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भारी विस्फोटों से हिले पहाड़, खतरे की जद में किन्नौर
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निगुलसरी में नहीं थम रहा भूस्खलन का सिलसिला।
- फोटो : RAMPUR-HP
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बीरबल नेगी
सांगला (किन्नौर)। जिले में भारी विस्फोटों और अंधाधुंध परियोजनाओं के निर्माण से जिला किन्नौर के पहाड़ पूरी तरह से हिल गए हैं। इससे जिले के अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है। वहीं भूकंप की दृष्टि से भी जनजातीय जिला अति संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में जिले की 80 हजार की आबादी खतरे के मुहाने पर खड़ी है। देश सीमा को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-पांच को चौड़ा और परियोजनाओं के निर्माण के लिए इस्तेमाल किए गए भारी विस्फोटों से भी दर्जनों स्थानों पर पहाड़ हिल गए हैं। इस कारण कहां, कब भूस्खलन हो जाए, यह कहना मुश्किल है।
निगुलसरी में बुधवार को हुए दर्दनाक हादसे के बाद जिले के लोगों में खौफ का माहौल बना हुआ है। जिले के लोग पहाड़ों के दरकने के लिए सबसे अधिक दोष विद्युत परियोजना के निर्माण को दे रहे हैं। जिले में अभी तक 32 विद्युत परियोजनाओं के निर्माण को मंजूरी मिली है। इसमें 14 परियोजनाएं विद्युत उत्पादन, जबकि शेष 18 परियोजनाएं निर्माणाधीन और प्रस्तावित हैं।
परियोजना निर्माण के लिए हुई बेतरतीब खुदाई और वनों का कटाव भी भूस्खलन की बड़ी वजह बताई जा रही है। बुधवार को निगुलसरी में एनएच पांच पर चील जंगल के पास पहाड़ी दरक गई। इसकी चपेट में दर्जनों लोग आ गए थे।
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इससे पूर्व भी निगुलसरी के 26 सेक्टर में करीब 100 मीटर सड़क धंस गई थी और दो दिन तक जिले का संपर्क कट गया था। एनएच पांच पर केवल यही जगह खतरों से भरी नहीं है, अपितु चौरा से लेकर समदू तक करीब 195 किलोमीटर एनएच पर कई स्थानों में पहाड़ दरक रहे हैं। जिले के निगुलसरी के नजदीक चील जंगल, सोल्डिंग, नाथपा, उरनी ढांक, लाल ढांक, पांगी नाला, पूर्वनी झूला, श्रीमति ढांक, मलिंग, भगत नाला और टिंकू नाला सहित अन्य कई स्थानों पर आए दिन भूस्खलन होता रहता है। हाल ही में इस मार्ग को चौड़ा करने का कार्य किया गया है।
जिले के लोगों का आरोप है कि एनएच को चौड़ा करते समय नियम कायदों को दरकिनार कर भारी ब्लास्टिंग की गई। इसके कारण पहाड़ जगह-जगह से हिल गए और कच्चे हो गए। जिले के लोगों ने प्रदेश सरकार से गुहार लगाई है कि जिले में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ही परियोजनाओं का निर्माण किया जाएगा और प्रस्तावित प्रोजेक्टों पर रोक लगाई जाए। संवाद
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सांगला (किन्नौर)। जिले में भारी विस्फोटों और अंधाधुंध परियोजनाओं के निर्माण से जिला किन्नौर के पहाड़ पूरी तरह से हिल गए हैं। इससे जिले के अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है। वहीं भूकंप की दृष्टि से भी जनजातीय जिला अति संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में जिले की 80 हजार की आबादी खतरे के मुहाने पर खड़ी है। देश सीमा को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-पांच को चौड़ा और परियोजनाओं के निर्माण के लिए इस्तेमाल किए गए भारी विस्फोटों से भी दर्जनों स्थानों पर पहाड़ हिल गए हैं। इस कारण कहां, कब भूस्खलन हो जाए, यह कहना मुश्किल है।
निगुलसरी में बुधवार को हुए दर्दनाक हादसे के बाद जिले के लोगों में खौफ का माहौल बना हुआ है। जिले के लोग पहाड़ों के दरकने के लिए सबसे अधिक दोष विद्युत परियोजना के निर्माण को दे रहे हैं। जिले में अभी तक 32 विद्युत परियोजनाओं के निर्माण को मंजूरी मिली है। इसमें 14 परियोजनाएं विद्युत उत्पादन, जबकि शेष 18 परियोजनाएं निर्माणाधीन और प्रस्तावित हैं।
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परियोजना निर्माण के लिए हुई बेतरतीब खुदाई और वनों का कटाव भी भूस्खलन की बड़ी वजह बताई जा रही है। बुधवार को निगुलसरी में एनएच पांच पर चील जंगल के पास पहाड़ी दरक गई। इसकी चपेट में दर्जनों लोग आ गए थे।
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इससे पूर्व भी निगुलसरी के 26 सेक्टर में करीब 100 मीटर सड़क धंस गई थी और दो दिन तक जिले का संपर्क कट गया था। एनएच पांच पर केवल यही जगह खतरों से भरी नहीं है, अपितु चौरा से लेकर समदू तक करीब 195 किलोमीटर एनएच पर कई स्थानों में पहाड़ दरक रहे हैं। जिले के निगुलसरी के नजदीक चील जंगल, सोल्डिंग, नाथपा, उरनी ढांक, लाल ढांक, पांगी नाला, पूर्वनी झूला, श्रीमति ढांक, मलिंग, भगत नाला और टिंकू नाला सहित अन्य कई स्थानों पर आए दिन भूस्खलन होता रहता है। हाल ही में इस मार्ग को चौड़ा करने का कार्य किया गया है।
जिले के लोगों का आरोप है कि एनएच को चौड़ा करते समय नियम कायदों को दरकिनार कर भारी ब्लास्टिंग की गई। इसके कारण पहाड़ जगह-जगह से हिल गए और कच्चे हो गए। जिले के लोगों ने प्रदेश सरकार से गुहार लगाई है कि जिले में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ही परियोजनाओं का निर्माण किया जाएगा और प्रस्तावित प्रोजेक्टों पर रोक लगाई जाए। संवाद