया रोष, विभागों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
ग्रामीणों की मांगों पर नहीं हुई सुनवाई तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी समिति : ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी
निरमंड (कुल्लू)।
उपमंडल निरमंड की बागा सराहन पंचायत में निर्माणाधीन बागीपुल हाइड्रो प्रोजेक्ट के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूटा है। पंचायत की किसान संघर्ष समिति ने परियोजना के निर्माण को स्थगित करने की मांग उठाई है। समिति ने कहा कि ग्रामीणों की राय लिए बगैर परियोजना निर्माण को कैसे एनओसी दे दी। ग्रामीणों ने परियोजना और विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी रोष जताया है। समिति ने चेताया है कि यदि जल्द ग्रामीणों की मांग नहीं सुनी गई, तो ग्रामीण कोर्ट का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे। बागा सराहन पंचायत के बिहाड़ा में किसान संघर्ष समिति की बैठक हुई। अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष चंद्रेश ठाकुर ने की। बैठक में बताया कि दोहरानाला से बागीपुल तक प्रस्तावित हाइड्रो प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य किया जा रहा है। इससे क्षेत्र के स्थानीय लोग गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। इस परियोजना के बारे में स्थानीय जनता की स्पष्ट आपत्ति है। वर्ष 2014 में ग्राम पंचायत बागा सराहन ने इस परियोजना के निर्माण को लेकर अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया था, लेकिन इस संबंध में न तो ग्राम सभा में किसी प्रकार की सूचना दी गई और न ही यह बताया गया कि ग्रामवासी इस परियोजना के पक्ष में सहमत हैं या नहीं। ग्राम सभा में इस विषय पर कभी भी आम जनता के साथ कोई चर्चा नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना से 142 परिवार प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं और करीब 350 बीघा भूमि के बंजर होने की आशंका है। परियोजना निर्माण से स्थानीय गांवों को खतरा उत्पन्न हो गया है। जिस खड्ड पर यह परियोजना बनाई जा रही है, उसमें पहले से ही पानी की कमी है। वहीं, खड्ड का पानी यहां के किसानों के लिए धान की रोपाई के लिए भी पर्याप्त नहीं होता है। इसी खड्ड में 6 पुश्तैनी घराट भी स्थित हैं। क्षेत्र के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन कृषि और बागवानी है। क्षेत्र के युवा मत्स्य पालन से भी अपनी आर्थिकी को सुधार रहे हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना के कार्य से पहले ग्रामीणों के साथ कोई भी शर्तें तय नहीं की गईं। निर्माण कार्य तेज गति से किया जा रहा है, लेकिन स्थल पर परियोजना से संबंधित कोई सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है। परियोजना के निर्माण के लिए वन भूमि का अवैध कटान किया जा रहा है और वन भूमि में अवैध रूप से सड़क का निर्माण किया गया है। क्षेत्र में हर वर्ष बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हो रही हैं, जिससे आसपास के गांवों को खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग वर्ष 2014 से इस परियोजना का निरंतर विरोध करते आ रहे हैं। ग्राम सभा में भी इस परियोजना को बंद करने के लिए विरोध दर्ज किया गया है। इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने वन विभाग से यह भी स्पष्टीकरण मांगा है कि किस एफआरए कमेटी से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त किया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक स्थानीय लोगों के साथ परियोजना निर्माण को लेकर उचित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक परियोजना का कार्य स्थगित किया जाए। किसान संघर्ष समिति ने इस संबंध में कोर्ट जाने की भी धमकी दी है। इस मौके पर किसान संघर्ष समिति के सदस्य दीपेश कुमार, हरदयाल, सुरेश कुमार, अमृत लाल, पदम सिंह, चैन राम, लूदर सिंह, गंगा राम, तुला राम, रोशन लाल, जनता देवी, कमला देवी, राज कुमारी सहित अन्य मौजूद रहे।
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अवैध वन भूमि कटान, सड़क निर्माण को लेकर जताया रोष, विभागों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
ग्रामीणों की मांगों पर नहीं हुई सुनवाई तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी समिति : ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी
निरमंड (कुल्लू)।
उपमंडल निरमंड की बागा सराहन पंचायत में निर्माणाधीन बागीपुल हाइड्रो प्रोजेक्ट के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूटा है। पंचायत की किसान संघर्ष समिति ने परियोजना के निर्माण को स्थगित करने की मांग उठाई है। समिति ने कहा कि ग्रामीणों की राय लिए बगैर परियोजना निर्माण को कैसे एनओसी दे दी। ग्रामीणों ने परियोजना और विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी रोष जताया है। समिति ने चेताया है कि यदि जल्द ग्रामीणों की मांग नहीं सुनी गई, तो ग्रामीण कोर्ट का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे। बागा सराहन पंचायत के बिहाड़ा में किसान संघर्ष समिति की बैठक हुई। अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष चंद्रेश ठाकुर ने की। बैठक में बताया कि दोहरानाला से बागीपुल तक प्रस्तावित हाइड्रो प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य किया जा रहा है। इससे क्षेत्र के स्थानीय लोग गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। इस परियोजना के बारे में स्थानीय जनता की स्पष्ट आपत्ति है। वर्ष 2014 में ग्राम पंचायत बागा सराहन ने इस परियोजना के निर्माण को लेकर अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया था, लेकिन इस संबंध में न तो ग्राम सभा में किसी प्रकार की सूचना दी गई और न ही यह बताया गया कि ग्रामवासी इस परियोजना के पक्ष में सहमत हैं या नहीं। ग्राम सभा में इस विषय पर कभी भी आम जनता के साथ कोई चर्चा नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना से 142 परिवार प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहे हैं और करीब 350 बीघा भूमि के बंजर होने की आशंका है। परियोजना निर्माण से स्थानीय गांवों को खतरा उत्पन्न हो गया है। जिस खड्ड पर यह परियोजना बनाई जा रही है, उसमें पहले से ही पानी की कमी है। वहीं, खड्ड का पानी यहां के किसानों के लिए धान की रोपाई के लिए भी पर्याप्त नहीं होता है। इसी खड्ड में 6 पुश्तैनी घराट भी स्थित हैं। क्षेत्र के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन कृषि और बागवानी है। क्षेत्र के युवा मत्स्य पालन से भी अपनी आर्थिकी को सुधार रहे हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना के कार्य से पहले ग्रामीणों के साथ कोई भी शर्तें तय नहीं की गईं। निर्माण कार्य तेज गति से किया जा रहा है, लेकिन स्थल पर परियोजना से संबंधित कोई सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया है। परियोजना के निर्माण के लिए वन भूमि का अवैध कटान किया जा रहा है और वन भूमि में अवैध रूप से सड़क का निर्माण किया गया है। क्षेत्र में हर वर्ष बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हो रही हैं, जिससे आसपास के गांवों को खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग वर्ष 2014 से इस परियोजना का निरंतर विरोध करते आ रहे हैं। ग्राम सभा में भी इस परियोजना को बंद करने के लिए विरोध दर्ज किया गया है। इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने वन विभाग से यह भी स्पष्टीकरण मांगा है कि किस एफआरए कमेटी से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त किया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक स्थानीय लोगों के साथ परियोजना निर्माण को लेकर उचित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक परियोजना का कार्य स्थगित किया जाए। किसान संघर्ष समिति ने इस संबंध में कोर्ट जाने की भी धमकी दी है। इस मौके पर किसान संघर्ष समिति के सदस्य दीपेश कुमार, हरदयाल, सुरेश कुमार, अमृत लाल, पदम सिंह, चैन राम, लूदर सिंह, गंगा राम, तुला राम, रोशन लाल, जनता देवी, कमला देवी, राज कुमारी सहित अन्य मौजूद रहे।
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